अजमेर के सम्राट पृथ्वीराज चौहान गवर्नमेंट कॉलेज में उस समय राजनीतिक और शैक्षणिक माहौल गरमा गया, जब कॉलेज के प्रिंसिपल मनोज बेहरवाल के एक बयान को लेकर नेशनल स्टूडेंट्स यूनियन ऑफ इंडिया (NSUI) ने उनके खिलाफ मोर्चा खोल दिया। गुरुवार को NSUI जिला अध्यक्ष अभिषेक सेमसन के नेतृत्व में कॉलेज के बाहर जोरदार प्रदर्शन किया गया और प्रिंसिपल से तत्काल इस्तीफे की मांग की गई। विवाद की जड़ प्रिंसिपल का वह बयान है, जिसमें उन्होंने एक कार्यक्रम के दौरान पाकिस्तान को भारत का ‘बड़ा भाई’ बताया था। हालांकि बाद में उन्होंने सफाई दी कि उनका बयान व्यंग्यात्मक संदर्भ में था, लेकिन छात्र संगठनों ने इसे राष्ट्रविरोधी सोच करार देते हुए विरोध तेज कर दिया।
पाकिस्तान का वीजा बनवाकर पहुंचे कार्यकर्ता
प्रदर्शन के दौरान NSUI कार्यकर्ता प्रिंसिपल के नाम से प्रतीकात्मक रूप से पाकिस्तान का वीजा तैयार करवाकर कॉलेज पहुंचे। कार्यकर्ताओं का कहना था कि जब प्रिंसिपल पाकिस्तान को बड़ा भाई मानते हैं, तो उन्हें वहीं जाना चाहिए।
हालांकि कॉलेज गेट पर ही क्लॉक टावर थाना पुलिस ने सुरक्षा घेरा बनाकर कार्यकर्ताओं को अंदर जाने से रोक दिया। पुलिस की मौजूदगी के कारण कुछ समय तक गेट पर ही नोकझोंक चलती रही।
कॉलेज के अंदर फेंका गया वीजा, लेक्चरर ने फाड़ा
कुछ देर बाद प्रदर्शनकारियों ने विरोध जताते हुए पाकिस्तान का वीजा कॉलेज परिसर के अंदर फेंक दिया। इसी दौरान एक कॉलेज लेक्चरर ने वीजा उठाकर उसे फाड़ दिया। इस घटना के बाद माहौल और अधिक तनावपूर्ण हो गया। NSUI कार्यकर्ताओं ने नारेबाजी करते हुए कहा कि जब तक प्रिंसिपल मनोज बेहरवाल इस्तीफा नहीं देते, तब तक आंदोलन जारी रहेगा।
छात्र प्रतिनिधि को किया डिबार, NSUI का आरोप
प्रदर्शन के बाद कॉलेज प्रशासन ने छात्र प्रतिनिधि लकी जैन को डिबार कर दिया। इस फैसले को लेकर NSUI ने कड़ा विरोध जताया और इसे अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर हमला बताया।
NSUI जिला अध्यक्ष अभिषेक सेमसन ने कहा कि पाकिस्तान को बड़ा भाई बताने वाले प्रिंसिपल के लिए वीजा तैयार करवाया गया था, लेकिन प्रिंसिपल इतने डर चुके हैं कि कॉलेज गेट पर ही पुलिस तैनात कर दी गई। उन्होंने आरोप लगाया कि छात्र प्रतिनिधि को बिना किसी पूर्व नोटिस के डिबार कर दिया गया, जो पूरी तरह से अलोकतांत्रिक है। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर जल्द ही प्रिंसिपल का इस्तीफा नहीं लिया गया, तो NSUI बड़ा आंदोलन शुरू करेगी।
“बिना नोटिस के डिबार किया गया” – छात्र प्रतिनिधि
डिबार किए गए छात्र प्रतिनिधि लकी जैन ने कहा कि उन्होंने NSUI के बैनर तले शांतिपूर्ण विरोध किया था। उनका कहना है कि प्रिंसिपल के बयान के विरोध में प्रतीकात्मक रूप से पाकिस्तान भेजने के लिए वीजा गिफ्ट किया जा रहा था, लेकिन कॉलेज प्रशासन ने इसे बहाना बनाकर उन्हें बिना सूचना के कॉलेज से बाहर कर दिया।
लकी जैन ने यह भी कहा कि वह इस पूरे मामले में कॉलेज प्रिंसिपल के खिलाफ कानूनी कार्रवाई करेंगे और जल्द ही मुकदमा दर्ज करवाएंगे।
यह है पूरा विवाद: कार्यक्रम में दिया गया बयान
पूरा मामला ब्यावर के सनातन धर्म राजकीय महाविद्यालय से जुड़ा है, जहां राजस्थान सोशियोलॉजिकल एसोसिएशन की 31वीं इंटरनेशनल कॉन्फ्रेंस का आयोजन 23 और 24 जनवरी को किया गया था। 24 जनवरी को आयोजित समापन समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में अजमेर कॉलेज के प्रिंसिपल मनोज बेहरवाल मौजूद थे।
अपने संबोधन में उन्होंने कहा था कि 14 अगस्त 1947 को पाकिस्तान अस्तित्व में आया और 15 अगस्त की सुबह भारत आजाद हुआ, इसलिए पाकिस्तान भारत से लगभग 12 घंटे बड़ा है और इस लिहाज से वह “बड़ा भाई” है। उन्होंने यह भी कहा कि आजादी के समय देश में केवल गांधी, जिन्ना और अंबेडकर ही लोकप्रिय नेता थे, नेहरू का नाम उस समय प्रमुख नहीं था।
राजनीतिक टिप्पणी ने बढ़ाया विवाद
इसके अलावा प्रिंसिपल बेहरवाल ने वर्ष 2014 के बाद भारतीय राजनीति और समाज के बीच भारतीय ज्ञान परंपरा के जुड़ाव की बात भी कही थी। उन्होंने दावा किया था कि इससे पहले राजनीति समाज को तोड़ने का काम करती थी। इन बयानों को लेकर भी कार्यक्रम के बाद सोशल मीडिया और राजनीतिक हलकों में तीखी प्रतिक्रियाएं देखने को मिलीं।
अब आगे क्या?
फिलहाल कॉलेज प्रशासन और NSUI आमने-सामने हैं। एक ओर इस्तीफे की मांग तेज होती जा रही है, वहीं दूसरी ओर डिबार किए गए छात्र प्रतिनिधि का मामला अब कानूनी मोड़ ले सकता है। यह देखना अहम होगा कि उच्च शिक्षा विभाग इस विवाद में क्या रुख अपनाता है और क्या प्रिंसिपल के बयान की आधिकारिक जांच होती है या नहीं।


