राजस्थान सरकार ने राज्य को देश के प्रमुख औद्योगिक केंद्र के रूप में विकसित करने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। सरकार की इंडस्ट्रियल पार्क प्रोत्साहन नीति-2026 के तहत अब प्रदेश में बड़े स्तर पर नए इंडस्ट्रियल पार्क विकसित किए जाएंगे। इस योजना के जरिए राजस्थान में उद्योगों के लिए आधुनिक सुविधाओं से लैस औद्योगिक क्षेत्र तैयार किए जाएंगे, जिससे निवेश बढ़ाने, रोजगार के नए अवसर पैदा करने और औद्योगिक विकास को गति देने में मदद मिलेगी। इस महत्वाकांक्षी योजना के तहत राजस्थान राज्य औद्योगिक विकास एवं निवेश निगम यानी रीको ने प्रदेश के 9 अलग-अलग स्थानों पर करीब 645 हेक्टेयर जमीन चिन्हित की है, जहां नए इंडस्ट्रियल पार्क स्थापित किए जाएंगे। इन पार्कों को विकसित करने के लिए प्राइवेट डेवलपर्स की भागीदारी सुनिश्चित की जाएगी।
राज्य सरकार की इस नई नीति का उद्देश्य राजस्थान को भविष्य के औद्योगिक निवेश के लिए पूरी तरह तैयार करना है। मुख्यमंत्री भजन लाल शर्मा ने 18 मार्च 2026 को इंडस्ट्रियल पार्क प्रोत्साहन नीति-2026 का अनावरण किया था। इसके बाद अब रीको ने इस नीति को जमीन पर उतारने की दिशा में काम शुरू कर दिया है। आवेदन प्रक्रिया 1 जून से शुरू होगी और इसके तहत निजी कंपनियों तथा डेवलपर्स को औद्योगिक पार्क विकसित करने का मौका दिया जाएगा। सरकार का मानना है कि प्राइवेट सेक्टर की भागीदारी से आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर और बेहतर लॉजिस्टिक सुविधाओं का तेजी से विकास किया जा सकेगा।
रीको के प्रबंध निदेशक सुरेश ओला के अनुसार नीति के तहत सबसे पहले मॉडल ‘ए’ और मॉडल ‘डी’ के जरिए इंडस्ट्रियल पार्क विकसित करने की प्रक्रिया शुरू की जा रही है। मॉडल ‘ए’ के तहत रीको अपनी जमीन उपलब्ध कराएगा और उस जमीन पर प्राइवेट डेवलपर्स इंडस्ट्रियल पार्क तैयार करेंगे। इस मॉडल में करीब 374 हेक्टेयर जमीन शामिल की गई है। यह जमीन प्रदेश के कई जिलों में फैली हुई है। बालोतरा जिले के वेदरलाई गांव में 58 हेक्टेयर जमीन, धौलपुर के बिजौली गांव में 38 हेक्टेयर, चित्तौड़गढ़ के नरबदिया गांव में 23 हेक्टेयर और भीलवाड़ा के कोड़िया गांव में 21 हेक्टेयर जमीन चिन्हित की गई है। इसके अलावा दौसा जिले के राजाहेड़ा, गूढ़ा आशिकपुरा और नूरपुर गांव में सबसे अधिक 135 हेक्टेयर जमीन रखी गई है। बूंदी जिले के मायेजा गांव में 27 हेक्टेयर और डीडवाना-कुचामन जिले के भाकरी मोलास गांव में 72 हेक्टेयर जमीन पर भी औद्योगिक पार्क विकसित किए जाएंगे।
वहीं मॉडल ‘डी’ के तहत इंडस्ट्रियल पार्कों का विकास पीपीपी यानी पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप मोड पर किया जाएगा। इस मॉडल में करीब 271 हेक्टेयर जमीन शामिल है। अजमेर जिले के कनईकलां गांव में 107 हेक्टेयर जमीन और दौसा जिले के कोटवालों का बास, नांगल झामरवाड़ा, रालतवाता और सुधरामपाड़ा गांव में करीब 164 हेक्टेयर जमीन पर इंडस्ट्रियल पार्क विकसित करने की योजना बनाई गई है। सरकार का मानना है कि पीपीपी मॉडल के जरिए निजी क्षेत्र की विशेषज्ञता और सरकारी संसाधनों का बेहतर उपयोग किया जा सकेगा।
इंडस्ट्रियल पार्क प्रोत्साहन नीति-2026 को चार अलग-अलग मॉडल में लागू किया जाएगा, ताकि निवेशकों और डेवलपर्स को अपनी क्षमता और संसाधनों के अनुसार विकल्प मिल सकें। मॉडल ‘ए’ में रीको जमीन देगा और डेवलपर पार्क विकसित करेगा। मॉडल ‘बी’ में 80 प्रतिशत जमीन डेवलपर और 20 प्रतिशत जमीन रीको उपलब्ध कराएगा। मॉडल ‘सी’ में पूरी जमीन डेवलपर की होगी और वह खुद इंडस्ट्रियल पार्क विकसित करेगा। वहीं मॉडल ‘डी’ पूरी तरह पीपीपी मॉडल पर आधारित रहेगा। सरकार ने इस नीति को लचीला और निवेशकों के अनुकूल बनाने का प्रयास किया है ताकि अधिक से अधिक कंपनियां राजस्थान में निवेश के लिए आगे आएं।
नई नीति में यह भी तय किया गया है कि प्राइवेट सेक्टर में विकसित होने वाले इंडस्ट्रियल पार्क का क्षेत्रफल कम से कम 50 एकड़ होना जरूरी होगा। इसके साथ ही पार्क में न्यूनतम 10 औद्योगिक इकाइयों की स्थापना अनिवार्य होगी। सरकार का उद्देश्य केवल जमीन आवंटित करना नहीं बल्कि वास्तविक औद्योगिक गतिविधियों को बढ़ावा देना है। इससे उत्पादन क्षमता बढ़ेगी और स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर भी तैयार होंगे।
राजस्थान पहले से ही खनिज, टेक्सटाइल, सीमेंट, सोलर एनर्जी और ऑटोमोबाइल सेक्टर में तेजी से उभरता हुआ राज्य माना जाता है। अब नई इंडस्ट्रियल पार्क नीति के जरिए सरकार राज्य को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय निवेशकों के लिए आकर्षक औद्योगिक गंतव्य बनाना चाहती है। आधुनिक सड़क, बिजली, पानी, वेयरहाउसिंग और लॉजिस्टिक सुविधाओं के विकास से उद्योगों की लागत कम होगी और कारोबार करना आसान बनेगा।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह नीति प्रभावी ढंग से लागू होती है तो राजस्थान में आने वाले वर्षों में बड़े पैमाने पर निवेश देखने को मिल सकता है। इससे न केवल औद्योगिक उत्पादन बढ़ेगा बल्कि हजारों युवाओं को रोजगार भी मिलेगा। राज्य सरकार की यह पहल राजस्थान की अर्थव्यवस्था को मजबूत करने और औद्योगिक विकास को नई दिशा देने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।


