मनीषा शर्मा। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा की मंशा के अनुसार राजस्थान सरकार लगातार प्रशासनिक प्रक्रियाओं को डिजिटल और सरल बनाने की दिशा में काम कर रही है। इसी कड़ी में अब जनआधार कार्ड को भारत सरकार के डिजीलॉकर प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध करा दिया गया है। इस कदम से आमजन को सरकारी योजनाओं और सेवाओं का लाभ लेने में और अधिक सुविधा मिलेगी। डिजीलॉकर पर जनआधार उपलब्ध होने के बाद नागरिकों को अब हर समय कार्ड की हार्ड कॉपी साथ रखने की जरूरत नहीं पड़ेगी। डिजीलॉकर में रखा दस्तावेज मूल दस्तावेज के बराबर कानूनी रूप से मान्य माना जाएगा और जहाँ भी जनआधार मांगा जाएगा, वहीं से डिजिटल फॉर्मेट में पेश किया जा सकेगा।
कागज़ रहित प्रशासन की दिशा में बड़ा कदम
आयोजन के शासन सचिव एवं जन आधार प्राधिकरण के महानिदेशक डॉ. रवि कुमार सुरपुर ने बताया कि डिजीलॉकर में जनआधार उपलब्ध होने से सरकारी कामकाज में गति आएगी। उनके अनुसार, अब जब भी किसी विभाग द्वारा नागरिक से दस्तावेज मांगे जाएंगे, वह डिजीलॉकर से सीधे डिजिटल जनआधार उपलब्ध करा सकेगा। इससे सत्यापन प्रक्रिया तेज होगी, फाइलों का बोझ कम होगा और प्रशासनिक कार्यों में लगने वाला समय घटेगा। डॉ. सुरपुर ने स्पष्ट किया कि यह पहल न सिर्फ तकनीकी सुविधा है, बल्कि यह “पेपरलेस गवर्नेंस” की सोच को आगे बढ़ाने वाला महत्वपूर्ण कदम है। इससे पारदर्शिता बढ़ेगी, रिकॉर्ड सुरक्षित रहेंगे और नागरिकों को सेवाएं तेजी से मिल सकेंगी।
200 से अधिक योजनाओं से सीधे जुड़ा जनआधार
जन आधार प्राधिकरण के निदेशक निर्मल कुमार सेठी के अनुसार, आज राजस्थान में 200 से अधिक सरकारी योजनाओं और सेवाओं का लाभ जनआधार के माध्यम से दिया जा रहा है। जनआधार को राज्य का पारिवारिक डेटाबेस माना जाता है, जिसमें परिवार के सदस्यों की पहचान, पता और आपसी रिश्तों का विवरण दर्ज होता है। इसी आधार पर कई कल्याणकारी योजनाओं जैसे पेंशन, राशन, छात्रवृत्ति, स्वास्थ्य लाभ आदि का वितरण किया जाता है।
निर्मल सेठी ने बताया कि—
जनआधार को व्यक्तिगत पहचान
पते की पहचान
और पारिवारिक रिश्तों की पहचान
के रूप में मान्यता प्राप्त है। डिजीलॉकर पर उपलब्ध कराए जाने के बाद इसकी उपयोगिता और भी बढ़ जाएगी, क्योंकि दस्तावेज हमेशा सुरक्षित और आवश्यकता पड़ने पर तुरंत उपलब्ध रहेंगे।
डिजीलॉकर — नागरिकों के लिए डिजिटल दस्तावेज़ वॉलेट
डिजीलॉकर केंद्र सरकार के डिजिटल इंडिया कार्यक्रम के अंतर्गत इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय की प्रमुख पहल है। इसका उद्देश्य नागरिकों को उनके डिजिटल दस्तावेजों तक सुरक्षित और तत्काल पहुंच उपलब्ध कराना है। डिजीलॉकर में जारी दस्तावेज़, जैसे कि आधार, ड्राइविंग लाइसेंस, मार्कशीट, पैन, बीमा दस्तावेज और अब जनआधार कार्ड, सभी को मूल दस्तावेजों के बराबर वैधानिक मान्यता प्राप्त है।
इस प्रणाली के माध्यम से:
दस्तावेज खोने का खतरा कम हो जाता है
नकली दस्तावेजों पर लगाम लगती है
और सरकारी सेवाओं में तेज़ी आती है
डिजीलॉकर रियल-टाइम वेरिफिकेशन मॉड्यूल प्रदान करता है, जिसके जरिए संबंधित विभाग यूजर की सहमति से सीधे जारीकर्ता एजेंसी से डेटा सत्यापित कर सकते हैं। इस प्रकार, दस्तावेजों का आदान-प्रदान पूरी तरह सुरक्षित और नियंत्रित तरीके से होता है।
जनआधार कार्ड डिजीलॉकर से कैसे डाउनलोड करें
राज्य सरकार ने जनआधार को डिजीलॉकर से जोड़कर प्रक्रिया को बेहद सरल बनाया है। कार्ड डाउनलोड करने के लिए नागरिक निम्न चरणों का पालन कर सकते हैं:
सबसे पहले डिजीलॉकर में लॉग-इन करें या नया खाता बनाएं।
जनआधार नंबर दर्ज करें।
कार्ड में दर्ज मेम्बर आईडी भरें।
ओटीपी भेजने वाले बटन पर क्लिक करें।
जनआधार में दर्ज मोबाइल नंबर पर प्राप्त OTP दर्ज करें।
इसके बाद जनआधार कार्ड अपने-आप डिजीलॉकर खाते में दिखाई देने लगेगा और किसी भी समय डाउनलोड या शेयर किया जा सकेगा।
जनआधार के डिजिटल भविष्य की ओर कदम
विशेषज्ञों का मानना है कि जनआधार को डिजीलॉकर से जोड़ना, राजस्थान को डिजिटल प्रशासन की दिशा में आगे ले जाने वाली महत्वपूर्ण उपलब्धि है। इससे लाभार्थियों को योजनाओं में बार-बार दस्तावेज जमा कराने की जरूरत नहीं रहेगी और विभागों के बीच समन्वय और बेहतर होगा। सरकार का स्पष्ट लक्ष्य है कि अधिकतम सेवाएं ऑनलाइन और पारदर्शी तरीके से उपलब्ध कराई जाएं, ताकि नागरिकों का समय, मेहनत और खर्च — तीनों बच सकें।
योजना के लागू होने के बाद अब यह उम्मीद की जा रही है कि ग्रामीण क्षेत्रों, बुजुर्गों और कामकाजी लोगों को विशेष लाभ मिलेगा, क्योंकि वे कहीं से भी अपने दस्तावेज प्रस्तुत कर सकेंगे और सरकारी सेवाओं तक आसानी से पहुंच पाएंगे।


