मनीषा शर्मा। सर्दियों की शुरुआत होते ही हल्दी का उपयोग घर-घर में बढ़ जाता है। यह भारतीय रसोई का एक अहम मसाला है, जो न सिर्फ स्वाद और रंग बढ़ाता है, बल्कि कई औषधीय गुणों के कारण सेहत के लिए भी लाभदायक माना जाता है। हल्दी में मौजूद करक्यूमिन (Curcumin) नामक तत्व शरीर में सूजन कम करने, रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने और संक्रमण से लड़ने में मदद करता है।
यही कारण है कि आजकल लोग हल्दी को मसाले के अलावा सप्लीमेंट, कैप्सूल और चूर्ण के रूप में भी अधिक मात्रा में लेने लगे हैं। लेकिन हर फायदेमंद चीज़ की तरह हल्दी का अधिक सेवन भी शरीर को नुकसान पहुंचा सकता है। जरूरत से ज्यादा हल्दी शरीर के कई अंगों पर दुष्प्रभाव छोड़ सकती है।
ज्यादा हल्दी से पाचन तंत्र पर असर
हल्दी की अधिक मात्रा पेट की लाइनिंग पर असर डालती है। जब लोग हल्दी के कैप्सूल या हाई-डोज़ सप्लीमेंट लेना शुरू करते हैं, तो यह पेट में जलन पैदा कर सकती है।
इसके कुछ सामान्य लक्षण इस प्रकार हैं—
पेट में ऐंठन और गैस
दस्त या ढीला पेट
जी मिचलाना
पेट फूलना
हल्का हार्टबर्न
जिन लोगों का पाचन तंत्र पहले से संवेदनशील है, उन्हें ये समस्याएं अधिक परेशान कर सकती हैं। भोजन में उपयोग की जाने वाली सामान्य मात्रा नुकसान नहीं करती, पर लगातार ज्यादा मात्रा शरीर के लिए भारी हो सकती है।
लीवर पर बढ़ता दबाव
करक्यूमिन की मेटाबोलिक प्रक्रिया लीवर द्वारा नियंत्रित होती है। जब इसे अधिक मात्रा में लिया जाता है, विशेषकर पिपरिन (काली मिर्च) के साथ, तो यह लीवर पर दबाव बढ़ा सकता है।
इस स्थिति के संभावित लक्षण—
दाईं तरफ पेट में हल्का दर्द या भारीपन
थकान
ब्लड टेस्ट में लीवर एंजाइम बढ़ना
गंभीर स्थितियों में त्वचा और आंख पीली होना
हालांकि ऐसे मामले दुर्लभ हैं, लेकिन लगातार लंबे समय तक हाई-डोज़ सप्लीमेंट लेने से लीवर पर असर पड़ सकता है।
दवाइयों के साथ नकारात्मक रिएक्शन
हल्दी का एक और महत्वपूर्ण पहलू यह है कि इसमें ब्लड-थिनिंग यानी खून पतला करने जैसा हल्का प्रभाव होता है।
इस वजह से हल्दी कुछ दवाओं के साथ इंटरेक्शन कर सकती है—
खून पतला करने वाली दवाएं
ब्लड शुगर कंट्रोल करने वाली दवाएं
एंटी-इंफ्लेमेटरी दवाएं
इसके चलते रक्तस्राव की संभावना बढ़ सकती है और दवा का असर ज्यादा या कम हो सकता है।
लक्षण इस प्रकार हो सकते हैं—
आसानी से चोट लगना
नाक से खून आना
चक्कर आना
दवा का असर असामान्य होना
इसलिए ऐसे मरीजों को डॉक्टर की सलाह के बिना हल्दी सप्लीमेंट नहीं लेने चाहिए।
आयरन अवशोषण में कमी
हल्दी का अधिक सेवन शरीर में आयरन के अवशोषण को कम कर सकता है।
जिन लोगों को पहले से एनीमिया या आयरन की कमी है, उनके लिए यह स्थिति और गंभीर हो सकती है।
इसके लक्षण—
शरीर में कमजोरी
थकान
पीला पड़ना
हल्की सांस फूलना
हल्दी आयरन-डिफिशिएंसी वाले लोगों के लिए संतुलित मात्रा में ही उपयोगी है।
एलर्जी और त्वचा पर दुष्प्रभाव
कुछ लोगों में हल्दी या सप्लीमेंट में मौजूद अन्य तत्वों से एलर्जी हो सकती है।
संभावित लक्षण—
त्वचा पर दाने
खुजली
लालपन
हल्की सूजन
सांस लेने में परेशानी
ऐसी किसी भी प्रतिक्रिया को हल्के में नहीं लेना चाहिए और तुरंत सेवन बंद कर देना चाहिए।
हल्दी का सुरक्षित उपयोग कैसे करें?
हल्दी के फायदे तभी मिलते हैं जब इसे सही मात्रा में और सही तरीके से लिया जाए।
कुछ आसान सुझाव—
भोजन में रोजाना उपयोग की जाने वाली हल्दी सुरक्षित है।
हाई-डोज़ हल्दी सप्लीमेंट लेने से पहले डॉक्टर से सलाह लें।
अगर खून पतला करने वाली दवाएं ले रहे हैं तो हल्दी सप्लीमेंट से बचें।
पेट कमजोर है तो खाली पेट हल्दी वाला दूध या सप्लीमेंट न लें।
लीवर की बीमारी होने पर नियमित उच्च मात्रा बिल्कुल न लें।
किसी भी दुष्प्रभाव पर सेवन तुरंत रोक दें।
हल्दी एक शक्तिशाली और फायदेमंद मसाला है, लेकिन इसका अधिक सेवन शरीर के लिए परेशानी खड़ी कर सकता है। संतुलित मात्रा और सही उपयोग से हल्दी के फायदे लिए जा सकते हैं, बिना किसी अनचाहे साइड इफेक्ट के।


