मनीषा शर्मा। जयपुर के प्रतिष्ठित नीरजा मोदी स्कूल में छात्रा द्वारा चौथी मंजिल से कूदकर आत्महत्या करने की दर्दनाक घटना ने पूरे राज्य को झकझोर दिया है। इस मामले में राजस्थान के शिक्षा मंत्री मदन दिलावर ने सख्त रुख अपनाते हुए कहा है कि अगर स्कूल प्रशासन ने शिक्षा विभाग की जांच में बाधा डालने की कोशिश की है, तो स्कूल को इसके गंभीर परिणाम भुगतने होंगे। उन्होंने स्पष्ट किया कि सरकार किसी भी दबाव में नहीं आएगी और दोषियों के खिलाफ कठोरतम कार्रवाई की जाएगी।
शिक्षा मंत्री का बयान: “स्कूल प्रशासन ने जांच रोकी तो परिणाम भुगतेगा”
शिक्षा मंत्री मदन दिलावर ने शनिवार को इस पूरे मामले पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि नीरजा मोदी स्कूल जैसी प्रतिष्ठित संस्था में ऐसा हादसा होना बेहद दुखद और चिंताजनक है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार इस मामले की हर पहलू से गहराई से जांच करवा रही है। दिलावर ने कहा, “अगर यह सिद्ध होता है कि स्कूल प्रशासन ने शिक्षा विभाग के अधिकारियों को जांच से रोकने की कोशिश की है, तो स्कूल को इसके गंभीर परिणाम भुगतने पड़ेंगे। किसी भी व्यक्ति या संस्था को जांच में बाधा डालने का अधिकार नहीं है। सरकार किसी भी प्रकार के प्रभाव या दबाव में नहीं आने वाली।”
एनओसी और सीबीएसई मान्यता पर भी उठे सवाल
मदन दिलावर ने इस घटना के बाद स्कूल की मान्यता प्रक्रिया पर भी सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि सरकार जांच कर रही है कि आखिर स्कूल को किस नियम के तहत एनओसी (अनापत्ति प्रमाण पत्र) जारी की गई थी और सीबीएसई ने उसे मान्यता किन आधारों पर दी। दिलावर ने कहा कि राज्य सरकार यह सुनिश्चित करेगी कि आगे से किसी भी निजी स्कूल को बिना सभी मानकों के पूरा किए मान्यता न दी जाए।
सरकार की सख्त मंशा: “किसी को नहीं बख्शा जाएगा”
मंत्री ने कहा कि राज्य सरकार इस घटना को गंभीर लापरवाही के रूप में देख रही है। उन्होंने कहा कि सरकार का उद्देश्य किसी को निशाना बनाना नहीं है, बल्कि शिक्षा संस्थानों की जिम्मेदारी तय करना है। दिलावर ने कहा, “हम चाहते हैं कि यह मामला नजीर बने। अगर किसी ने नियमों की अनदेखी की, बच्चों की सुरक्षा में लापरवाही बरती या जांच में बाधा डाली, तो भविष्य में ऐसी संस्थाओं के खिलाफ होने वाली कार्रवाई देखने लायक होगी।”
पीड़ित परिवार से मिले शिक्षा मंत्री
शिक्षा मंत्री मदन दिलावर ने रविवार को पीड़ित छात्रा के परिजनों से मुलाकात की और संवेदना व्यक्त की। उन्होंने बताया कि परिजनों से हुई बातचीत में जो भी तथ्य सामने आए हैं, उन्हें भी जांच का हिस्सा बनाया जाएगा। दिलावर ने कहा, “यह घटना बेहद दर्दनाक है। परिजनों ने कई अहम बातें बताई हैं, जिन्हें अब जांच एजेंसियां सत्यापित करेंगी। सरकार इस पूरे मामले की सच्चाई सामने लाएगी और न्याय सुनिश्चित करेगी।”
संयुक्त जांच टीम कर रही है काम
इस मामले की जांच शिक्षा विभाग और सीबीएसई की संयुक्त टीम कर रही है। टीम ने स्कूल प्रशासन से सभी जरूरी दस्तावेज, सुरक्षा व्यवस्था और स्टाफ डिटेल मांगी हैं। सरकारी सूत्रों के अनुसार, जांच रिपोर्ट शिक्षा मंत्री को जल्द सौंपी जाएगी, जिसके बाद दोषियों के खिलाफ कार्रवाई तय की जाएगी। रिपोर्ट में यह भी देखा जाएगा कि स्कूल ने सुरक्षा मानकों और विभागीय गाइडलाइन का पालन किया था या नहीं।
वीडियो सामने आने के बाद बढ़ा विवाद
1 नवंबर (शनिवार) को हुई इस घटना का एक सीसीटीवी वीडियो भी सामने आया है, जिसमें छात्रा को चौथी मंजिल से कूदते हुए देखा गया। वीडियो वायरल होने के बाद लोगों में गुस्सा फैल गया और सोशल मीडिया पर स्कूल प्रशासन की लापरवाही को लेकर तीखी प्रतिक्रियाएं सामने आईं। कई अभिभावक संगठनों ने भी मांग की है कि राज्य सरकार इस घटना को उदाहरण बनाते हुए निजी स्कूलों के संचालन की नीतियों की समीक्षा करे।
शिक्षा मंत्री ने सभी निजी स्कूलों को चेतावनी दी
मदन दिलावर ने स्पष्ट कहा कि यह मामला केवल नीरजा मोदी स्कूल तक सीमित नहीं है, बल्कि यह राजस्थान के सभी निजी स्कूलों के लिए चेतावनी है। उन्होंने कहा, “सभी निजी स्कूलों को शिक्षा विभाग की गाइडलाइन के अनुरूप ही संचालन करना होगा। यदि किसी भी स्कूल ने सुरक्षा मानकों या विभागीय निर्देशों की अवहेलना की, तो उसके खिलाफ नियमों के तहत सख्त कार्रवाई होगी।” उन्होंने आगे कहा कि स्कूलों को बच्चों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देनी होगी। कोई भी स्कूल यदि विभागीय जांच से बचने या दबाव डालने की कोशिश करेगा, तो उसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई और मान्यता रद्द तक की प्रक्रिया शुरू की जा सकती है।
सरकार बनाएगी जवाबदेही प्रणाली
राज्य सरकार इस घटना को देखते हुए निजी स्कूलों के संचालन में अधिक जवाबदेही और पारदर्शिता लाने पर विचार कर रही है। शिक्षा विभाग अब सभी निजी स्कूलों की एनओसी, मान्यता और सुरक्षा व्यवस्था की नियमित समीक्षा करेगा। मदन दिलावर ने कहा कि सरकार यह सुनिश्चित करेगी कि किसी भी बच्चे की सुरक्षा के साथ कोई समझौता न हो। उन्होंने कहा, “हम चाहते हैं कि भविष्य में ऐसी कोई घटना दोबारा न हो और हर स्कूल बच्चों की सुरक्षा के प्रति पूरी तरह जिम्मेदार हो।”


