मनीषा शर्मा। जयपुर में आयोजित एक महत्वपूर्ण वर्कशॉप के दौरान केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय की संयुक्त सचिव (आरसीएच) मीरा श्रीवास्तव ने खुलासा किया कि पिछले कुछ समय में सरकार ने करीब एक हजार ऐसे ऑनलाइन प्लेटफार्मों — वेबसाइट्स और वीडियो चैनलों — को ब्लॉक कराया है, जो लड़का पैदा करने के कथित “तरीकों” का प्रचार कर रहे थे। उन्होंने स्पष्ट कहा कि यह केवल PCPNDT कानून का उल्लंघन नहीं, बल्कि समाज में जेंडर भेदभाव की मानसिकता को बढ़ावा देने वाला गंभीर अपराध है। उन्होंने राज्यों से भी अपील की कि वे अपने स्तर पर ऐसी डिजिटल सामग्रियों की पहचान करें और सहयोग पोर्टल के माध्यम से उन्हें ब्लॉक कराने की पहल तेज़ करें। उनके अनुसार, तकनीक के इस दौर में ऑनलाइन सामग्री तक पहुंच बेहद आसान है, इसलिए निगरानी और कार्रवाई दोनों को समान रूप से मजबूत बनाना समय की मांग है।
जेंडर भेद खत्म करने की दिशा में सरकारी प्रयास
PCPNDT एक्ट के प्रभावी क्रियान्वयन पर केंद्रित इस वर्कशॉप में बताया गया कि सरकार “लड़का-लड़की बराबर है, तो पूछना क्यों” जैसे स्लोगन के साथ राष्ट्रीय स्तर पर जागरूकता अभियान चला रही है। उद्देश्य यह है कि समाज में बेटियों के प्रति नकारात्मक धारणाओं को तोड़ा जा सके और परिवारों को यह संदेश दिया जाए कि लिंग चयन या भ्रूण लिंग जांच केवल गैरकानूनी ही नहीं, नैतिक रूप से भी गलत है। प्रतिभागियों को बताया गया कि कई मामलों में परिवार सामाजिक दबाव, परंपरा या गलत जानकारी के कारण अवैध गतिविधियों की ओर झुक जाते हैं। इसलिए केवल सख्त कानून ही नहीं, बल्कि सतत संवाद, शिक्षा और सामुदायिक सहभागिता भी उतनी ही आवश्यक है।
बेबी बॉय कंटेंट पर सरकार की बड़ी कार्रवाई
मीरा श्रीवास्तव ने बताया कि जिन वेबसाइट्स और वीडियो चैनलों को ब्लॉक किया गया, वे “बेबी बॉय” पैदा करने के कथित घरेलू नुस्खों, दवाओं या गलत वैज्ञानिक दावों का प्रचार करते थे। इनमें से कई प्लेटफॉर्म लोगों को भ्रमित कर आर्थिक शोषण भी कर रहे थे। उन्होंने कहा कि यह प्रवृत्ति केवल महिलाओं के अधिकारों का हनन नहीं, बल्कि भविष्य की पीढ़ियों के जेंडर अनुपात को बिगाड़ने वाली है। इसलिए, केंद्र सरकार ने ऐसे कंटेंट के खिलाफ तकनीकी और कानूनी दोनों स्तरों पर सख्त कदम उठाए हैं।
विशेषज्ञ पैनल: कानून, मॉनिटरिंग और चुनौतियां
वर्कशॉप में राज्य समुचित प्राधिकारी पीसीपीएनडीटी के अध्यक्ष डॉ. अमित यादव, केंद्रीय उपयुक्त डॉक्टर पद्मिनी कश्यप, जेंडर स्पेशलिस्ट इफात हमीद और परियोजना निदेशक राकेश कुमार मीणा सहित कई विशेषज्ञ मौजूद रहे। इन्होंने एक्ट से जुड़ी न्यायिक प्रक्रिया, मॉनिटरिंग मैकेनिज्म और फील्ड-लेवल पर आने वाली चुनौतियों पर विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने कहा कि कई मामलों में अवैध प्रैक्टिसेस तकनीकी रूप से आधुनिक होती जा रही हैं, इसलिए जांच एजेंसियों को भी लगातार अपडेट रहना होगा। साथ ही, अभियोजन प्रक्रिया को तेज़ और साक्ष्य-आधारित बनाने पर जोर दिया गया, ताकि आरोपियों को सख्त सज़ा दिलाई जा सके और समाज में स्पष्ट संदेश जाए।
सोनोग्राफी मशीनों के रजिस्ट्रेशन पर सख्त निगरानी
मीरा श्रीवास्तव ने यह भी कहा कि सोनोग्राफी मशीनों के रजिस्ट्रेशन और रिन्युअल के लिए एक स्पष्ट टाइम-फ्रेम तय किया जाना चाहिए। इससे हर स्तर पर निगरानी आसान होगी और किसी भी मशीन के अवैध उपयोग को तुरंत ट्रैक किया जा सकेगा। उन्होंने बताया कि कई जगहों पर बिना रजिस्ट्रेशन के सोनोग्राफी मशीनें संचालित होती पाई गई हैं, जो पीसीपीएनडीटी एक्ट का स्पष्ट उल्लंघन है। ऐसे मामलों में त्वरित जांच और लाइसेंस रद्द करने जैसी कार्रवाई अनिवार्य होनी चाहिए। उनके अनुसार, मेडिकल फ्रेटर्निटी को भी अपनी नैतिक जिम्मेदारी निभानी चाहिए, ताकि स्वास्थ्य सेवाएं सुरक्षित और कानूनसम्मत ढंग से चल सकें।
समाज की भूमिका सबसे अहम
वर्कशॉप का एक महत्वपूर्ण निष्कर्ष यह रहा कि केवल सरकारी नियमों से बदलाव संभव नहीं। जब तक परिवार, समाज और समुदाय के प्रभावशाली लोग बेटियों को बराबरी का स्थान नहीं देंगे, तब तक जेंडर भेदभाव पूरी तरह खत्म नहीं होगा। अभियान इस दिशा में जागरूकता और संवेदनशीलता बढ़ाने का माध्यम बन रहा है। छात्रों, युवा समूहों, आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं और स्थानीय संगठनों को भी इस प्रयास से जोड़ने पर जोर दिया गया, ताकि संदेश अधिक व्यापक स्तर तक पहुंच सके।
भविष्य की दिशा
जयपुर की यह वर्कशॉप इस बात का संकेत है कि सरकार पीसीपीएनडीटी एक्ट को केवल कागज़ों में सीमित नहीं रखना चाहती, बल्कि जमीनी स्तर पर इसे सख्ती से लागू करने के लिए प्रतिबद्ध है। ऑनलाइन कंटेंट की निगरानी, सोनोग्राफी मशीनों का पारदर्शी रजिस्ट्रेशन, और न्यायिक प्रक्रिया के सुदृढ़ीकरण जैसे कदम आने वाले समय में जेंडर अनुपात सुधारने में अहम भूमिका निभा सकते हैं। साफ संकेत है — “लड़का-लड़की बराबर” का संदेश अब केवल नारा नहीं, बल्कि नीति और कार्ययोजना दोनों का केंद्र बन चुका है।


