मनीषा शर्मा। भारत की सीमाओं की सुरक्षा को और अधिक मजबूत तथा तकनीकी रूप से उन्नत बनाने के उद्देश्य से भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान जोधपुर (IIT जोधपुर) और सीमा सुरक्षा बल (BSF) ने एक रणनीतिक साझेदारी (Strategic Partnership) की है। इस साझेदारी के अंतर्गत दोनों संस्थान मिलकर भारत की सीमाओं पर निगरानी और सुरक्षा से जुड़ी स्वदेशी तकनीकों का विकास और क्रियान्वयन करेंगे। इसके लिए दोनों संस्थानों के बीच एक सहमति ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए गए। इस MoU पर बीएसएफ राजस्थान फ्रंटियर के महानिरीक्षक एम. एल. गर्ग और आईआईटी जोधपुर के निदेशक प्रो. अविनाश कुमार अग्रवाल ने हस्ताक्षर किए। इस अवसर पर बीएसएफ के वरिष्ठ अधिकारी, आईआईटी जोधपुर के संकाय सदस्य और अनुसंधान विशेषज्ञ भी उपस्थित रहे।
ड्रोन, एंटी-ड्रोन और एआई आधारित निगरानी तकनीक पर होगा संयुक्त कार्य
इस साझेदारी के तहत दोनों संस्थान कई प्रमुख क्षेत्रों में सहयोग करेंगे। इनमें शामिल हैं —
ड्रोन और एंटी-ड्रोन तकनीक का विकास
कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) आधारित निगरानी प्रणाली
सुरक्षित संचार नेटवर्क (Secure Communication Network)
स्मार्ट बॉर्डर प्रबंधन प्रणाली (Smart Border Management System)
रणनीतिक नवाचार (Strategic Innovation) और रक्षा तकनीक में आत्मनिर्भरता (Indigenization in Defence Technology)
इन तकनीकों का उद्देश्य है — सीमाओं पर संचालन दक्षता (Operational Efficiency) को बढ़ाना, सुरक्षा बलों की निगरानी क्षमताओं (Surveillance Capabilities) को सशक्त बनाना और स्वदेशी रक्षा प्रणाली (Indigenous Defence System) को विकसित करना।
IIT जोधपुर निदेशक बोले — “आत्मनिर्भर और तकनीकी रूप से सशक्त भारत की दिशा में बड़ा कदम”
आईआईटी जोधपुर के निदेशक प्रो. अविनाश कुमार अग्रवाल ने इस साझेदारी को “राष्ट्रीय सुरक्षा और तकनीकी आत्मनिर्भरता के बीच मजबूत सेतु” बताया। उन्होंने कहा, “यह समझौता भारत की वैज्ञानिक और तकनीकी क्षमताओं को राष्ट्रीय सुरक्षा के क्षेत्र में व्यावहारिक समाधान में बदलने का अवसर देगा। IIT जोधपुर का उद्देश्य ‘आत्मनिर्भर और प्रौद्योगिकी सशक्त भारत’ के निर्माण में अपना योगदान देना है।” उन्होंने बताया कि इस साझेदारी के तहत सीमा सुरक्षा से संबंधित वास्तविक समस्याओं पर इंजीनियरिंग और अनुसंधान समाधान (Engineering & Research Solutions) विकसित किए जाएंगे, ताकि देश की सीमाओं को और सुरक्षित, स्मार्ट और टिकाऊ बनाया जा सके।
मानेकशॉ सेंटर के माध्यम से होगी पहल का समन्वय
यह पहल IIT जोधपुर के मानेकशॉ सेंटर ऑफ एक्सीलेंस फॉर नेशनल सिक्योरिटी स्टडीज़ एंड रिसर्च (MCOENSSR) के माध्यम से समन्वित की जाएगी। यह केंद्र भारत के रक्षा और सुरक्षा क्षेत्रों में रणनीतिक नवाचार (Strategic Innovation), स्वदेशी तकनीक विकास (Indigenous Technology Development) और क्षमता निर्माण (Capacity Building) के लिए समर्पित है। आईआईटी जोधपुर के इस केंद्र का उद्देश्य न केवल तकनीकी अनुसंधान करना है, बल्कि उसे राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े संस्थानों के साथ साझा कर मैदान में लागू करना (Field Implementation) भी है।
BSF का योगदान: तकनीकी और परिचालन अनुभव का समन्वय
इस साझेदारी को बीएसएफ इंस्टीट्यूट ऑफ कम्युनिकेशन एंड इन्फॉर्मेशन टेक्नोलॉजी (BICIT), नई दिल्ली द्वारा संचालित किया गया है। इस संस्थान ने बीएसएफ की परिचालन आवश्यकताओं को आईआईटी जोधपुर की अनुसंधान विशेषज्ञता के साथ समन्वित (Integrate) करने में प्रमुख भूमिका निभाई। बीएसएफ राजस्थान फ्रंटियर के महानिरीक्षक एम. एल. गर्ग ने कहा, “आईआईटी जोधपुर के साथ हमारा यह संयुक्त प्रयास सीमा प्रबंधन तकनीकों में स्वदेशी नवाचार और आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देगा। यह सहयोग बीएसएफ की मिशन तैयारी और निगरानी क्षमताओं को और मजबूत बनाएगा।” उन्होंने कहा कि इस समझौते से सीमाओं पर तैनात बलों को ऐसे आधुनिक उपकरण और तकनीकी समाधान मिलेंगे जो स्थानीय जरूरतों और भौगोलिक परिस्थितियों के अनुरूप होंगे।
राष्ट्रीय सुरक्षा में नई दिशा: अकादमिक और सुरक्षा बलों का सहयोग
यह समझौता भारत में शैक्षणिक संस्थानों और सुरक्षा बलों के बीच नई दिशा में सहयोग का उदाहरण है। इससे यह सिद्ध होता है कि शैक्षणिक अनुसंधान और तकनीकी नवाचार केवल प्रयोगशालाओं तक सीमित नहीं रहेंगे, बल्कि देश की सीमाओं की रक्षा में प्रत्यक्ष भूमिका निभाएंगे। दोनों संस्थानों का उद्देश्य “अगली पीढ़ी की घरेलू सुरक्षा तकनीक” विकसित करना है, जो न केवल आयात पर निर्भरता को घटाएगी बल्कि भारत को वैश्विक तकनीकी नेतृत्व (Global Tech Leadership) की दिशा में अग्रसर करेगी।
आत्मनिर्भर भारत की दिशा में तकनीकी सशक्तिकरण
यह साझेदारी ‘मेक इन इंडिया’ और ‘आत्मनिर्भर भारत’ के विजन को सशक्त बनाती है। IIT जोधपुर और BSF की यह संयुक्त पहल उन स्वदेशी तकनीकों के विकास की ओर संकेत करती है जो भविष्य में भारत की सीमाओं को स्मार्ट, सुरक्षित और डिजिटल रूप से सक्षम (Tech-Enabled Smart Borders) बनाएंगी। इस MoU से न केवल सीमा सुरक्षा बलों की कार्यकुशलता बढ़ेगी, बल्कि देश के तकनीकी संस्थानों को भी राष्ट्रीय सुरक्षा नवाचार (National Security Innovation) में प्रत्यक्ष योगदान का अवसर मिलेगा।


