राजस्थान में आगामी 1 जून से प्रस्तावित पेट्रोल पंपों की बेमियादी हड़ताल फिलहाल टल गई है। राजस्थान पेट्रोलियम डीलर्स एसोसिएशन द्वारा घोषित इस बड़े आंदोलन को 15 दिनों के लिए स्थगित कर दिया गया है। राज्य सरकार के साथ सकारात्मक बातचीत और मुख्यमंत्री स्तर पर मिले भरोसे के बाद संगठन ने यह फैसला लिया। इस निर्णय के बाद प्रदेशभर में पेट्रोल और डीजल की संभावित किल्लत को लेकर बनी चिंता काफी हद तक खत्म हो गई है और आम जनता ने राहत की सांस ली है।
पिछले कई दिनों से राजस्थान में पेट्रोल पंप बंद होने की आशंका को लेकर चर्चा तेज थी। लोगों को डर था कि यदि हड़ताल शुरू हो गई तो परिवहन व्यवस्था, कृषि कार्य और जरूरी वस्तुओं की सप्लाई प्रभावित हो सकती है। कई जिलों में वाहन चालकों ने एहतियात के तौर पर पहले से ईंधन भरवाना शुरू कर दिया था। हालांकि अब एसोसिएशन की ओर से आंदोलन स्थगित करने की घोषणा के बाद हालात सामान्य होते दिखाई दे रहे हैं।
राजस्थान पेट्रोलियम डीलर्स एसोसिएशन का कहना है कि सरकार ने उनकी मांगों को गंभीरता से लिया है और समाधान की दिशा में सकारात्मक संकेत दिए हैं। संगठन के पदाधिकारियों के अनुसार उनकी प्रमुख मांगों पर सैद्धांतिक सहमति बनने की स्थिति बनी है, इसलिए जनहित को ध्यान में रखते हुए फिलहाल आंदोलन को टाल दिया गया है।
दरअसल यह पूरा विवाद राजस्थान में पेट्रोल और डीजल पर लगने वाले अधिक वैट को लेकर शुरू हुआ था। डीलर्स लंबे समय से मांग कर रहे हैं कि राज्य सरकार पेट्रोल और डीजल पर वैट की दरों में कम से कम पांच प्रतिशत की कटौती करे। उनका कहना है कि राजस्थान में ईंधन पर टैक्स पड़ोसी राज्यों हरियाणा और पंजाब की तुलना में अधिक है। इसी कारण सीमावर्ती क्षेत्रों के लोग दूसरे राज्यों से तेल भरवाना पसंद कर रहे हैं, जिससे राजस्थान के पेट्रोल पंपों की बिक्री प्रभावित हो रही है।
डीलर्स का दावा है कि ऊंचे वैट के कारण सीमावर्ती जिलों के कई पेट्रोल पंप आर्थिक संकट में पहुंच चुके हैं। कुछ पंपों की बिक्री में भारी गिरावट दर्ज की गई है और कई संचालकों के लिए कारोबार चलाना मुश्किल होता जा रहा है। इसी मुद्दे को लेकर राजस्थान पेट्रोलियम डीलर्स एसोसिएशन ने 1 जून से अनिश्चितकालीन हड़ताल की चेतावनी दी थी।
इस आंदोलन के ऐलान के बाद राज्य सरकार भी सक्रिय हो गई। पेट्रोल पंप बंद होने से प्रदेश की अर्थव्यवस्था, परिवहन और आम जनजीवन पर पड़ने वाले असर को देखते हुए मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने सीधे मामले में हस्तक्षेप किया। मुख्यमंत्री कार्यालय की ओर से अधिकारियों को एसोसिएशन के प्रतिनिधियों से वार्ता करने के निर्देश दिए गए। इसके बाद प्रशासनिक अधिकारियों और डीलर्स के बीच कई दौर की बातचीत हुई।
सरकार की ओर से डीलर्स को भरोसा दिलाया गया कि उनकी समस्याओं पर गंभीरता से विचार किया जा रहा है। खासतौर पर वैट विसंगति और सीमावर्ती क्षेत्रों में घटती बिक्री को लेकर सरकार समाधान निकालने की दिशा में काम कर रही है। मुख्यमंत्री के सकारात्मक रुख के बाद दोनों पक्षों के बीच जमी नाराजगी कम हुई और आंदोलन स्थगित करने पर सहमति बनी।
इस पूरे मामले में सबसे अहम पहलू आगामी 1 जून को प्रस्तावित उच्च स्तरीय बैठक को माना जा रहा है। जानकारी के अनुसार जयपुर स्थित शासन सचिवालय में मुख्य सचिव की अध्यक्षता में एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की जाएगी। इसमें खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति विभाग, वित्त विभाग और तेल विपणन कंपनियों के वरिष्ठ अधिकारी शामिल होंगे। इस बैठक में वैट कटौती और पेट्रोलियम डीलर्स से जुड़े अन्य आर्थिक मुद्दों पर विस्तार से चर्चा की जाएगी।
राजस्थान पेट्रोलियम डीलर्स एसोसिएशन ने यह भी स्पष्ट किया है कि आंदोलन को पूरी तरह खत्म नहीं किया गया है, बल्कि केवल 15 दिनों के लिए स्थगित किया गया है। संगठन के अनुसार यदि सरकार की ओर से ठोस कदम नहीं उठाए गए तो भविष्य में दोबारा आंदोलन शुरू किया जा सकता है। डीलर्स का कहना है कि वे आगामी बैठक और उसके बाद सरकार द्वारा जारी किए जाने वाले आदेशों का इंतजार करेंगे।
इस आंदोलन के पीछे डीलर्स की लंबे समय से चली आ रही रणनीतिक एकजुटता भी अहम रही है। पिछले कई सप्ताहों से प्रदेशभर में जिला स्तर पर ज्ञापन अभियान चलाया जा रहा था। पेट्रोल पंप संचालकों ने जिला कलेक्टरों और प्रशासनिक अधिकारियों के माध्यम से मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपे थे। इन ज्ञापनों में वैट विसंगति, सीएनजी कीमतों में अंतर और सरकारी भुगतानों में देरी जैसे मुद्दों को प्रमुखता से उठाया गया।
डीलर्स का आरोप है that कई बार सरकारी कार्यक्रमों और दौरों के दौरान क्रेडिट पर लिए गए ईंधन का भुगतान समय पर नहीं किया जाता, जिससे छोटे और मध्यम स्तर के पेट्रोल पंप संचालकों पर आर्थिक दबाव बढ़ता जा रहा है। इसके अलावा सीमावर्ती क्षेत्रों में पड़ोसी राज्यों की तुलना में अधिक कीमत होने से कारोबार प्रभावित हो रहा है।
राजस्थान में इस पूरे घटनाक्रम का असर केवल पेट्रोल पंप संचालकों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह आम जनता और किसानों से भी सीधे जुड़ा हुआ है। कृषि सीजन के दौरान डीजल की उपलब्धता किसानों के लिए बेहद महत्वपूर्ण होती है। ऐसे में यदि हड़ताल होती तो खेती और परिवहन दोनों पर बड़ा असर पड़ सकता था। इसी कारण एसोसिएशन ने भी जनहित को ध्यान में रखते हुए फिलहाल आंदोलन टालने का फैसला लिया।


