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जयपुर में अब एक ही नगर निगम: नई व्यवस्था आज से लागू

जयपुर में अब एक ही नगर निगम: नई व्यवस्था आज से लागू

मनीषा शर्मा। राजस्थान की राजधानी जयपुर में आज से एक बड़ा प्रशासनिक बदलाव लागू हो गया है। 10 नवंबर 2025 से जयपुर हेरिटेज नगर निगम और जयपुर ग्रेटर नगर निगम का अस्तित्व खत्म हो गया है। अब पूरे शहर में एक ही एकीकृत “जयपुर नगर निगम” व्यवस्था लागू की गई है।

यह कदम राज्य सरकार की उस योजना का हिस्सा है जिसके तहत नगर प्रशासन को अधिक सशक्त, पारदर्शी और नागरिकों के लिए सरल बनाने की पहल की गई है। अब जयपुर में दो नहीं, बल्कि एक ही नगर निगम होगा जो पूरे शहर के सभी क्षेत्रों की जिम्मेदारी संभालेगा।

नई व्यवस्था आज से प्रभावी

राजधानी में इस बदलाव के साथ ही नगर निगम के सभी दस्तावेजों और रिकॉर्ड्स में संशोधन शुरू कर दिया गया है। अब पट्टे, जन्म-मृत्यु प्रमाणपत्र, विवाह प्रमाणपत्र, संपत्ति कर रसीदें और अन्य आधिकारिक दस्तावेज़ों पर केवल “जयपुर नगर निगम” नाम लिखा जाएगा।

शहर में जो पहले “जयपुर ग्रेटर” और “जयपुर हेरिटेज” नाम से दो अलग-अलग बोर्ड कार्यरत थे, उन्हें खत्म कर दिया गया है। नगर निगम कार्यालयों के बाहर लगे बोर्डों से भी “ग्रेटर” शब्द हटाया गया है।

इस व्यवस्था के बाद शहर के नागरिकों को दो अलग-अलग निगमों में काम कराने की जरूरत नहीं रहेगी, जिससे प्रशासनिक प्रक्रियाओं में पारदर्शिता और दक्षता आने की उम्मीद है।

नगर निगम की वेबसाइट और रिकॉर्ड्स भी होंगे अपडेट

नई व्यवस्था के तहत नगर निगम की आधिकारिक वेबसाइट और ई-गवर्नेंस पोर्टल्स को भी अपडेट किया जा रहा है। अब सभी वार्डों से संबंधित जानकारी, शिकायत निवारण व्यवस्था, कर भुगतान और नागरिक सुविधाओं की सेवाएं एक ही पोर्टल पर उपलब्ध होंगी।

फिलहाल नगर निगम की कमान जयपुर संभागीय आयुक्त के हाथ में रहेगी। वह प्रशासक के रूप में काम करेंगे जब तक कि नई चुनाव प्रक्रिया पूरी नहीं होती। राज्य सरकार ने संकेत दिए हैं कि एकीकृत निगम के लिए जल्द ही चुनाव की अधिसूचना जारी की जाएगी।

जोधपुर में भी लागू हुआ ऐसा ही मॉडल

जयपुर के बाद जोधपुर में भी इसी तरह का प्रशासनिक परिवर्तन किया गया था। वहां पहले जोधपुर नगर निगम उत्तर और जोधपुर नगर निगम दक्षिण के रूप में दो अलग-अलग इकाइयाँ कार्यरत थीं।

राज्य सरकार ने जोधपुर में दोनों निगमों को विलय कर एक ही नगर निगम बना दिया है। नई व्यवस्था के अनुसार अब जोधपुर में कुल 100 वार्डों वाला एकीकृत नगर निगम कार्यरत रहेगा।

पहले जोधपुर उत्तर में कांग्रेस का बोर्ड था जबकि दक्षिण में भाजपा की सत्ता थी। दोनों निगमों में 80-80 पार्षद थे, जो शहर के अलग-अलग हिस्सों का ध्यान रखते थे। अब इन दोनों को एकीकृत कर दिया गया है ताकि प्रशासनिक कार्यों में समन्वय बढ़े और संसाधनों का बेहतर उपयोग हो सके।

राज्य सरकार की मंशा – प्रशासनिक दक्षता और पारदर्शिता

राज्य सरकार का कहना है कि दो अलग-अलग नगर निगमों की व्यवस्था से संसाधनों का बंटवारा और निर्णय लेने में देरी जैसी समस्याएं सामने आ रही थीं। इस कारण नागरिक सेवाओं पर भी असर पड़ रहा था।

एकीकृत “जयपुर नगर निगम” व्यवस्था लागू होने के बाद शहर में समान विकास, समन्वित योजना और वित्तीय पारदर्शिता सुनिश्चित होगी। साथ ही, अधिकारियों का कार्यभार स्पष्ट रूप से विभाजित रहेगा जिससे आम जनता को भी कामकाज में सरलता मिलेगी।

नई संरचना से नागरिकों को क्या फायदा

नई व्यवस्था में एकीकृत कर व्यवस्था, समान वार्ड सीमांकन, और केंद्रीकृत शिकायत प्रणाली जैसी सुविधाएं लागू की जाएंगी। इससे नागरिकों को जन्म-मृत्यु प्रमाणपत्र, भवन अनुमति, और कर भुगतान जैसे कार्य एक ही प्लेटफॉर्म से करने में सुविधा होगी।

जयपुर नगर निगम अब पूरे शहर के लिए एक केंद्रीकृत निकाय के रूप में कार्य करेगा, जिससे विकास योजनाओं और बजट के उपयोग में अधिक पारदर्शिता आएगी।

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