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राजस्थान साइबर ठगी में नंबर वन: विधायक रविंद्र सिंह भाटी ने उठाया डिजिटल अरेस्ट का मुद्दा

राजस्थान साइबर ठगी में नंबर वन: विधायक रविंद्र सिंह भाटी ने उठाया डिजिटल अरेस्ट का मुद्दा

राजस्थान विधानसभा के सत्र में शिव विधायक रविंद्र सिंह भाटी ने साइबर अपराधों के बढ़ते मामलों पर गंभीर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि राजस्थान तेजी से साइबर ठगी का हब बन रहा है और स्थिति इतनी खराब हो चुकी है कि नेशनल क्राइम रिकॉर्ड्स ब्यूरो के आंकड़ों में राज्य देश में पहले नंबर पर दिखाई दे रहा है। भाटी के मुताबिक पिछले दो वर्षों में साइबर अपराधों की शिकायतों में 27 प्रतिशत की भारी बढ़ोतरी हुई है। वर्ष 2024 में जहां एक लाख से अधिक शिकायतें दर्ज की गई थीं, वहीं 2025 में यह संख्या बढ़कर 1 लाख 27 हजार तक पहुंच गई।

उन्होंने कहा कि इतने बड़े स्तर की शिकायतों के बावजूद पुलिस थानों में एफआईआर दर्ज होने का प्रतिशत मात्र 0.69 है, जो पूरे सिस्टम पर प्रश्नचिह्न खड़ा करता है।

पीड़ितों को फुटबॉल की तरह घुमाया जा रहा

भाटी ने सरकारी तंत्र पर सवाल उठाते हुए कहा कि आम नागरिक जब साइबर ठगी का शिकार होकर थाने पहुंचता है, तो उसे सामान्य थाने से साइबर थाने भेज दिया जाता है और साइबर थाना इसे सामान्य थाना का मामला बताकर वापस लौटा देता है। इस प्रक्रिया में पीड़ित को एक कार्यालय से दूसरे कार्यालय तक चक्कर लगाने पड़ते हैं। उन्होंने कहा कि मजदूर, किसान, महिला, छोटे कर्मचारी—सब अपनी जीवनभर की बचत खोकर न्याय के लिए भटक रहे हैं, लेकिन सुनवाई कहीं नहीं हो रही।

भाटी ने इसे बेहद शर्मनाक स्थिति बताते हुए कहा कि पीड़ित की हालत ऐसी हो गई है जैसे कोई फुटबॉल जिसे बार-बार अलग-अलग थानों के बीच उछाला जा रहा है।

साइबर अपराधों के नए रूप—डिजिटल अरेस्ट पर चेतावनी

विधायक भाटी ने कहा कि साइबर अपराध अब सिर्फ सोशल मीडिया अकाउंट हैकिंग तक सीमित नहीं है। नए तरीके जैसे “डिजिटल अरेस्ट” सामने आ रहे हैं, जिनमें अपराधी वीडियो कॉल के जरिए स्वयं को पुलिस अधिकारी या सरकारी एजेंसी का अधिकारी बताकर लोगों को मानसिक रूप से भयभीत करते हैं और उनसे पैसे ठग लेते हैं। इन मामलों में अपराधी पीड़ित को कमरे में बंद रहने के लिए कहकर घंटों तक दबाव में रखते हैं और उसे कोई कदम उठाने तक नहीं देते।

उन्होंने कहा कि दुर्भाग्य से राज्य पुलिस के पास ऐसी उन्नत तकनीकी व्यवस्था मौजूद नहीं है, जिससे इन साइबर गिरोहों के नेटवर्क को समय रहते पहचानकर रोका जा सके। जनवरी 2024 से जून 2025 तक के बीच करीब 1923 करोड़ रुपये साइबर ठगी के कारण लोगों ने खो दिए, जो इस स्थिति की गंभीरता को दर्शाता है।

साइबर सेल और विशेषज्ञों की नियुक्ति की मांग

भाटी ने राज्य सरकार से सख्त कार्रवाई और प्रभावी कदम उठाने की मांग की। उन्होंने कहा कि राज्य में एक समर्पित साइबर सेल स्थापित की जानी चाहिए, ताकि इन साइबर अपराधों पर समय रहते रोक लगाई जा सके। उन्होंने यह भी बताया कि 350 साइबर विशेषज्ञों की नियुक्ति की योजना काफी समय से अधर में लटकी हुई है और इसे तुरंत धरातल पर उतारने की आवश्यकता है।

विधायक ने कहा कि यह मसला आम आदमी से जुड़ा है और सरकार को इसे प्राथमिकता में रखते हुए ऐसी प्रणाली विकसित करनी चाहिए, जिससे साइबर ठगी को रोका जा सके और पीड़ितों को समय पर न्याय मिल सके।

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