दौसा जिले में कांग्रेस विधायक डीसी बैरवा और तहसीलदार गजानंद मीणा के बीच हुए विवाद ने अब राजनीतिक रूप से बड़ा आकार ले लिया है। इस मामले में अब महवा विधानसभा क्षेत्र के पूर्व विधायक ओमप्रकाश हुडला की भी एंट्री हो गई है। हुडला ने खुलकर कांग्रेस विधायक डीसी बैरवा का समर्थन किया है और तहसीलदार के व्यवहार व भाषा को लोकतांत्रिक मर्यादाओं के खिलाफ बताया है।
हुडला के बयान के बाद दौसा की राजनीति में बयानबाजी और तेज हो गई है और यह मामला केवल प्रशासनिक विवाद न रहकर सियासी टकराव का रूप लेता दिख रहा है।
हुडला बोले- तहसीलदार की भाषा चिंताजनक
पूर्व विधायक ओमप्रकाश हुडला ने मीडिया से बातचीत में कहा कि तहसीलदार गजानंद मीणा का व्यवहार और भाषा बेहद चिंताजनक है। उन्होंने कहा कि जिस तरह की भाषा का प्रयोग किया गया, वह एक जिम्मेदार अधिकारी को शोभा नहीं देता।
हुडला ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि वे तहसीलदार के इस रवैये का विरोध करते हैं। उनके अनुसार, प्रशासनिक अधिकारियों को जनता के चुने हुए प्रतिनिधियों के साथ संवाद में संयम और सम्मान बनाए रखना चाहिए।
लोकतंत्र में विधायक सर्वोपरि: हुडला
ओमप्रकाश हुडला ने लोकतांत्रिक व्यवस्था का जिक्र करते हुए कहा कि लोकतंत्र में विधायक सर्वोपरि होते हैं। उन्होंने कहा कि न्यायपालिका सर्वोपरि है, जबकि कार्यपालिका का काम केवल कानून का पालन करवाना है।
उन्होंने जोर देते हुए कहा कि तहसीलदार को अपनी भाषा में प्रेम और संयम रखना चाहिए। जिस तरह की कठोर और धमकी भरी भाषा सामने आई है, वह लोकतंत्र की भावना के खिलाफ है और इसे किसी भी सूरत में स्वीकार नहीं किया जा सकता।
मंत्री किरोड़ी लाल मीणा और जगमोहन मीणा पर लगाए आरोप
हुडला ने केवल तहसीलदार तक ही अपनी बात सीमित नहीं रखी, बल्कि मंत्री किरोड़ी लाल मीणा और जगमोहन मीणा पर भी आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि इन नेताओं की वजह से ही तहसीलदार में “गर्मी” भरी हुई है।
हुडला ने कहा कि जब ऊपर बैठे लोग इस तरह का माहौल बनाते हैं, तो नीचे के अधिकारी भी उसी अंदाज में व्यवहार करने लगते हैं। उन्होंने इसे प्रशासन पर राजनीतिक दबाव का परिणाम बताया।
चुनौती भरे लहजे में दी चेतावनी
पूर्व विधायक हुडला ने चुनौती भरे लहजे में कहा कि अगर तहसीलदार में इतनी ही गर्मी है, तो उन्हें महवा विधानसभा क्षेत्र में लगवा दिया जाए। उन्होंने कहा कि अगर वहां भी ऐसा ही बर्ताव किया गया, तो “ठंडा पिलाने” का काम वे खुद करेंगे।
उनका यह बयान साफ तौर पर इस बात का संकेत देता है कि कांग्रेस इस मुद्दे को हल्के में लेने के मूड में नहीं है और जरूरत पड़ी तो इसे सड़क से लेकर सदन तक उठाया जाएगा।
कैसे शुरू हुआ डीसी बैरवा–तहसीलदार विवाद
दौसा की सियासत में यह विवाद तीन दिन पहले उस समय गरमाया, जब तहसीलदार गजानंद मीणा राजस्व टीम के साथ ग्रास भूमि से अतिक्रमण हटाने पहुंचे थे। प्रशासन की इस कार्रवाई की सूचना मिलते ही दौसा विधायक डीसी बैरवा भी मौके पर पहुंच गए।
विधायक बैरवा ने आरोप लगाया कि बिना पूर्व नोटिस दिए गरीबों के मकान तोड़े जा रहे हैं। उन्होंने कार्रवाई को रुकवाने का प्रयास किया और प्रशासन से जवाब मांगा। इसी दौरान तहसीलदार और विधायक के बीच तीखी नोंकझोंक हो गई।
मौके पर हुई तीखी बहस
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, मौके पर माहौल काफी तनावपूर्ण हो गया था। विधायक और तहसीलदार के बीच बहस इतनी बढ़ गई कि प्रशासनिक टीम और अन्य लोगों को बीच-बचाव करना पड़ा।
विधायक डीसी बैरवा का कहना था कि गरीब परिवारों के साथ अन्याय किया जा रहा है, जबकि प्रशासन का तर्क था कि सरकारी जमीन से अतिक्रमण हटाना उनकी जिम्मेदारी है।
वायरल हुआ वीडियो और ऑडियो
इस पूरे घटनाक्रम का एक वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हो चुका है। वीडियो में तहसीलदार द्वारा विधायक को “थाने भेजने” जैसी टिप्पणी करने की बात सामने आई है। इस वीडियो के सामने आने के बाद विवाद और गहरा गया।
इसके बाद विधायक डीसी बैरवा और पटवारी हेमलता मीणा के बीच हुई तीखी बहस का एक ऑडियो भी वायरल हुआ। इन वायरल वीडियो और ऑडियो ने मामले को और ज्यादा संवेदनशील बना दिया है।
बयानबाजी से गरमाई दौसा की राजनीति
लगातार सामने आ रहे वीडियो, ऑडियो और नेताओं के बयान ने दौसा की राजनीति को पूरी तरह गरमा दिया है। कांग्रेस इसे गरीबों और जनप्रतिनिधियों के अपमान का मुद्दा बता रही है, जबकि दूसरी ओर प्रशासनिक कार्रवाई को कानून के दायरे में बताया जा रहा है।


