राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा योजना (NFSA) से अपात्र लोगों को बाहर करने के लिए खाद्य विभाग द्वारा चलाया जा रहा ‘गिव अप अभियान’ जिले में लगातार तेज़ी पकड़ रहा है। विभाग की सख्ती, जागरूकता कार्यक्रमों और नियमित सत्यापन के चलते बड़ी संख्या में लोगों ने स्वयं आगे बढ़कर अपने नाम योजना से हटवाने का निर्णय लिया है। एनएफएसए के तहत मिलने वाले सरकारी अनाज का लाभ केवल पात्र और वास्तविक जरूरतमंद परिवारों को ही दिया जाए, इसी उद्देश्य से यह अभियान चलाया जा रहा है। खाद्य विभाग के अनुसार अब तक 4,260 परिवारों के कुल 20,853 सदस्यों ने स्वेच्छा से स्वयं को योजना से बाहर कर लिया है। यह आंकड़ा दर्शाता है कि लोग योजना की पात्रता को लेकर अधिक जागरूक हो रहे हैं और वे स्वयं यह सुनिश्चित कर रहे हैं कि सरकारी संसाधनों का दुरुपयोग न हो।
अपात्र लाभार्थियों को जारी नोटिस
जिले के जिला रसद अधिकारी (डीएसओ) मोहनलाल देव ने पुष्टि की कि अभियान के दौरान कई लोग ऐसे पाए गए जो निर्धारित नियमों के बावजूद योजना का लाभ ले रहे थे। ऐसे 1,158 अपात्र व्यक्तियों को औपचारिक नोटिस जारी कर दिया गया है। नोटिस का मुख्य उद्देश्य इन लाभार्थियों को अंतिम अवसर देना है ताकि यदि उन्होंने अनजाने में योजना का लाभ लिया है तो वे अपने दस्तावेज़ अपडेट करवा कर खुद को योजना से हटवा सकें। डीएसओ ने स्पष्ट किया कि विभाग की मंशा किसी को परेशान करना नहीं, बल्कि वितरण प्रणाली को पारदर्शी बनाना है।
किन्हें माना जा रहा है अपात्र
खाद्य विभाग ने एनएफएसए के नियमों के आधार पर उन परिवारों की पहचान की है जो योजना के दायरे में नहीं आते। प्रमुख आधार निम्नलिखित हैं—
सरकारी कर्मचारी होना
आयकर दाता होना
परिवार की वार्षिक आय एक लाख रुपये से अधिक होना
निजी चारपहिया वाहन का मालिक होना
आर्थिक रूप से सक्षम परिवार जो सरकारी सब्सिडी पर निर्भर नहीं
इन श्रेणियों में आने वाले परिवारों को विभाग ने 28 फरवरी तक स्वेच्छा से नाम हटाने का अंतिम अवसर दिया है।
अंतिम तिथि के बाद होगी सख्त वसूली
डीएसओ मोहनलाल देव ने कहा कि निर्धारित समय सीमा के बाद ऐसे अपात्र परिवारों पर सख्त कार्यवाही की जाएगी। इसमें शामिल होगा—
अब तक लिये गए राशन की बाजार दर से वसूली
आर्थिक जुर्माना
पात्रता छिपाने पर कानूनी कार्रवाई
भविष्योन्मुख सरकारी योजनाओं में बाधा
विभाग का स्पष्ट संदेश है कि जो लोग पात्र नहीं हैं और फिर भी सब्सिडी ले रहे हैं, उन्हें इसका हिसाब देना होगा।
घर-घर सत्यापन के जरिए अपात्रों की पहचान
खाद्य विभाग ने सत्यापन प्रक्रिया को बेहद व्यापक और पारदर्शी बनाया है। इसके तहत—
प्रवर्तन अधिकारियों, खाद्य निरीक्षकों और उचित मूल्य दुकानदारों के संयुक्त दल बनाए गए
घर-घर जाकर दस्तावेज़ों और परिवार की वास्तविक पात्रता की जांच की जा रही है
परिवहन विभाग से चारपहिया वाहन मालिकों का डेटाबेस हासिल किया जा रहा है
क्रॉस-वेरिफिकेशन से यह सुनिश्चित किया जाएगा कि कोई वाहनधारक लाभार्थी योजना में शामिल न रह जाए
इस बहुस्तरीय जांच का उद्देश्य यह है कि कोई भी अपात्र व्यक्ति योजना के अंदर छुपा न रह पाए।
पारदर्शिता और जरूरतमंदों को लाभ देने का उद्देश्य
खाद्य विभाग ने दोहराया कि अभियान किसी को निशाना बनाने के लिए नहीं चलाया जा रहा, बल्कि यह सुनिश्चित करने के लिए है कि वास्तविक गरीब और जरूरतमंद परिवार योजनाओं के लाभ से वंचित न रह जाएं। विभाग ने कहा कि जब अपात्र परिवार बाहर होंगे, तब ही पात्र परिवारों को पूरा लाभ और पर्याप्त मात्रा में राशन उपलब्ध कराया जा सकेगा।
इस उद्देश्य से ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में जागरूकता शिविर आयोजित किए जा रहे हैं, जहां लोगों को पात्रता नियमों की जानकारी दी जा रही है और उन्हें स्वेच्छा से ‘गिव अप’ करने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है।
अभियान से राशन वितरण व्यवस्था और मजबूत होने की उम्मीद
एनएफएसए गिव अप अभियान से आने वाले समय में—
राशन वितरण प्रणाली और अधिक निष्पक्ष होगी
पात्रता के आधार पर नए योग्य परिवारों को योजना में जोड़ा जा सकेगा
सरकारी सब्सिडी का सही उपयोग होगा
पारदर्शिता बढ़ेगी और भ्रष्टाचार कम होगा
जिला प्रशासन का मानना है कि यह अभियान सामाजिक न्याय को मजबूत करेगा और सरकारी संसाधनों का सही इस्तेमाल सुनिश्चित करेगा।


