मनीषा शर्मा। अजमेर जिले में मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) कार्यक्रम के तहत बड़ी कार्रवाई शुरू की गई है। जिले में ऐसे 25,003 वोटर्स की पहचान की गई है, जो “नॉन-मैपिंग” श्रेणी में आते हैं—अर्थात् जिनके पते, क्षेत्र या रिकॉर्ड सही तरीके से सिस्टम से लिंक नहीं हो पाए हैं। इस संबंध में एईआरओ और एआरओ के माध्यम से इन सभी मतदाताओं को नोटिस जारी किए गए हैं, जिन्हें बीएलओ द्वारा घर-घर जाकर तामील कराया जा रहा है।
मतदाताओं द्वारा दिए गए जवाब और दस्तावेज अब ऑनलाइन अपलोड किए जा रहे हैं, ताकि पूरे प्रक्रिया में पारदर्शिता और गति बनी रहे। प्रस्तुत किए गए दस्तावेज संबंधित विभाग या संस्था द्वारा सत्यापित किए जाएंगे, और केवल वेरिफिकेशन के बाद ही उन्हें स्वीकार किया जाएगा। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि वास्तविक और पात्र मतदाता ही सूची में शामिल रहें।
कलेक्टर का निर्देश — वेरिफिकेशन में देरी न हो
जिला निर्वाचन अधिकारी एवं कलेक्टर लोक बंधु ने सभी विभागों और संस्थानों को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि मतदाताओं द्वारा जमा किए गए दस्तावेजों का शीघ्र सत्यापन किया जाए। इसके लिए विभिन्न विभागों में नोडल अधिकारी नियुक्त करने और समय-समय पर रिपोर्ट भेजने के निर्देश भी दिए गए हैं।
निर्वाचन विभाग का कहना है कि मतदाता सूची लोकतंत्र की नींव है, इसलिए एक भी पात्र नागरिक का नाम छूटना या गलत तरीके से हट जाना गंभीर मामला माना जाएगा। इसी वजह से दस्तावेजों का सत्यापन सीधे जारी करने वाले विभाग या अथॉरिटी से कराया जा रहा है।
दस्तावेज सत्यापन में 28 विभागों की भूमिका
इस प्रक्रिया में केंद्र और राज्य सरकार के कुल 28 विभाग जुड़े हुए हैं। इनमें उपखंड अधिकारी और तहसीलदार कार्यालय, मंडल रेल प्रबंधक, जिला वन अधिकारी, स्थानीय निकाय विभाग, सीबीएसई, एमडीएस यूनिवर्सिटी, सूचना प्रौद्योगिकी विभाग, सांख्यिकी विभाग, पेंशन एवं पेंशनभोगी कल्याण विभाग, पासपोर्ट कार्यालय, विभिन्न विश्वविद्यालय, एलआईसी, ओपन स्कूल बोर्ड, पीडब्ल्यूडी, हाउसिंग बोर्ड, राष्ट्रीय और निजी बैंक समेत कई प्रमुख संस्थान शामिल हैं।
तेजी से काम निपटाने के लिए नौ विभागों से एक-एक कर्मचारी की नियुक्ति कलेक्ट्रेट में करने के निर्देश दिए गए हैं, जहां 10 कंप्यूटर लगाए जाएंगे ताकि सत्यापन में किसी तरह की देरी न हो।
इन दस्तावेजों से जुड़वा सकेंगे नाम
एसआईआर कार्यक्रम के तहत मतदाता सूची में नाम जुड़वाने के लिए निर्वाचन विभाग ने 13 प्रकार के दस्तावेज मान्य किए हैं। इनमें से कोई एक दस्तावेज प्रस्तुत किया जा सकता है।
मुख्य रूप से —
केंद्र या राज्य सरकार, सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रम या पेंशनभोगी को जारी आधिकारिक पहचान पत्र, पेंशन भुगतान आदेश, तथा 1 जुलाई 1987 से पहले सरकारी संस्थाओं द्वारा जारी कोई वैध पहचान/प्रमाण पत्र शामिल हैं।
दस्तावेज जमा होने के बाद उनका क्रॉस-वेरिफिकेशन संबंधित विभाग से किया जाएगा और रिपोर्ट मिलने पर ही मतदाता का नाम अंतिम सूची में जोड़ा जाएगा।
वोटर्स के लिए बड़ा अवसर
अधिकारियों का मानना है कि यह प्रक्रिया उन मतदाताओं के लिए बेहद उपयोगी साबित होगी जिनके नाम तकनीकी कारणों से कट गए या सही क्षेत्र से लिंक नहीं हो पाए। वेरिफिकेशन के बाद eligible मतदाताओं के नाम दोबारा जुड़ सकेंगे और उन्हें मतदान का अधिकार मिलेगा।
निर्वाचन विभाग ने अपील की है कि जिन मतदाताओं को नोटिस मिला है, वे निर्धारित समय में अपने दस्तावेज जमा करें और किसी भी शंका की स्थिति में बीएलओ या निर्वाचन कार्यालय से संपर्क करें।


