मनीषा शर्मा। राजस्थान सरकार ने रविवार को भारतीय पुलिस सेवा (IPS) के चार अधिकारियों के तबादले कर दिए हैं। इसके साथ ही छह ट्रेनी आईपीएस अधिकारियों को भी पहली बार पोस्टिंग दी गई है। राज्य सरकार के इस निर्णय से जयपुर और जोधपुर पुलिस कमिश्नरेट समेत कई जिलों में जिम्मेदारियों का फेरबदल हुआ है। इन तबादलों को प्रशासनिक दृष्टि से बेहद अहम माना जा रहा है, क्योंकि हाल के दिनों में कानून-व्यवस्था को लेकर सरकार पर दबाव बढ़ा है।
जयपुर कमिश्नरेट में इस बार दो अधिकारियों की तैनाती की गई है। जोधपुर कमिश्नरेट में एसीपी के पद पर तैनात हेमंत कलाल को अब जयपुर कमिश्नरेट में एडिशनल डीसीपी (ईस्ट) बनाया गया है। वहीं पाली में एएसपी के पद पर सेवाएं दे रहीं आईपीएस उषा यादव को जयपुर कमिश्नरेट में एसीपी (चौमूं) पद पर नियुक्त किया गया है। इन दोनों अधिकारियों की तैनाती जयपुर कमिश्नरेट के लिए विशेष रूप से महत्वपूर्ण मानी जा रही है, क्योंकि यहां कानून-व्यवस्था की चुनौतियां लगातार बढ़ रही हैं।
जालोर के सांचौर में पदस्थापित आईपीएस कांबले शरण गोपीनाथ को अलवर शहर भेजा गया है, जहां उन्हें एडिशनल एसपी की जिम्मेदारी सौंपी गई है। वहीं सीकर के नीमकाथाना में पदस्थ आईपीएस रोशन मीणा को जोधपुर कमिश्नरेट में एडिशनल डीसीपी (वेस्ट) नियुक्त किया गया है। इससे साफ है कि जोधपुर और जयपुर जैसे बड़े शहरों में अब अनुभवी अधिकारियों को जिम्मेदारी दी जा रही है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था मजबूत की जा सके।
सरकार ने ट्रेनी आईपीएस अधिकारियों को भी पहली बार जिम्मेदारी सौंपकर उन्हें अनुभव हासिल करने का अवसर दिया है। अजय सिंह राठौर, आशिमा वासवानी, पाटिल अभिजीत तुलसीराम, जतिन जैन, माधव उपाध्याय और प्रतीक सिंह को उनकी ट्रेनिंग पूरी होने के बाद अलग-अलग स्थानों पर पोस्टिंग दी गई है। इन अधिकारियों से अपेक्षा है कि वे अपने क्षेत्र में अनुशासन और सेवा भाव से काम करेंगे।
हेमंत कलाल फिर चर्चा में
जिन अधिकारियों के तबादले हुए हैं, उनमें आईपीएस हेमंत कलाल का नाम खास तौर पर सुर्खियों में है। हेमंत कलाल उस समय चर्चा में आए थे जब वे जोधपुर में तैनात रहते हुए अपनी टीम के साथ सेंट्रल जेल का औचक निरीक्षण करने पहुंचे थे। लेकिन जेल इंस्पेक्टर ने जेल एसपी के मौके पर नहीं होने का हवाला देकर उन्हें एंट्री देने से इनकार कर दिया था। इस घटना को लेकर काफी विवाद हुआ और उन्होंने जोधपुर पुलिस कमिश्नर सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारियों को इस संबंध में शिकायत भी भेजी थी।
करीब पांच महीने पहले हेमंत कलाल पर पद के दुरुपयोग के आरोप लगाते हुए राजस्थान हाईकोर्ट में एक याचिका भी दर्ज की गई थी। हालांकि मामला अभी न्यायालय में विचाराधीन है, लेकिन इसके बावजूद उन्हें जयपुर जैसे संवेदनशील कमिश्नरेट में एडिशनल डीसीपी (ईस्ट) के रूप में जिम्मेदारी मिलना चर्चा का विषय बना हुआ है।
प्रशासनिक दृष्टि से अहम बदलाव
राजस्थान सरकार द्वारा किए गए ये तबादले सामान्य प्रक्रिया का हिस्सा जरूर हैं, लेकिन इनमें जयपुर और जोधपुर जैसे बड़े शहरों पर खास ध्यान दिया गया है। जयपुर कमिश्नरेट में बढ़ती जनसंख्या, ट्रैफिक प्रबंधन और अपराध नियंत्रण जैसी चुनौतियां हैं, वहीं जोधपुर में भी हाल के दिनों में कई आपराधिक घटनाओं ने पुलिस पर दबाव बढ़ाया है। ऐसे में इन पदों पर नए अधिकारियों की नियुक्ति से प्रशासन को राहत मिलने की उम्मीद है।
अलवर, सीकर और जालोर जैसे जिलों में भी इन तबादलों का सीधा असर पड़ेगा। स्थानीय स्तर पर पुलिस व्यवस्था को और बेहतर बनाने की दिशा में यह कदम अहम माना जा रहा है। वहीं ट्रेनी अधिकारियों की नियुक्ति से यह भी स्पष्ट होता है कि सरकार नई पीढ़ी के पुलिस अधिकारियों को जिम्मेदारी देकर उन्हें व्यवहारिक अनुभव दिलाने की दिशा में काम कर रही है।


