शोभना शर्मा। राजस्थान के टोंक जिले के टोडारायसिंह कस्बे में स्थित प्राचीन आमसागर की पाळ एक बार फिर स्थानीय लोगों के लिए परेशानी का सबब बन गई है। पिछले दो वर्षों के भीतर दूसरी बार यहां से हो रहे रिसाव ने आसपास बसे परिवारों को गहरी दहशत में डाल दिया है। लगातार बारिश और भू-जल स्तर बढ़ने से आमसागर लबालब भर चुका है, लेकिन इसके साथ ही पाळ की क्षतिग्रस्त सुरक्षा दीवार से हो रहा रिसाव पास के मकानों की नींव और दीवारों में दरारें पैदा कर रहा है। प्रभावित परिवारों ने आशंका जताई है कि अगर समय रहते प्रशासन ने ठोस कदम नहीं उठाए, तो कभी भी बड़ा हादसा हो सकता है।
आमसागर से रिसाव और बढ़ती दरारें
कस्बानिवासी राजाराम कुम्हार ने बताया कि हाल की अच्छी बारिश से आमसागर पूरी तरह भर गया है। लेकिन पाळ की दीवार में आई दरारों से लगातार पानी का रिसाव हो रहा है। इसका असर इतना गंभीर है कि आधा दर्जन से अधिक मकानों में गहरी दरारें पड़ चुकी हैं।
रामपाल पुत्र छोगालाल कुम्हार का मकान सबसे अधिक प्रभावित हुआ है। रिसाव के कारण उनके मकान की दीवारों में एक से दो इंच चौड़ी दरारें आ गई हैं, जिससे छत और दीवार अलग होने की स्थिति में हैं। परिवारजन इस आशंका में जी रहे हैं कि मकान कभी भी ढह सकता है। आसपास के मोहल्ले के लोगों का कहना है कि यदि जल्द मरम्मत कार्य नहीं हुआ तो दर्जनों घर संकट में आ सकते हैं।
दो साल पहले भी उठी थी समस्या
टोडारायसिंह कस्बे की तक्षकगिरी पहाड़ी की तलहटी में स्थित प्राचीन आमसागर दशकों से कस्बे की पहचान रहा है। लेकिन दो वर्ष पहले भी इसकी पाळ के शहरी क्षेत्र से जुड़े हिस्से में दीवार ढह गई थी। उस समय भी तलहटी में बसे कुम्हार और ब्राह्मण समुदाय के दर्जनों मकानों में दरारें आई थीं।
पिछली बार नगरपालिका ने अस्थायी समाधान के लिए पाळ पर मिट्टी के कट्टे लगा दिए थे, जबकि सीसी रोड भी जमींदोज हो गया था। उस दौरान भी लोग कई महीनों तक दहशत में रहे।
मंत्री के हस्तक्षेप से हुआ था निर्माण
दो वर्ष पहले जब यह समस्या गंभीर हुई थी, तब जलदाय मंत्री कन्हैयालाल चौधरी ने मौके का दौरा किया था। उनकी पहल पर करीब एक करोड़ रुपये की लागत से पाळ की सुरक्षा दीवार का पुनर्निर्माण कराया गया और सीसी रोड का निर्माण भी दोबारा हुआ।
लेकिन अब उसी हिस्से से दोबारा रिसाव शुरू होने से लोग प्रशासनिक कार्यों की गुणवत्ता पर सवाल उठा रहे हैं। प्रभावित परिवारों का कहना है कि करोड़ों रुपये खर्च करने के बावजूद समस्या जस की तस बनी हुई है और हर बारिश में उनकी जान और माल खतरे में पड़ जाते हैं।
प्रभावित परिवारों की चिंता
वार्ड 9 और वार्ड 14 के दर्जनों परिवार इस समय भयभीत हैं। स्थानीय निवासी रामपाल, प्रहलाद, सत्यनारायण और राजाराम ने बताया कि उनके मकानों में आए दरारें हर गुजरते दिन के साथ चौड़ी होती जा रही हैं। उन्होंने प्रशासन से मांग की है कि क्षतिग्रस्त मकानों का सर्वे कर प्रभावित परिवारों को राहत दी जाए और स्थायी समाधान निकाला जाए।
प्रशासनिक उदासीनता पर सवाल
स्थानीय लोगों का कहना है कि जब दो वर्ष पहले यह समस्या सामने आई थी, तब नगर पालिका और प्रशासन ने इसे गंभीरता से लिया था। लेकिन अब दोबारा स्थिति बिगड़ने के बावजूद अधिकारी सक्रिय नहीं दिख रहे हैं। लोगों ने चेतावनी दी है कि यदि समय रहते मरम्मत और सुरक्षा कार्य नहीं हुए तो कभी भी जानमाल का बड़ा नुकसान हो सकता है।


