आम आदमी पार्टी को लेकर एक बड़ी राजनीतिक हलचल की खबर सामने आई है, जिसमें दावा किया गया है कि पार्टी के 10 राज्यसभा सांसदों में से 7 सांसद भाजपा में शामिल होने जा रहे हैं। इस घटनाक्रम का ऐलान पंजाब से राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा ने शुक्रवार शाम 4 बजे प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान किया। इस खबर ने दिल्ली से लेकर पंजाब तक राजनीतिक माहौल गर्म कर दिया है और विपक्षी दलों के बीच नई बहस शुरू हो गई है।
प्रेस कॉन्फ्रेंस में राघव चड्ढा ने कहा कि उनके साथ राज्यसभा सांसद संदीप पाठक, अशोक कुमार मित्तल, हरभजन सिंह, विक्रमजीत सिंह साहनी, स्वाति मालीवाल और राजेंद्र गुप्ता भी इस फैसले के समर्थन में हैं। प्रेस वार्ता के दौरान संदीप पाठक और अशोक मित्तल उनके साथ मौजूद भी रहे। इसके बाद राघव चड्ढा, संदीप पाठक और अशोक मित्तल भाजपा मुख्यालय पहुंचे और पार्टी की सदस्यता लेने की खबर सामने आई। हालांकि बाकी चार सांसदों की सार्वजनिक मौजूदगी तत्काल सामने नहीं आई।
स्वाति मालीवाल ने इस बीच कहा कि वह इटानगर में हैं और शाम तक दिल्ली लौटने के बाद अपनी स्थिति स्पष्ट करेंगी। इससे राजनीतिक अटकलें और तेज हो गईं कि क्या वाकई आम आदमी पार्टी में बड़ा विभाजन हो चुका है या अभी कुछ नेताओं की तरफ से आधिकारिक प्रतिक्रिया आना बाकी है।
राघव चड्ढा ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में दलबदल कानून को लेकर भी बड़ा बयान दिया। उन्होंने कहा कि पार्टी के दो-तिहाई सांसदों ने सामूहिक रूप से यह फैसला लिया है, इसलिए दलबदल कानून लागू होने का सवाल नहीं उठता। उनका कहना था कि यह कदम संविधानिक प्रावधानों के तहत उठाया गया है और समूह के रूप में भाजपा में विलय की प्रक्रिया अपनाई जाएगी।
राघव चड्ढा ने यह भी कहा कि पिछले कुछ वर्षों से उन्हें महसूस हो रहा था कि वह गलत पार्टी में सही व्यक्ति हैं। उनके इस बयान को आम आदमी पार्टी नेतृत्व पर सीधा हमला माना जा रहा है। राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि यदि यह दावा सही साबित होता है तो यह AAP के लिए राष्ट्रीय स्तर पर बड़ा झटका माना जाएगा।
इस पूरे घटनाक्रम के बाद पंजाब की राजनीति में भी हलचल बढ़ गई है, क्योंकि वर्ष 2027 में राज्य विधानसभा चुनाव होने हैं। आम आदमी पार्टी ने पंजाब में अपनी सरकार बनाई थी और पार्टी का सबसे मजबूत आधार यही राज्य माना जाता है। ऐसे समय में यदि पार्टी के बड़े चेहरे और राज्यसभा सांसद साथ छोड़ते हैं तो इसका असर संगठन और चुनावी रणनीति दोनों पर पड़ सकता है।
इस मामले पर पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि पार्टी विचारधारा से चलती है, केवल पदों से नहीं। उनका कहना था कि आम आदमी पार्टी एक इंकलाबी सोच का नाम है, जहां लोग पैसा कमाने नहीं बल्कि बदलाव लाने आते हैं। उन्होंने भाजपा पर आरोप लगाया कि वह दूसरी पार्टियों के नेताओं को तोड़कर अपने साथ जोड़ने की राजनीति करती है।
भगवंत मान ने कहा कि भाजपा पंजाब में मजबूत जनाधार नहीं बना पाई है, इसलिए वह दूसरे दलों के नेताओं को शामिल कर राजनीतिक जमीन तलाश रही है। उन्होंने यह भी कहा कि पंजाब के लोग विश्वासघात को आसानी से नहीं भूलते और आने वाले समय में जनता इसका जवाब देगी।
मुख्यमंत्री ने केंद्रीय एजेंसियों के दुरुपयोग का भी आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि जिन नेताओं पर दबाव बनाया जाता है, बाद में वही नेता भाजपा में शामिल हो जाते हैं। अशोक मित्तल के घर ईडी की कार्रवाई का जिक्र करते हुए उन्होंने संकेत दिया कि एजेंसियों का इस्तेमाल राजनीतिक दबाव के लिए किया जा रहा है।
इस बीच कांग्रेस नेताओं ने भी आम आदमी पार्टी पर निशाना साधा। कांग्रेस सांसद सुखजिंदर सिंह रंधावा ने कहा कि जब पार्टी के प्रमुख रणनीतिकार माने जाने वाले नेता ही साथ छोड़ दें, तो यह नेतृत्व पर गंभीर सवाल खड़ा करता है। उन्होंने कहा कि अरविंद केजरीवाल और भगवंत मान को इस मामले पर जनता के सामने जवाब देना चाहिए।
राघव चड्ढा के पिछले कुछ समय से पार्टी से दूरी बनाने की चर्चाएं पहले भी सामने आती रही थीं। बताया जा रहा था कि दिल्ली चुनाव में हार के बाद वह पार्टी गतिविधियों से कम जुड़े दिखे। सोशल मीडिया पर भी उनके अकाउंट से पार्टी से जुड़े कई संकेत हटने की चर्चा थी। कई मौकों पर वह पार्टी कार्यक्रमों में भी नजर नहीं आए थे, जिससे अटकलें लगातार बढ़ रही थीं।
यदि यह राजनीतिक बदलाव पूरी तरह औपचारिक रूप लेता है तो आम आदमी पार्टी के लिए यह सबसे बड़े संकटों में से एक माना जाएगा। राज्यसभा में पार्टी की ताकत घट सकती है और राष्ट्रीय राजनीति में उसकी पकड़ कमजोर पड़ सकती है। दूसरी ओर भाजपा के लिए यह विपक्षी दलों में सेंध लगाने की बड़ी सफलता के रूप में देखा जाएगा।


