राजस्थान में आयोजित होने वाली बहुप्रतीक्षित SI भर्ती परीक्षा-2025 से ठीक एक दिन पहले जोधपुर में एक गंभीर लापरवाही का मामला सामने आया है, जिसने प्रशासन की तैयारियों पर सवाल खड़े कर दिए हैं। परीक्षा के प्रश्नपत्रों को सुरक्षित रखने के लिए तैयार किए गए स्टील बॉक्स की तस्वीर सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद प्रशासन ने तुरंत कार्रवाई करते हुए संबंधित कर्मचारी को निलंबित कर दिया है। यह घटना ऐसे समय में सामने आई है जब राज्य सरकार इस परीक्षा को लेकर पहले से ही अत्यधिक सतर्कता बरत रही है।
जानकारी के अनुसार, यह मामला जोधपुर शहर से जुड़ा हुआ है, जहां परीक्षा की तैयारियों में लगे एक कर्मचारी ने पेपर बॉक्स की फोटो अपने व्हाट्सएप स्टेटस पर साझा कर दी। यह कर्मचारी दीपक गहलोत बताया जा रहा है, जो भोपालगढ़ तहसील के एक सरकारी स्कूल में कंप्यूटर अनुदेशक के पद पर कार्यरत है। वर्तमान में वह डेपुटेशन पर जिला कलेक्ट्रेट में तैनात था और परीक्षा से संबंधित कार्यों में उसकी ड्यूटी लगाई गई थी।
प्रशासनिक अधिकारियों के अनुसार, परीक्षा के प्रश्नपत्रों को शुक्रवार शाम को स्टील के सुरक्षित बॉक्स में पैक कर कोषागार में रखा गया था। इस पूरी प्रक्रिया में कई अधिकारी और कर्मचारी शामिल थे, जिनमें दीपक गहलोत भी शामिल था। इसी दौरान उसने बॉक्स की फोटो खींचकर अपने व्हाट्सएप स्टेटस पर लगा दी, जो बाद में वायरल हो गई।
इस घटना की जानकारी मिलते ही प्रशासन हरकत में आया और तुरंत कार्रवाई की गई। जोधपुर के अतिरिक्त जिला मजिस्ट्रेट अंजुम ताहिर शमा ने बताया कि मामले की गंभीरता को देखते हुए जिला शिक्षा अधिकारी को सूचित किया गया, जिसके बाद संबंधित कर्मचारी को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया। प्रशासन ने स्पष्ट किया कि परीक्षा से जुड़ी किसी भी प्रकार की लापरवाही को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
इस घटना ने एक बार फिर परीक्षा सुरक्षा को लेकर चिंताएं बढ़ा दी हैं। विशेष रूप से इसलिए क्योंकि SI भर्ती परीक्षा-2021 पहले ही पेपर लीक और अनियमितताओं के कारण विवादों में रही थी। उस अनुभव से सीख लेते हुए सरकार और आयोग ने इस बार परीक्षा प्रक्रिया को पूरी तरह सुरक्षित और पारदर्शी बनाने के लिए कई कड़े कदम उठाए हैं।
इसी के तहत इस बार प्रश्नपत्रों को परीक्षा केंद्रों पर निर्धारित समय से केवल आधे घंटे पहले ही पहुंचाने की व्यवस्था की गई है। इसके अलावा, पेपर बॉक्स में डिजिटल लॉक और आधुनिक सुरक्षा प्रणाली का उपयोग किया जा रहा है, ताकि किसी भी प्रकार की छेड़छाड़ की संभावना को न्यूनतम किया जा सके। प्रश्नपत्रों के वितरण से लेकर खोलने तक की पूरी प्रक्रिया की वीडियोग्राफी की जाती है और हर चरण का रिकॉर्ड भी रखा जाता है।
जोधपुर में इस परीक्षा के लिए कुल 111 परीक्षा केंद्र बनाए गए हैं, जहां हजारों अभ्यर्थी परीक्षा देने वाले हैं। प्रशासन ने इन सभी केंद्रों पर सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए हैं और अधिकारियों व कर्मचारियों को स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं कि वे अपनी जिम्मेदारियों का पूरी गंभीरता से पालन करें।
हालांकि, इस घटना ने यह भी दिखा दिया कि केवल तकनीकी उपाय ही पर्याप्त नहीं हैं, बल्कि मानव स्तर पर भी सतर्कता और जिम्मेदारी बेहद जरूरी है। एक छोटी सी लापरवाही भी पूरी परीक्षा प्रक्रिया की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े कर सकती है। यही कारण है कि प्रशासन ने इस मामले में त्वरित और सख्त कार्रवाई करते हुए एक संदेश देने की कोशिश की है कि नियमों का उल्लंघन करने वालों को बख्शा नहीं जाएगा।
विशेषज्ञों का मानना है कि परीक्षा प्रणाली की विश्वसनीयता बनाए रखने के लिए इस प्रकार की घटनाओं पर तुरंत और कठोर कार्रवाई करना आवश्यक है। इससे न केवल अन्य कर्मचारियों को चेतावनी मिलती है, बल्कि अभ्यर्थियों का भरोसा भी बना रहता है।
इस पूरे घटनाक्रम के बीच अभ्यर्थियों के मन में भी चिंता उत्पन्न हुई है, हालांकि प्रशासन ने उन्हें आश्वस्त किया है कि परीक्षा पूरी तरह सुरक्षित और निष्पक्ष तरीके से आयोजित की जाएगी। सभी सुरक्षा उपायों को सख्ती से लागू किया जा रहा है और किसी भी प्रकार की गड़बड़ी की संभावना नहीं है।


