मनीषा शर्मा। राजस्थान के शिक्षा विभाग ने प्रदेशभर के सभी सरकारी और निजी स्कूलों के लिए एक ऐसा आदेश जारी किया है, जिसने शिक्षकों और स्कूल प्रशासन के बीच हलचल मचा दी है। इस आदेश के तहत अब स्कूल स्टाफ और शिक्षकों को केवल शैक्षणिक गतिविधियों तक सीमित नहीं रहना होगा, बल्कि स्कूल परिसर में आवारा कुत्तों को भगाने और उन्हें पकड़वाने की जिम्मेदारी भी निभानी पड़ेगी। यह फैसला छात्रों और स्टाफ की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए लिया गया है।
सुप्रीम कोर्ट की सख्ती के बाद शिक्षा विभाग का कदम
हाल के महीनों में देशभर में आवारा कुत्तों के काटने की घटनाओं में लगातार इजाफा हुआ है। कई मामलों में बच्चे इसका शिकार बने हैं। सुप्रीम कोर्ट ने भी इस गंभीर समस्या पर सख्त टिप्पणी करते हुए संबंधित विभागों को सुरक्षा उपाय सुनिश्चित करने के निर्देश दिए थे। इसी के तहत राजस्थान शिक्षा निदेशालय ने यह आदेश जारी किया है। शिक्षा निदेशक सीताराम जाट द्वारा जारी निर्देशों में साफ कहा गया है कि छात्रों की सुरक्षा सर्वोपरि है और इसमें किसी भी प्रकार की लापरवाही स्वीकार नहीं की जाएगी।
स्कूलों को क्या-क्या इंतजाम करने होंगे
शिक्षा विभाग के आदेश के अनुसार, सभी स्कूलों को सबसे पहले अपने परिसर की सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करनी होगी। स्कूलों में पर्याप्त बाड़, चारदीवारी और मजबूत गेट अनिवार्य किए गए हैं ताकि कोई भी आवारा कुत्ता परिसर में प्रवेश न कर सके। इसके साथ ही स्कूल इंचार्ज और शिक्षक स्थानीय नगर निगम, नगर परिषद, विकास प्राधिकरण और जिला प्रशासन से समन्वय कर आवारा कुत्तों को पकड़वाने की कार्रवाई करेंगे। स्कूल परिसरों में खुले कचरे, गंदगी और जलभराव को तुरंत हटाने के निर्देश दिए गए हैं, क्योंकि यही चीजें कुत्तों को आकर्षित करती हैं।
स्वास्थ्य व्यवस्था और बच्चों को जागरूक करने पर जोर
आदेश में यह भी कहा गया है कि हर स्कूल को नजदीकी सरकारी स्वास्थ्य केंद्र से जोड़ा जाएगा, जहां रेबीज के टीके और प्राथमिक उपचार की सुविधा उपलब्ध हो। किसी भी आपात स्थिति में बच्चों को तुरंत इलाज मिल सके, इसके लिए स्कूल स्तर पर स्पष्ट कार्ययोजना बनाने को कहा गया है। इसके अलावा छात्रों को यह भी सिखाया जाएगा कि जानवरों के आसपास किस तरह व्यवहार करना चाहिए और अगर कुत्ता काट ले तो तुरंत क्या कदम उठाने हैं। इसे स्कूल की नियमित गतिविधियों में शामिल किया जाएगा।
शिक्षकों में बढ़ा असंतोष, जताई नाराजगी
शिक्षा विभाग के इस आदेश के बाद प्रदेशभर में शिक्षक संगठनों में नाराजगी देखी जा रही है। शिक्षकों का कहना है कि वे पहले से ही 50 से अधिक गैर-शैक्षणिक और सरकारी योजनाओं के कामों में लगे हुए हैं। अब आवारा कुत्तों की निगरानी और उन्हें पकड़वाने की जिम्मेदारी सौंपना उनकी मूल भूमिका—पढ़ाने—पर सीधा असर डालेगा। कई शिक्षक संगठनों ने इसे प्रशासनिक विफलता बताते हुए कहा है कि नगर निकायों की जिम्मेदारी शिक्षकों पर डालना उचित नहीं है।
आदेश की अनदेखी पर सख्त कार्रवाई की चेतावनी
शिक्षा विभाग ने आदेश में स्पष्ट चेतावनी दी है कि ब्लॉक शिक्षा अधिकारी (BEEO) हर तीन महीने में स्कूलों का निरीक्षण करेंगे। यदि किसी स्कूल परिसर में आवारा कुत्ते पाए गए या आदेश की अवहेलना हुई, तो संबंधित स्कूल इंचार्ज और अधिकारियों के खिलाफ सख्त अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी। विभाग का कहना है कि यह कदम किसी पर अतिरिक्त बोझ डालने के लिए नहीं, बल्कि बच्चों की जान की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए उठाया गया है।
सुरक्षा बनाम जिम्मेदारी पर बहस तेज
इस आदेश के बाद प्रदेश में यह बहस तेज हो गई है कि छात्रों की सुरक्षा जरूरी है, लेकिन क्या इसके लिए शिक्षकों पर अतिरिक्त जिम्मेदारियां डालना सही है। आने वाले दिनों में शिक्षक संगठनों और सरकार के बीच इस मुद्दे पर बातचीत या विरोध देखने को मिल सकता है।


