latest-newsजयपुरराजस्थान

IPS पंकज चौधरी को कैट से राहत, डीपीसी में प्रोविजनली कंसीडर करने के आदेश

IPS पंकज चौधरी को कैट से राहत, डीपीसी में प्रोविजनली कंसीडर करने के आदेश

मनीषा शर्मा।  प्रदेश के चर्चित और विवादों में रहे आईपीएस अधिकारी पंकज चौधरी को केंद्रीय प्रशासनिक अधिकरण (कैट) से बड़ी राहत मिली है। प्रमोशन से जुड़े मामले में कैट ने सुनवाई करते हुए राज्य सरकार को निर्देश दिए हैं कि पंकज चौधरी के बकाया प्रमोशन को प्रोविजनली विभागीय पदोन्नति समिति (डीपीसी) में कंसीडर किया जाए। इस आदेश को पंकज चौधरी के लिए अहम कानूनी सफलता माना जा रहा है, क्योंकि लंबे समय से उनके प्रमोशन विभिन्न जांचों के कारण अटके हुए थे।

कैट ने हालांकि यह भी स्पष्ट किया है कि यह राहत अंतरिम है और उनकी पदोन्नति याचिका के अंतिम निस्तारण के अधीन रहेगी। यानी अंतिम फैसला आने तक प्रमोशन का मामला पूरी तरह समाप्त नहीं माना जाएगा।

डीआईजी रैंक तक प्रमोशन का रास्ता खुला

कैट के आदेश के बाद यदि इस वर्ष होने वाली डीपीसी में पंकज चौधरी को प्रोविजनली कंसीडर किया जाता है, तो उन्हें पुलिस उप महानिरीक्षक (डीआईजी) रैंक पर प्रमोशन मिल सकता है। यह उनके करियर का अहम पड़ाव होगा, क्योंकि बीते कई वर्षों से वे प्रमोशन से वंचित चल रहे हैं।

जानकारों के अनुसार, यदि डीपीसी में प्रोविजनली कंसीडर कर लिया जाता है, तो तकनीकी रूप से उनकी वरिष्ठता और सेवा रिकॉर्ड के आधार पर डीआईजी रैंक का लाभ उन्हें मिल सकता है, हालांकि अंतिम आदेश कैट के फाइनल फैसले पर निर्भर करेगा।

तीन प्रमोशन लंबे समय से अटके

पंकज चौधरी की ओर से पैरवी कर रहे वरिष्ठ अधिवक्ता अनुपम अग्रवाल ने बताया कि उनके खिलाफ अलग-अलग प्रकरणों के चलते तीन प्रमोशन लंबे समय से ड्यू चल रहे हैं। सरकार ने इन मामलों में जांच लंबित होने का हवाला देते हुए प्रमोशन रोक रखा था।

वकील के अनुसार, कैट पहले ही राज्य सरकार को निर्देश दे चुका है कि जिन प्रकरणों के आधार पर प्रमोशन रोका गया है, उनकी जांच समयबद्ध तरीके से पूरी की जाए। इसके बावजूद सरकार किसी भी मामले की जांच को अंतिम रूप नहीं दे सकी। इसी कारण प्रमोशन भी लगातार रोका गया, जिसे अब कैट ने अनुचित माना है।

ये तीन प्रमोशन रहे बकाया

पंकज चौधरी के मामले में तीन अलग-अलग स्तरों पर प्रमोशन बकाया बताए गए हैं। साल 2018 से उनका जूनियर एडमिनिस्ट्रेटिव ग्रेड का प्रमोशन लंबित है। साल 2021 से सीनियर एडमिनिस्ट्रेटिव ग्रेड का प्रमोशन भी उन्हें नहीं मिला। वहीं साल 2023 से डीआईजी रैंक का प्रमोशन भी अटका हुआ है। कैट ने इन सभी बकाया प्रमोशन को देखते हुए प्रोविजनली डीपीसी में कंसीडर करने के निर्देश दिए हैं।

राजस्थान के इतिहास में पहली बार हुआ था आईपीएस का डिमोशन

पंकज चौधरी का मामला इसलिए भी चर्चा में रहा है, क्योंकि फरवरी 2025 में राजस्थान सरकार ने उन्हें डिमोट कर दिया था। यह राजस्थान के प्रशासनिक इतिहास में पहली बार हुआ था, जब किसी भारतीय पुलिस सेवा (आईपीएस) अधिकारी का औपचारिक रूप से डिमोशन किया गया। कार्मिक विभाग की जांच के बाद चौधरी को तीन साल के लिए डिमोट किया गया था। उन्हें लेवल 11 की वेतन श्रृंखला से घटाकर लेवल 10 की कनिष्ठ वेतन श्रृंखला में भेज दिया गया था। आमतौर पर यह वेतनमान फ्रेशर आईपीएस अधिकारियों को जॉइनिंग के समय दिया जाता है, लेकिन सेवा में रहते हुए किसी आईपीएस को इस स्तर पर डिमोट करना अभूतपूर्व कदम माना गया।

डिमोशन आदेश पर भी कैट की रोक

हालांकि बाद में केंद्रीय प्रशासनिक अधिकरण ने सरकार के डिमोशन आदेश पर भी रोक लगा दी थी। कैट ने माना कि जब तक मामलों की जांच पूरी नहीं होती और अंतिम निष्कर्ष सामने नहीं आता, तब तक इस तरह की कठोर कार्रवाई उचित नहीं मानी जा सकती। अब प्रमोशन मामले में भी कैट का यह आदेश राज्य सरकार के लिए अहम संदेश माना जा रहा है कि लंबित जांचों के आधार पर अधिकारियों के करियर को अनिश्चितकाल तक रोका नहीं जा सकता।

आगे की कानूनी प्रक्रिया पर नजर

फिलहाल पंकज चौधरी को मिली यह राहत अंतरिम है, लेकिन इससे उनके प्रमोशन का रास्ता काफी हद तक साफ होता दिख रहा है। अब सबकी निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि राज्य सरकार आगामी डीपीसी में कैट के आदेश का किस तरह पालन करती है और अंतिम सुनवाई में अधिकरण क्या फैसला सुनाता है। यह मामला न केवल एक अधिकारी के करियर से जुड़ा है, बल्कि प्रशासनिक प्रक्रिया और सेवा नियमों की व्याख्या के लिहाज से भी बेहद अहम माना जा रहा है।

post bottom ad

Discover more from MTTV INDIA

Subscribe now to keep reading and get access to the full archive.

Continue reading