राजस्थान से जुड़े राज्यसभा सांसद नीरज डांगी ने बुधवार को राज्यसभा में अरावली पर्वत श्रृंखलाओं में हो रहे अवैध खनन और तेजी से बढ़ रहे वन कटाव का गंभीर मुद्दा उठाया। उन्होंने सदन का ध्यान इस ओर आकर्षित करते हुए कहा कि देश की सबसे प्राचीन पर्वत श्रृंखलाओं में शामिल अरावली लगातार क्षरण का सामना कर रही है, लेकिन इसके बावजूद रोकथाम के लिए पर्याप्त कदम नहीं उठाए जा रहे हैं।
सांसद ने पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन से जुड़े मुद्दों पर चर्चा के दौरान कहा कि स्थिति की वास्तविकता सामने आने के बावजूद केंद्र सरकार की ओर से ठोस कार्रवाई नहीं किए जाने से चिंता की स्थिति बनी हुई है। उनके अनुसार यदि समय रहते प्रभावी कदम नहीं उठाए गए तो इसका असर केवल राजस्थान ही नहीं बल्कि पूरे उत्तर भारत के पर्यावरण और जलवायु संतुलन पर पड़ेगा।
अवैध खनन से पहाड़ियों के गायब होने का दावा
सदन में अपने वक्तव्य के दौरान नीरज डांगी ने कहा कि अरावली पर्वत श्रृंखलाओं में लंबे समय से अवैध खनन की गतिविधियां जारी हैं, जिसके कारण कई पहाड़ियां पूरी तरह से खत्म हो चुकी हैं। उन्होंने दावा किया कि उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार अरावली क्षेत्र में मौजूद 128 पहाड़ियों में से 31 पहाड़ियां पूरी तरह गायब हो चुकी हैं।
उन्होंने कहा कि खनन गतिविधियों के कारण कई अन्य पहाड़ियों में भी दरारें पड़ने लगी हैं और उनका प्राकृतिक स्वरूप तेजी से नष्ट हो रहा है। इसके साथ ही वन क्षेत्र में लगातार कटाव हो रहा है, जिससे पर्यावरणीय संतुलन प्रभावित हो रहा है। डांगी ने कहा कि यदि इस प्रकार की गतिविधियों को रोकने के लिए सख्त कदम नहीं उठाए गए तो आने वाले वर्षों में अरावली की स्थिति और अधिक गंभीर हो सकती है।
प्रदूषण नियंत्रण को लेकर भी उठाए सवाल
सांसद ने अपने वक्तव्य में वायु प्रदूषण की समस्या को भी गंभीर बताते हुए कहा कि राजस्थान के अधिकांश शहरों में प्रदूषण का स्तर लगातार बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि National Ambient Air Quality Standards की रिपोर्ट के बावजूद पीएम2.5 को नियंत्रित करने के लिए प्रभावी कदम नहीं उठाए जा रहे हैं। उनके अनुसार राज्य के 34 शहरों में से 33 शहरों में प्रदूषण का स्तर तय मानकों से ऊपर है। यह स्थिति वहां रहने वाले लोगों के स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा बनती जा रही है।
उन्होंने कहा कि औद्योगिक और शहरी क्षेत्रों में प्रदूषण की स्थिति और भी चिंताजनक है। उदाहरण के तौर पर भिवाड़ी देश के सबसे प्रदूषित शहरों में शामिल है, जबकि श्री गंगानगर और हनुमानगढ़ जैसे शहर दुनिया के सबसे प्रदूषित शहरों की सूची में गिने जाते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि जयपुर, जोधपुर, कोटा, उदयपुर और अलवर जैसे बड़े शहरों में बच्चे खुले वातावरण में खेलते हुए भी प्रदूषित हवा में सांस लेने को मजबूर हैं।
अरावली के पर्यावरणीय महत्व पर जोर
नीरज डांगी ने अरावली पर्वत श्रृंखला के पर्यावरणीय महत्व को रेखांकित करते हुए कहा कि यह लगभग दो अरब वर्ष पुरानी पर्वत श्रृंखला है और दुनिया की सबसे प्राचीन पर्वत श्रंखलाओं में से एक मानी जाती है। इसकी लंबाई करीब 670 किलोमीटर तक फैली हुई है और यह राजस्थान से लेकर हरियाणा और दिल्ली तक फैली हुई है।
उन्होंने कहा कि अरावली श्रृंखला का अस्तित्व केवल भौगोलिक दृष्टि से ही नहीं बल्कि पर्यावरणीय संतुलन के लिए भी अत्यंत महत्वपूर्ण है। यह श्रृंखला थार मरुस्थल के विस्तार को रोकने में मदद करती है और मानसूनी हवाओं को रोककर वर्षा की प्रक्रिया को प्रभावित करती है।
सांसद ने चेतावनी दी कि यदि अरावली का क्षरण इसी तरह जारी रहा तो पूर्वी राजस्थान में वर्षा में कमी आ सकती है। इसका सीधा असर कृषि उत्पादन पर पड़ेगा और भूजल स्तर और अधिक नीचे जा सकता है। इसके अलावा धूल भरी आंधियों की संख्या बढ़ सकती है, जो दिल्ली तक पहुंचकर वहां के पर्यावरण को भी प्रभावित कर सकती हैं।
सोनिया गांधी की चिंता का उल्लेख
अपने वक्तव्य के दौरान नीरज डांगी ने कांग्रेस संसदीय दल की अध्यक्ष सोनिया गांधी द्वारा पर्यावरण संरक्षण को लेकर व्यक्त की गई चिंताओं का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि सोनिया गांधी ने अपने एक लेख में निकोबार मेगा इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट को लेकर गंभीर सवाल उठाए थे। इस परियोजना की अनुमानित लागत लगभग 72 हजार करोड़ रुपये बताई जाती है और इसके कारण वहां के आदिवासी समुदायों के अस्तित्व पर खतरा उत्पन्न हो सकता है। डांगी के अनुसार यह परियोजना प्राकृतिक पारिस्थितिकी तंत्र को भी प्रभावित कर सकती है और कई कानूनी प्रक्रियाओं को नजरअंदाज करते हुए इसे आगे बढ़ाया जा रहा है।
वायु प्रदूषण और स्वास्थ्य पर अध्ययन का हवाला
सांसद डांगी ने अपने वक्तव्य में विभिन्न अंतरराष्ट्रीय अध्ययनों का भी उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि The Lancet Planetary Health में दिसंबर 2024 में प्रकाशित एक अध्ययन के अनुसार पीएम2.5 में हर 10 माइक्रोग्राम की वृद्धि से मृत्यु दर में लगभग 8.6 प्रतिशत तक वृद्धि हो सकती है। उन्होंने कहा कि वर्ष 2025 के लैसेंट काउंटडाउन के अनुसार भारत में हर साल लगभग 17.2 लाख लोगों की मौत वायु प्रदूषण से जुड़ी समस्याओं के कारण होती है। यह आंकड़ा वर्ष 2010 की तुलना में लगभग 38 प्रतिशत अधिक बताया गया है।
सांसद के अनुसार दुनिया भर में वायु प्रदूषण से होने वाली मौतों में भारत का हिस्सा लगभग 70 प्रतिशत बताया गया है और इसकी आर्थिक लागत करीब 30 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच सकती है, जो देश के सकल घरेलू उत्पाद का लगभग 9.5 प्रतिशत है।
पर्यावरणीय मुद्दों पर गंभीर कदम उठाने की मांग
नीरज डांगी ने कहा कि अरावली पर्वत श्रृंखला का संरक्षण केवल एक पर्यावरणीय मुद्दा नहीं बल्कि भविष्य की पीढ़ियों के लिए प्राकृतिक संसाधनों को सुरक्षित रखने का सवाल है। उन्होंने सरकार से आग्रह किया कि अवैध खनन को रोकने, वन कटाव पर नियंत्रण करने और वायु प्रदूषण को कम करने के लिए ठोस और प्रभावी कदम उठाए जाएं। उन्होंने यह भी कहा कि पर्यावरण से जुड़े विभिन्न संस्थानों और शोध रिपोर्टों की चेतावनियों को नजरअंदाज करना देश के लिए गंभीर परिणाम पैदा कर सकता है। ऐसे में आवश्यक है कि अरावली और वायु प्रदूषण जैसे मुद्दों पर व्यापक नीति बनाकर प्रभावी कार्रवाई की जाए ताकि पर्यावरणीय संतुलन को बचाया जा सके।


