गुलाबी नगरी जयपुर में स्थित राजस्थान यूनिवर्सिटी के मुख्य द्वार पर शुक्रवार दोपहर एक बार फिर छात्र राजनीति और वैचारिक टकराव का माहौल देखने को मिला, जब नेशनल स्टूडेंट यूनियन ऑफ इंडिया (NSUI) के कार्यकर्ताओं ने जोरदार विरोध प्रदर्शन शुरू किया। यह प्रदर्शन पहले से घोषित था, जिसके चलते प्रशासन और पुलिस पूरी तरह सतर्क नजर आई। दोपहर करीब 2 बजे जैसे ही कार्यकर्ता यूनिवर्सिटी गेट पर पहुंचे, वहां पहले से ही बैरिकेडिंग कर रास्ता बंद कर दिया गया था और संदिग्ध गतिविधियों को रोकने के लिए हर छात्र की सघन जांच की जा रही थी।
प्रदर्शन की शुरुआत शांतिपूर्ण ढंग से हुई, लेकिन कुछ ही देर में माहौल गर्माने लगा। NSUI कार्यकर्ता बैरिकेड्स पर चढ़ गए और अपने विरोध को आक्रामक तरीके से जताने लगे। पुलिसकर्मियों ने तत्काल स्थिति को संभालने की कोशिश की और एक-एक कर प्रदर्शनकारियों को नीचे उतारने का प्रयास किया। इस दौरान पुलिस और छात्रों के बीच हल्की धक्का-मुक्की भी देखने को मिली, जिससे माहौल तनावपूर्ण हो गया। तस्वीरों में साफ देखा जा सकता है कि पुलिस बल की संख्या प्रदर्शनकारियों की तुलना में अधिक थी, फिर भी करीब आधे घंटे तक स्थिति पूरी तरह नियंत्रण में नहीं आ सकी।
पुलिस प्रशासन ने तेजी दिखाते हुए मौके पर अतिरिक्त गाड़ियां और वैन भेजीं, जिसके बाद प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लेने की प्रक्रिया शुरू की गई। कुछ कार्यकर्ताओं ने इसका विरोध करते हुए सड़क पर ही लेटकर अपना प्रतिरोध दर्ज कराया और मीडिया के माध्यम से अपनी बात लोगों तक पहुंचाने की कोशिश की। हालांकि पुलिस ने उन्हें भी जल्द ही हटाकर गाड़ियों में बैठा लिया और वहां से ले गई। इस कार्रवाई के बाद कुछ समय के लिए स्थिति शांत हो गई, लेकिन विरोध का स्वर पूरी तरह थमा नहीं।
इसके बाद बचे हुए प्रदर्शनकारी सड़क पर बैठकर शांतिपूर्ण तरीके से अपना विरोध दर्ज कराने लगे। इसी दौरान कुछ कार्यकर्ता कागज और मार्कर लेकर आए और मौके पर ही पोस्टर बनाने लगे। इन पोस्टरों पर ‘RSS Go Back’ और ‘आजादी में RSS का योगदान कहां था’ जैसे नारे लिखे गए। हालांकि यह गतिविधि भी ज्यादा देर तक नहीं चल सकी, क्योंकि पुलिस ने फिर से हस्तक्षेप करते हुए प्रदर्शनकारियों को वहां से हटाने की कार्रवाई शुरू कर दी। इस दौरान कई अन्य लोगों को भी हिरासत में लिया गया और पूरे क्षेत्र को खाली कराया गया।
वर्तमान में राजस्थान यूनिवर्सिटी के मुख्य द्वार पर भारी पुलिस बल तैनात है और पूरे कैंपस में सुरक्षा व्यवस्था को सख्त कर दिया गया है। यूनिवर्सिटी परिसर में प्रवेश करने वाले हर व्यक्ति की पहचान जांची जा रही है, जिससे किसी भी प्रकार की अप्रिय घटना को रोका जा सके। सड़क पर बिखरे पोस्टर और पुलिस वाहनों की मौजूदगी इस बात का संकेत दे रही है कि आज का दिन विश्वविद्यालय के लिए काफी तनावपूर्ण रहा।
इस विरोध प्रदर्शन की मुख्य वजह शाम को आयोजित होने वाला राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) का कार्यक्रम ‘मातृशक्ति संवाद: प्रमुख जन गोष्ठी’ बताया जा रहा है, जो यूनिवर्सिटी के संविधान पार्क में प्रस्तावित है। NSUI कार्यकर्ताओं का कहना है कि शैक्षणिक संस्थानों को राजनीतिक और वैचारिक गतिविधियों से दूर रखा जाना चाहिए। उनका आरोप है कि इस तरह के आयोजनों से विश्वविद्यालय के शैक्षणिक माहौल और लोकतांत्रिक मूल्यों पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है। इसी कारण उन्होंने इस कार्यक्रम को तुरंत रद्द करने की मांग करते हुए प्रदर्शन किया।
दूसरी ओर, इस पूरे विवाद पर अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) की ओर से भी प्रतिक्रिया सामने आई है। ABVP के राष्ट्रीय प्रतिनिधि भारत भूषण ने NSUI के विरोध को पूरी तरह राजनीतिक करार दिया। उन्होंने कहा कि यह प्रदर्शन केवल राजनीतिक लाभ लेने और अपने नेताओं को स्थापित करने का प्रयास है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि ‘मातृशक्ति संवाद’ कार्यक्रम के लिए विश्वविद्यालय प्रशासन से विधिवत अनुमति ली गई है और आवश्यक शुल्क भी जमा कराया गया है, ऐसे में इसे रोकना अनुचित है। साथ ही उन्होंने चेतावनी दी कि अगर कार्यक्रम में किसी प्रकार का व्यवधान उत्पन्न किया गया तो उसका कड़ा जवाब दिया जाएगा।
इस पूरे घटनाक्रम ने एक बार फिर विश्वविद्यालयों में बढ़ती राजनीतिक सक्रियता और वैचारिक टकराव को उजागर कर दिया है। जहां एक ओर छात्र संगठन अपने-अपने विचारों के समर्थन में खुलकर सामने आ रहे हैं, वहीं दूसरी ओर प्रशासन के सामने कानून-व्यवस्था बनाए रखने की बड़ी चुनौती खड़ी हो गई है। फिलहाल स्थिति नियंत्रण में है, लेकिन आने वाले समय में इस मुद्दे को लेकर और अधिक तनाव बढ़ने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।


