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वेंडर्स के लिए नया लाइसेंस नियम लागू

वेंडर्स के लिए नया लाइसेंस नियम लागू

राजस्थान सहित पूरे देश के स्ट्रीट वेंडर्स और खाद्य व्यवसाय से जुड़े व्यापारियों के लिए बड़ी राहत की खबर सामने आई है। Food Safety and Standards Authority of India ने लाइसेंस और रजिस्ट्रेशन सिस्टम में महत्वपूर्ण बदलाव करते हुए नई अधिसूचना जारी की है। इस बदलाव के तहत थड़ी-ठेलों पर खाद्य सामग्री बेचने वाले छोटे वेंडर्स को सालाना अनुज्ञा पत्र की प्रक्रिया से राहत दी गई है।

इस फैसले से उन लाखों लोगों को सीधा फायदा मिलेगा, जिनकी आजीविका छोटे स्तर पर खाद्य सामग्री बेचने पर निर्भर है।

रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया हुई आसान

नई व्यवस्था के तहत वर्ष 2014 से पहले रजिस्टर्ड स्ट्रीट वेंडर्स को अब दोबारा रजिस्ट्रेशन कराने की आवश्यकता नहीं होगी। वहीं 2014 के बाद रजिस्टर्ड वेंडर्स के लिए भी केवल एक बार रजिस्ट्रेशन अनिवार्य किया गया है। इसके बाद उन्हें हर साल सिर्फ 100 रुपये शुल्क देकर रजिस्ट्रेशन का नवीनीकरण कराना होगा।

इस बदलाव से पहले वेंडर्स को हर साल लाइसेंस रिन्यू कराना पड़ता था, जिससे उन्हें बार-बार कागजी कार्यवाही और सरकारी प्रक्रियाओं से गुजरना पड़ता था। अब इस प्रक्रिया को सरल बनाकर उनके समय और खर्च दोनों में कमी लाई गई है।

टर्नओवर सीमा में बड़ा बदलाव

खाद्य व्यवसाय से जुड़े दुकानदारों और फैक्ट्री संचालकों को भी इस नई नीति से राहत मिली है। सरकार ने स्टेट और सेंट्रल लाइसेंसिंग के लिए टर्नओवर की सीमा को बढ़ा दिया है। पहले यह सीमा 12 लाख से 20 करोड़ रुपये तक थी, जिसे अब बढ़ाकर 1.5 करोड़ से 50 करोड़ रुपये कर दिया गया है।

इस बदलाव से छोटे और मध्यम स्तर के व्यापारियों को लाइसेंस संबंधी जटिलताओं से राहत मिलेगी और वे अपने व्यवसाय को अधिक आसानी से संचालित कर सकेंगे।

व्यापारिक संगठनों की मांग पर लिया गया फैसला

इस फैसले का स्वागत व्यापारिक संगठनों ने किया है। Babulal Gupta, जो भारतीय उद्योग व्यापार मंडल के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं, ने बताया कि इस विषय में लंबे समय से संशोधन की मांग की जा रही थी।

उन्होंने कहा कि JP Nadda ने इस मांग को स्वीकार करते हुए आदेश जारी किया है, जिससे करोड़ों स्ट्रीट वेंडर्स, दुकानदारों और फैक्ट्री संचालकों को लाभ मिलेगा।

नई व्यवस्था की शर्तें और नियम

हालांकि लाइसेंस प्रक्रिया को सरल किया गया है, लेकिन कुछ आवश्यक शर्तें भी निर्धारित की गई हैं। अब लाइसेंस को बार-बार रिन्यू कराने की जरूरत नहीं होगी, लेकिन वार्षिक शुल्क समय पर जमा करना अनिवार्य होगा। साथ ही हर साल 31 मई तक वार्षिक रिटर्न दाखिल करना भी जरूरी रहेगा।

यदि कोई व्यापारी समय पर शुल्क या रिटर्न जमा नहीं करता है, तो उसका लाइसेंस निलंबित माना जाएगा। इसके अलावा अधिकारी बिना पूर्व सूचना के जोखिम आधारित निरीक्षण भी कर सकते हैं और नियमों के उल्लंघन की स्थिति में लाइसेंस रद्द किया जा सकता है।

पहले की जटिल प्रक्रिया से मिली राहत

पहले के नियमों के तहत छोटे स्ट्रीट वेंडर्स को भी हर साल अलग से रजिस्ट्रेशन कराना पड़ता था, साथ ही नगर निगम या टाउन वेंडिंग कमेटी से अलग अनुमति लेना अनिवार्य था। इस दोहरी प्रक्रिया के कारण समय और धन दोनों की बर्बादी होती थी।

कई वेंडर्स नियमों की जानकारी के अभाव में जुर्माने का सामना भी करते थे, जिससे उनकी रोजी-रोटी प्रभावित होती थी। नई व्यवस्था से इस समस्या का समाधान होने की उम्मीद है।

आजीविका और कारोबार को मिलेगा बढ़ावा

कुल मिलाकर, यह बदलाव छोटे व्यापारियों और स्ट्रीट वेंडर्स के लिए राहत भरा कदम माना जा रहा है। इससे न केवल उनकी प्रशासनिक परेशानियां कम होंगी, बल्कि वे अपने व्यवसाय पर अधिक ध्यान केंद्रित कर सकेंगे।

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