दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता के खिलाफ सोशल मीडिया पर वायरल हुई आपत्तिजनक पोस्ट से जुड़ा मामला अब और अधिक राजनीतिक और कानूनी रूप लेता जा रहा है। इस मामले में अजमेर की अदालत ने बड़ा आदेश जारी करते हुए बीजेपी जिला अध्यक्ष रमेश सोनी को प्रथम दृष्टया आरोपी मानते हुए उनके खिलाफ मुकदमा दर्ज कर जांच करने के निर्देश दिए हैं। अदालत के इस फैसले के बाद राजनीतिक हलकों में हलचल तेज हो गई है और मामले ने नया मोड़ ले लिया है।
यह मामला पहले से ही चर्चा में था क्योंकि विवादित पोस्ट को लेकर कांग्रेस के पूर्व आईटी सेल पदाधिकारी पीयूष सुराणा को पुलिस गिरफ्तार कर जेल भेज चुकी है। अब उसी मामले में बीजेपी नेता रमेश सोनी का नाम सामने आने के बाद राजनीतिक माहौल और अधिक गरमा गया है। अदालत के आदेश के बाद यह साफ माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में पुलिस की जांच का दायरा और बढ़ सकता है।
जानकारी के अनुसार अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट संख्या-2 के न्यायाधीश रजनीश ने मामले की सुनवाई करते हुए यह माना कि प्रथम दृष्टया रमेश सोनी की भूमिका की जांच आवश्यक है। अदालत ने गंज थाना पुलिस को निर्देश दिए हैं कि रमेश सोनी के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर पूरे मामले की जांच की जाए। अदालत का यह आदेश परिवादी की ओर से पेश किए गए तथ्यों और दस्तावेजों के आधार पर दिया गया है।
पूरा विवाद उस समय शुरू हुआ जब सोशल मीडिया पर दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता को लेकर एक आपत्तिजनक पोस्ट वायरल हुई। इस पोस्ट को लेकर राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया था। आरोप है कि कांग्रेस के पूर्व आईटी सेल पदाधिकारी पीयूष सुराणा ने यह पोस्ट सोशल मीडिया पर साझा की थी। पुलिस ने शिकायत मिलने के बाद आईटी एक्ट समेत विभिन्न धाराओं में मामला दर्ज किया और पीयूष सुराणा को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया।
मामले ने उस समय और तूल पकड़ लिया जब पुलिस हिरासत में मौजूद पीयूष सुराणा पर स्याही फेंकने की घटना सामने आई। इस घटना ने पुलिस व्यवस्था और सुरक्षा व्यवस्था पर भी सवाल खड़े कर दिए थे। बताया गया कि कांग्रेस नेता पर पुलिस कस्टडी के दौरान स्याही फेंकी गई, जिसके बाद पुलिस प्रशासन ने मामले को गंभीरता से लिया। ड्यूटी में लापरवाही मानते हुए तीन पुलिसकर्मियों के खिलाफ कार्रवाई की गई और उन्हें लाइन हाजिर कर दिया गया। इस घटनाक्रम के बाद मामला लगातार राजनीतिक और प्रशासनिक चर्चा का विषय बना रहा।
अब इस पूरे प्रकरण में बीजेपी जिला अध्यक्ष रमेश सोनी का नाम सामने आने के बाद विवाद और गहरा गया है। आरोप है कि रमेश सोनी ने भी पीयूष सुराणा की विवादित पोस्ट को सोशल मीडिया पर शेयर किया था। इसी आधार पर परिवादी श्रेयांश सुराणा ने अदालत का दरवाजा खटखटाया। परिवादी की ओर से अधिवक्ता वैभव जैन ने अदालत में परिवाद पेश किया और कहा कि यदि पीयूष सुराणा के खिलाफ आईटी एक्ट के तहत कार्रवाई की गई है, तो उसी तरह पोस्ट को साझा करने वाले अन्य लोगों के खिलाफ भी समान कार्रवाई होनी चाहिए।
परिवादी ने अदालत में यह तर्क रखा कि कानून सभी के लिए समान होना चाहिए और किसी राजनीतिक पद या पार्टी के आधार पर अलग व्यवहार नहीं किया जा सकता। अदालत ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद मामले को गंभीर मानते हुए गंज थाना पुलिस को मुकदमा दर्ज कर जांच करने के आदेश दिए। अदालत ने माना कि प्रथम दृष्टया मामला जांच योग्य है और पुलिस को तथ्यों की गहराई से जांच करनी चाहिए।
अदालत के इस आदेश के बाद अजमेर की राजनीति में चर्चाओं का दौर तेज हो गया है। कांग्रेस और बीजेपी दोनों दलों के कार्यकर्ताओं के बीच इस मामले को लेकर बयानबाजी भी बढ़ सकती है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि सोशल मीडिया पर बढ़ती राजनीतिक सक्रियता और विवादित पोस्टों के मामलों में अब अदालतें और पुलिस अधिक सख्त रुख अपनाती दिखाई दे रही हैं।
पिछले कुछ वर्षों में सोशल मीडिया राजनीतिक प्रचार और विरोध का बड़ा माध्यम बन चुका है। ऐसे में कई बार विवादित और आपत्तिजनक पोस्ट राजनीतिक तनाव का कारण बन जाती हैं। यही वजह है कि आईटी एक्ट और साइबर कानूनों के तहत पुलिस लगातार ऐसे मामलों में कार्रवाई कर रही है। इस प्रकरण ने भी यह संकेत दिया है कि सोशल मीडिया पर साझा की गई सामग्री को लेकर कानूनी जिम्मेदारी केवल पोस्ट बनाने वाले तक सीमित नहीं रह सकती, बल्कि उसे आगे साझा करने वालों की भूमिका भी जांच के दायरे में आ सकती है।
फिलहाल अदालत के आदेश के बाद अब गंज थाना पुलिस की अगली कार्रवाई पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं। पुलिस को अदालत के निर्देश के अनुसार मुकदमा दर्ज कर पूरे मामले की जांच करनी होगी। जांच के दौरान सोशल मीडिया पोस्ट, शेयरिंग पैटर्न और अन्य डिजिटल साक्ष्यों की पड़ताल की जा सकती है।


