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कोटा में 159 जर्जर मकानों पर ‘खतरा’ घोषित, स्थानांतरित करने के आदेश

कोटा में 159 जर्जर मकानों पर ‘खतरा’ घोषित, स्थानांतरित करने के आदेश

शोभना शर्मा।  झालावाड़ में हाल ही में हुए स्कूल भवन हादसे के बाद राजस्थान सरकार ने राज्यभर में जर्जर भवनों की समीक्षा और कार्रवाई तेज कर दी है। इस कड़ी में कोटा नगर निगम (उत्तर) ने एक बड़ा कदम उठाते हुए शहर के 159 जर्जर मकानों को चिह्नित कर उन पर “यहां खतरा है” का नोटिस चस्पा कर दिया है। इन भवनों को “डेंजर” कैटेगरी में रखते हुए लाल रंग से विशेष मार्किंग की गई है। निगम की ओर से इन भवन मालिकों को नोटिस जारी कर साफ तौर पर कहा गया है कि या तो वे मरम्मत कराएं या वहां से स्थानांतरित हो जाएं।

नगर निगम की यह कार्रवाई राजस्थान सरकार के उस निर्देश के बाद शुरू हुई जिसमें राज्यभर के नगरीय निकायों को जर्जर भवनों की पहचान कर सीलिंग और ध्वस्तीकरण की प्रक्रिया अपनाने के निर्देश दिए गए थे। झालावाड़ के स्कूल हादसे ने भवनों की सुरक्षा को लेकर सरकार और प्रशासन को गंभीर चिंतन के लिए मजबूर कर दिया है।

सर्वे के बाद चिन्हित किए गए भवन

कोटा नगर निगम (उत्तर) की ओर से बीते कुछ सप्ताहों में एक विस्तृत सर्वे किया गया। इस सर्वे के दौरान विभिन्न मोहल्लों, कॉलोनियों और गलियों में बने पुराने और क्षतिग्रस्त मकानों का निरीक्षण किया गया। सर्वे में पाया गया कि 159 मकान गंभीर रूप से जर्जर स्थिति में हैं, जिनमें रहना न सिर्फ मकान मालिकों बल्कि आसपास के लोगों के लिए भी खतरे से खाली नहीं है। इसके बाद नगर निगम ने इन मकानों पर लाल रंग से “यहां खतरा है” का बोर्ड लगाकर चेतावनी दी और वहां रह रहे परिवारों को नोटिस जारी किए।

रहवासियों को नोटिस देकर हटने का आदेश

जिन मकानों को अति जर्जर माना गया है, वहां रह रहे परिवारों को लिखित निर्देश दिए गए हैं कि वे शीघ्र ही उस मकान को खाली करें। साथ ही उन्हें सुझाव दिया गया है कि या तो मकान की तत्काल मरम्मत करवा लें या किसी सुरक्षित स्थान पर शिफ्ट हो जाएं। नगर निगम का कहना है कि यह कदम जनसुरक्षा को ध्यान में रखते हुए लिया गया है, जिससे किसी प्रकार की अनहोनी को रोका जा सके।

सिर्फ निजी नहीं, सरकारी भवन भी निशाने पर

नगर निगम की यह कार्रवाई सिर्फ निजी भवनों तक सीमित नहीं है। कई सरकारी इमारतों को भी जर्जर हालत में पाया गया है, जिनमें स्कूल भवन, कार्यालय, शौचालय और सामुदायिक केंद्र शामिल हैं। निगम ने संबंधित विभागों को इन इमारतों की सूची भेजते हुए मरम्मत या ध्वस्तीकरण के निर्देश दिए हैं। इन इमारतों की स्थिति पर नजर बनाए रखने और समय रहते कार्रवाई करने का आदेश जारी किया गया है।

राज्यभर में 2699 भवन सील करने के आदेश

राजस्थान सरकार की ओर से जारी आंकड़ों के अनुसार अब तक प्रदेशभर में 2699 सरकारी भवनों को जर्जर घोषित कर सील किया जा चुका है। नगरीय विकास विभाग के शासन सचिव रवि जैन ने इस दिशा में निर्देश जारी किए हैं। उन्होंने राज्य के सभी 224 नगरीय निकाय प्रमुखों के साथ एक उच्चस्तरीय बैठक की थी, जिसमें संभावित भारी बारिश और इससे हो सकने वाले हादसों से पहले एहतियाती उपायों पर चर्चा की गई थी।

बैठक में साफ निर्देश दिया गया था कि जिन भवनों की हालत मरम्मत योग्य नहीं है, उन्हें सील कर ढहा दिया जाए ताकि किसी जान-माल का नुकसान न हो। इसके बाद पूरे राज्य में जर्जर भवनों की पहचान करने और त्वरित कार्रवाई के आदेश दिए गए थे।

जनहित में लिया गया निर्णय

कोटा नगर निगम के अधिकारियों का कहना है कि यह कार्रवाई किसी व्यक्ति विशेष के खिलाफ नहीं बल्कि जनहित में की जा रही है। वर्षा ऋतु के दौरान पुराने भवनों के गिरने की घटनाएं आम हो जाती हैं, और ऐसे में समय रहते इन इमारतों को खाली कराना और चेतावनी देना आवश्यक हो गया था।

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