महाशिवरात्रि के पावन पर्व पर उदयपुर पूरी तरह शिवमय नजर आया। सुबह तड़के से ही शहर और आसपास के क्षेत्रों के शिव मंदिरों में श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ पड़ी। भोलेनाथ की आराधना के लिए भक्त डीजे की धुनों पर नाचते-गाते, हर-हर महादेव के जयकारे लगाते हुए शिवालयों की ओर बढ़ते दिखाई दिए। मंदिर परिसरों में विशेष सजावट, सुरक्षा इंतजाम और पूजा-अर्चना की व्यापक व्यवस्थाएं की गई थीं। शहर में हर ओर भक्ति और उत्साह का माहौल रहा। भजन मंडलियों द्वारा पूरी रात भजनों की प्रस्तुति दी गई, जिससे वातावरण आध्यात्मिक ऊर्जा से भर गया।
महाकाल मंदिर में सुबह से लंबी कतारें
उदयपुर के रानी रोड स्थित महाकाल मंदिर में महाशिवरात्रि की सुबह से ही श्रद्धालुओं का तांता लग गया। मंदिर के मुख्य द्वार से लेकर गर्भगृह तक भक्तों की लंबी कतारें देखने को मिलीं। भक्त जल, बेलपत्र, धतूरा और दूध अर्पित कर भगवान शिव की पूजा कर रहे थे। यहां विशेष अभिषेक और आरती का आयोजन किया गया, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल हुए। मंदिर परिसर में हर-हर महादेव के जयघोष से वातावरण गूंजता रहा।
कैलाशपुरी में एकलिंगजी के दर्शन को उमड़े श्रद्धालु
उदयपुर से करीब 20 किलोमीटर दूर कैलाशपुरी स्थित एकलिंगजी मंदिर में महाशिवरात्रि पर सबसे अधिक श्रद्धालु पहुंचे। रात से ही भक्तों का यहां पहुंचना शुरू हो गया था। सुबह पट खुलते ही दर्शन करने की होड़ मच गई। उदयपुर और आसपास के गांवों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु पैदल ही एकलिंगजी मंदिर की ओर बढ़े। रास्ते भर जगह-जगह भंडारे और स्वागत की व्यवस्थाएं की गई थीं। मंदिर के आसपास वाहनों का प्रवेश पूरी तरह प्रतिबंधित रखा गया, ताकि पैदल दर्शनार्थियों को किसी तरह की परेशानी न हो। देर रात से ही कैलाशपुरी क्षेत्र एकलिंगनाथ के जयकारों से गूंज उठा। उदयपुर, राजसमंद और अन्य जिलों से आए भक्तों ने शिवभक्ति में डूबकर इस पावन पर्व को मनाया।
शहर के अन्य शिवालयों में भी भक्तिमय माहौल
उदयपुर शहर के गुप्तेश्वर महादेव और झामेश्वर महादेव मंदिर में भी महाशिवरात्रि पर विशेष रौनक देखने को मिली। सुबह से ही लोग दर्शन और पूजा के लिए मंदिरों में पहुंचते रहे। कई स्थानों पर भजन मंडलियों ने पूरी रात भक्ति गीतों की प्रस्तुति दी, जिससे माहौल पूरी तरह शिवमय बना रहा। भक्तों ने व्रत रखकर भगवान शिव की आराधना की और परिवार की सुख-समृद्धि की कामना की।
हनुमानजी का 11वें रुद्रावतार के रूप में विशेष श्रृंगार
शहर के धूलकोट महासतीया स्थित श्री महावीर हनुमान मंदिर में महाशिवरात्रि पर एक विशेष धार्मिक आयोजन देखने को मिला। यहां पवनपुत्र हनुमान का भगवान शिव के 11वें रुद्रावतार के रूप में मनमोहक श्रृंगार किया गया। मंदिर में विशेष पूजा-अर्चना के साथ भगवान हनुमान को शिव प्रतीकों जैसे त्रिशूल और विशेष लेपन से सजाया गया। इस अद्भुत श्रृंगार को देखने के लिए श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ पड़ी।
हनुमान जी को शिव का अंश मानने की परंपरा
आयोजन समिति के महामंत्री सी. पी. बंसल ने बताया कि धार्मिक मान्यताओं के अनुसार हनुमान जी वास्तव में भगवान शिव के ही अंश हैं। उन्होंने त्रेतायुग में प्रभु श्रीराम की सेवा के लिए अवतार लिया था। महाशिवरात्रि के दिन हनुमान जी की इस विशेष पूजा के पीछे यह विश्वास है कि इससे भक्तों को शिव और शक्ति दोनों का आशीर्वाद एक साथ प्राप्त होता है। शास्त्रों में हनुमान जी को ‘रुद्रात्मकाय’ अर्थात शिव का ही स्वरूप माना गया है, इसलिए इस दिन उनकी आराधना का विशेष महत्व है।
भक्ति, परंपरा और आस्था का अद्भुत संगम
महाशिवरात्रि पर उदयपुर में देखने को मिला यह दृश्य आस्था, परंपरा और सामूहिक भक्ति का अद्भुत उदाहरण रहा। एकलिंगजी से लेकर महाकाल और शहर के अन्य शिवालयों तक श्रद्धालुओं की उमड़ी भीड़ ने यह स्पष्ट कर दिया कि भगवान शिव के प्रति लोगों की आस्था आज भी उतनी ही गहरी है। शिवभक्ति में डूबा उदयपुर पूरे दिन हर-हर महादेव के जयकारों से गूंजता रहा और यह पर्व श्रद्धालुओं के लिए आस्था और आध्यात्मिक ऊर्जा का स्रोत बनकर उभरा।


