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ओवैसी ने बेनीवाल को डिप्टी स्पीकर बनाने की मांग उठाई

ओवैसी ने बेनीवाल को डिप्टी स्पीकर बनाने की मांग उठाई

लोकसभा में स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर हुई बहस के दौरान कई तीखे राजनीतिक बयान सामने आए। इसी दौरान एआईएमआईएम के सांसद असदुद्दीन ओवैसी ने एक नया राजनीतिक प्रस्ताव रखते हुए राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी के सांसद हनुमान बेनीवाल को लोकसभा का डिप्टी स्पीकर बनाने की मांग उठाई। ओवैसी ने कहा कि संविधान के अनुच्छेद 93 में लोकसभा में स्पीकर के साथ-साथ डिप्टी स्पीकर के पद का भी स्पष्ट प्रावधान है। उन्होंने घोषणा की कि वह चंद्रशेखर और राजकुमार रोत जैसे सांसदों के साथ मिलकर हनुमान बेनीवाल को डिप्टी स्पीकर बनाए जाने के लिए प्रस्ताव लाने वाले हैं।

ओवैसी ने यह भी कहा कि अन्य सांसदों से भी इस प्रस्ताव का समर्थन लेने की कोशिश की जाएगी, ताकि संसद में एक संतुलित और मजबूत व्यवस्था कायम की जा सके।

संविधान में डिप्टी स्पीकर का प्रावधान

अपने भाषण के दौरान ओवैसी ने संविधान के अनुच्छेद 93 का उल्लेख करते हुए कहा कि लोकसभा में डिप्टी स्पीकर का पद केवल औपचारिक नहीं है, बल्कि संसदीय कार्यवाही को संतुलित और सुचारु रूप से चलाने में इसकी महत्वपूर्ण भूमिका होती है। उन्होंने कहा कि लंबे समय से इस पद को लेकर चर्चा होती रही है और इसे भरना लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए जरूरी है। ओवैसी के अनुसार यदि डिप्टी स्पीकर का पद सक्रिय रूप से कार्य करेगा तो संसद की कार्यवाही अधिक संतुलित और प्रभावी तरीके से संचालित हो सकेगी।

संसद की स्वतंत्रता पर उठाए सवाल

बहस के दौरान ओवैसी ने संसद की कार्यप्रणाली और स्वतंत्रता को लेकर भी चिंता जताई। उन्होंने कहा कि भारत में सत्ता के तीन प्रमुख स्तंभ होते हैं—विधायिका, कार्यपालिका और न्यायपालिका। इन तीनों के बीच संतुलन बनाए रखना लोकतंत्र के लिए बेहद आवश्यक है। ओवैसी ने आरोप लगाया कि पिछले कुछ समय से ऐसा देखने को मिल रहा है कि सरकार बार-बार विधायिका पर प्रभाव डालने की कोशिश कर रही है। उन्होंने कहा कि संसद की स्वतंत्रता कम होती जा रही है और यह लोकतंत्र के लिए चिंताजनक स्थिति है। उनके अनुसार स्पीकर का पद अत्यंत महत्वपूर्ण होता है और यह सुनिश्चित करना आवश्यक है कि इस पद पर बैठे व्यक्ति पर किसी भी प्रकार का दबाव या प्रभाव न हो।

पूर्व लोकसभा अध्यक्षों के उदाहरण

अपने भाषण के दौरान ओवैसी ने संसद के इतिहास के कुछ उदाहरण भी दिए। उन्होंने पूर्व लोकसभा अध्यक्ष सोमनाथ चटर्जी का उल्लेख करते हुए कहा कि उन्होंने अपने कार्यकाल के दौरान संसद की गरिमा और अधिकारों की रक्षा के लिए कई महत्वपूर्ण फैसले लिए थे।

ओवैसी ने कहा कि एक समय ऐसा भी आया था जब सुप्रीम कोर्ट की ओर से नोटिस जारी किया गया था, लेकिन सोमनाथ चटर्जी ने स्पष्ट शब्दों में कहा था कि संसद की आंतरिक कार्यवाही में न्यायपालिका का हस्तक्षेप स्वीकार नहीं किया जा सकता। उन्होंने कहा कि यह उदाहरण बताता है कि लोकसभा अध्यक्ष का पद कितना शक्तिशाली और स्वतंत्र होना चाहिए।

संसद की शक्ति से जुड़ा ऐतिहासिक प्रसंग

ओवैसी ने 1960 के दशक का एक ऐतिहासिक प्रसंग भी साझा किया। उन्होंने बताया कि उस समय हिसार से सांसद मनीराम बागड़ी ने तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू के घर के बाहर प्रदर्शन किया था। प्रदर्शन के बाद पुलिस उन्हें गिरफ्तार करना चाहती थी, लेकिन वे तत्कालीन लोकसभा अध्यक्ष हुकुम सिंह के पास पहुंचे। हुकुम सिंह ने उन्हें संसद परिसर में रहने की सलाह दी और कहा कि वहां उन्हें गिरफ्तार नहीं किया जा सकता।

ओवैसी के अनुसार मनीराम बागड़ी ने संसद परिसर में टेंट लगाकर कई दिनों तक वहीं निवास किया और पुलिस उन्हें गिरफ्तार नहीं कर सकी। बाद में जब वे 1965 में संसद परिसर से बाहर निकले तब जाकर उनकी गिरफ्तारी हुई। उन्होंने कहा कि यह घटना बताती है कि लोकसभा अध्यक्ष के पास कितनी शक्तियां होती हैं और संसद की गरिमा कितनी महत्वपूर्ण होती है।

संसद परिसर में टैंक तैनात करने का मुद्दा

ओवैसी ने अपने भाषण में वर्ष 2016 की एक घटना का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि उस समय संसद भवन के सामने सेना के टैंक को खड़ा किया गया था। उनके अनुसार यह कदम विधायिका की गरिमा के खिलाफ था और इससे यह सवाल उठता है कि क्या संसद की स्वायत्तता का सम्मान किया जा रहा है या नहीं। ओवैसी ने कहा कि स्पीकर की भूमिका केवल कार्यवाही संचालित करने तक सीमित नहीं होती, बल्कि संसद की गरिमा और अधिकारों की रक्षा करना भी उनकी जिम्मेदारी होती है।

बेनीवाल का भी सरकार पर निशाना

इस बहस के दौरान आरएलपी सांसद हनुमान बेनीवाल ने भी अपनी बात रखते हुए कहा कि लोकसभा में डिप्टी स्पीकर का पद भरा जाना चाहिए। उनके अनुसार यदि उपाध्यक्ष नियुक्त हो जाए तो स्पीकर पर काम का बोझ भी कम हो जाएगा और संसद की कार्यवाही बेहतर ढंग से चल सकेगी। बेनीवाल ने सुझाव दिया कि उपाध्यक्ष का पद विपक्षी दलों या छोटे दलों के किसी सांसद को दिया जाना चाहिए, ताकि संसद में संतुलन बना रहे।

उन्होंने कहा कि लोकसभा स्पीकर का दायित्व है कि वह सभी दलों के सांसदों के साथ समान व्यवहार करें। उनके अनुसार संसद में छोटे दलों और निर्दलीय सांसदों की स्थिति कई बार कमजोर हो जाती है।

छोटे दलों के सांसदों की स्थिति पर टिप्पणी

हनुमान बेनीवाल ने कहा कि एक सांसद वाली पार्टियों और निर्दलीय सांसदों की स्थिति कई बार ऐसी हो जाती है जैसे किसी बड़े अंतरराष्ट्रीय संघर्ष में तटस्थ देश की होती है। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि जिस प्रकार वैश्विक संघर्षों में कुछ देश तटस्थ रहते हैं, उसी प्रकार संसद में छोटे दलों की आवाज कई बार प्रभावी तरीके से नहीं सुनी जाती।

बेनीवाल ने यह भी कहा कि यदि स्पीकर सभी सांसदों के साथ समान व्यवहार करें और छोटे दलों को भी पर्याप्त अवसर मिले, तो संसद की कार्यवाही अधिक लोकतांत्रिक और प्रभावी बन सकती है।

लोकसभा में हुई इस बहस ने एक बार फिर संसद की कार्यप्रणाली, स्पीकर की भूमिका और डिप्टी स्पीकर के पद को लेकर नई चर्चा शुरू कर दी है। आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि ओवैसी और अन्य सांसदों की ओर से प्रस्तावित यह पहल किस दिशा में आगे बढ़ती है और संसद में इस मुद्दे पर क्या राजनीतिक सहमति बनती है।

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