संसद के बजट सत्र के बीच विपक्ष ने एक बड़ा और असाधारण कदम उठाते हुए लोकसभा स्पीकर ओम बिरला के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव का नोटिस पेश कर दिया है। इस प्रस्ताव पर कुल 118 सांसदों के हस्ताक्षर बताए जा रहे हैं। यह कदम ऐसे समय पर उठाया गया है, जब संसद के भीतर लगातार हंगामा, कार्यवाही में व्यवधान और विपक्ष को बोलने का अवसर न मिलने को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। न्यूज एजेंसी IANS ने सूत्रों के हवाले से दावा किया है कि अविश्वास प्रस्ताव पर चर्चा और उसके निपटारे तक ओम बिरला लोकसभा की कार्यवाही में सक्रिय रूप से चेयर संभालते नजर नहीं आएंगे। एजेंसी के अनुसार, प्रस्ताव गिरने के बाद ही वह दोबारा स्पीकर की कुर्सी पर बैठेंगे।
9 मार्च को हो सकती है ओम बिरला के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर चर्चा
एजेंसी सूत्रों के मुताबिक विपक्ष के इस अविश्वास प्रस्ताव पर 9 मार्च को सदन में चर्चा कराई जा सकती है। मौजूदा बजट सत्र का यह चरण 13 फरवरी को समाप्त हो रहा है। इसके बाद संसद की कार्यवाही 8 मार्च से दोबारा शुरू होगी। ऐसे में अविश्वास प्रस्ताव पर चर्चा अगले चरण में होने की संभावना जताई जा रही है। यह पहली बार नहीं है जब लोकसभा स्पीकर के कामकाज को लेकर विपक्ष ने सवाल उठाए हों, लेकिन औपचारिक रूप से अविश्वास प्रस्ताव लाना एक बड़ा संवैधानिक और राजनीतिक संदेश माना जा रहा है।
बजट सत्र में लगातार हंगामा
बजट सत्र के 10वें दिन संसद की कार्यवाही दो बार स्थगित करनी पड़ी। भारी हंगामे के कारण दोपहर 2 बजे के बाद ही सदन की कार्यवाही सुचारु रूप से शुरू हो सकी। इसके बाद कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने बजट पर चर्चा की शुरुआत की। हालांकि विपक्ष का आरोप है कि उन्हें अपनी बात रखने का पूरा मौका नहीं दिया जा रहा, जबकि सरकार का कहना है कि विपक्ष जानबूझकर कार्यवाही बाधित कर रहा है।
राहुल गांधी और पूर्व आर्मी चीफ की किताब का विवाद
सदन के भीतर विवाद का एक बड़ा कारण राहुल गांधी द्वारा पूर्व थल सेना प्रमुख जनरल एमएम नरवणे की कथित किताब को लेकर दिया गया बयान भी रहा। राहुल गांधी इस किताब को लेकर लोकसभा पहुंचे थे और विपक्ष इस बात पर अड़ा रहा कि उन्हें इस मुद्दे पर सदन में बोलने दिया जाए। इस पूरे विवाद के बीच पब्लिशिंग कंपनी पेंगुइन रैंडम हाउस इंडिया की ओर से स्पष्टीकरण सामने आया। कंपनी ने साफ किया कि जनरल नरवणे की किताब अब तक प्रकाशित नहीं हुई है और पब्लिशिंग से जुड़े सभी अधिकार उनके पास हैं। कंपनी के अनुसार, न तो किताब की कोई छपी हुई कॉपी सामने आई है और न ही डिजिटल संस्करण सार्वजनिक किया गया है।
अनऑथराइज्ड कॉपी लीक का मामला
पेंगुइन रैंडम हाउस इंडिया ने यह भी स्पष्ट किया कि उनकी ओर से किताब का कोई भी हिस्सा सार्वजनिक नहीं किया गया है। कंपनी की यह सफाई इसलिए आई, क्योंकि किताब की अनऑथराइज्ड कॉपियों के लीक होने और ऑनलाइन सर्कुलेशन के दावे सामने आए थे। इस मामले को गंभीरता से लेते हुए दिल्ली पुलिस ने एफआईआर दर्ज की है और जांच शुरू कर दी गई है। इस मुद्दे ने संसद के भीतर सरकार और विपक्ष के बीच टकराव को और तेज कर दिया।
स्वास्थ्य मंत्रालय का बड़ा खुलासा: सिकल सेल एनीमिया
राज्यसभा में स्वास्थ्य राज्यमंत्री अनुप्रिया पटेल ने एक अहम जानकारी साझा की। उन्होंने बताया कि 3 फरवरी तक देशभर के आदिवासी बहुल इलाकों में 6.83 करोड़ से अधिक लोगों की सिकल सेल एनीमिया के लिए स्क्रीनिंग की जा चुकी है। इस जांच में करीब 2.38 लाख लोग इस बीमारी से संक्रमित पाए गए हैं, जबकि 19.32 लाख से ज्यादा लोगों की पहचान कैरियर के रूप में हुई है। सरकार के अनुसार, यह डेटा भविष्य की स्वास्थ्य नीतियों और उपचार योजनाओं के लिए बेहद अहम है।
अभिषेक बनर्जी का केंद्र सरकार पर तीखा हमला
टीएमसी सांसद अभिषेक बनर्जी ने संसद में बजट पर चर्चा के दौरान केंद्र सरकार पर जमकर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि भाजपा को पश्चिम बंगाल में तीन बार हार का सामना करना पड़ा है और चौथी बार भी हार तय है। बनर्जी ने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार ने बंगाल को बेहद कम फंड दिया है और केंद्रीय एजेंसियों के जरिए राज्य को परेशान किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि फाइलें सीज की जा रही हैं और बजट रोका जा रहा है, लेकिन इसके बावजूद बंगाल आगे बढ़ता रहेगा।
मणिपुर और संविधान का मुद्दा
अभिषेक बनर्जी ने मणिपुर हिंसा का मुद्दा उठाते हुए कहा कि सरकार को वहां पहुंचने में दो साल लग गए। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार देश के कई हिस्सों में गई, लेकिन मणिपुर की अनदेखी की गई। उन्होंने यह भी कहा कि कुछ मुद्दे बजट से ऊपर होते हैं, लेकिन सरकार इसे समझने में असफल रही है। बनर्जी ने याद दिलाया कि संविधान की शुरुआत “हम भारत के लोग” से होती है और किसी के साथ अन्याय करने पर संविधान खुद रास्ता रोकता है।
सरकारी कंपनियों की बिक्री और भ्रष्टाचार के आरोप
टीएमसी सांसद ने सरकार पर सरकारी कंपनियों को बेचने का आरोप भी लगाया। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री “ना खाऊंगा, ना खाने दूंगा” की बात करते हैं, लेकिन सत्तारूढ़ पार्टी खुद एक “वॉशिंग मशीन” बन चुकी है। बनर्जी का आरोप था कि सरकार केवल अपने करीबी उद्योगपतियों को फायदा पहुंचा रही है और आम जनता के हितों की अनदेखी कर रही है।
युवाओं और महिलाओं को लेकर सरकार पर सवाल
अभिषेक बनर्जी ने कहा कि युवाओं और महिलाओं को लेकर सरकार की नीयत में ही खोट है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार समाज में नफरत बढ़ाने का काम कर रही है और अपने भाषणों के जरिए लोगों को भड़काया जा रहा है।
संसद में बढ़ता राजनीतिक तनाव
लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव, राहुल गांधी की किताब से जुड़ा विवाद, स्वास्थ्य से जुड़े अहम आंकड़े और टीएमसी सांसदों के तीखे हमलों ने संसद के बजट सत्र को पूरी तरह राजनीतिक रंग दे दिया है। आने वाले दिनों में अविश्वास प्रस्ताव पर होने वाली चर्चा और उसके परिणाम पर पूरे देश की नजरें टिकी रहेंगी, क्योंकि यह मामला केवल संसद की कार्यवाही तक सीमित नहीं, बल्कि लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं और संसदीय मर्यादाओं से भी जुड़ा हुआ है।


