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NCERT और UGC मिलकर तैयार करेंगे नया कोर्स: अब स्कूल-कॉलेज में पढ़ाया जाएगा आयुर्वेद

NCERT और UGC मिलकर तैयार करेंगे नया कोर्स: अब स्कूल-कॉलेज में पढ़ाया जाएगा आयुर्वेद

मनीषा शर्मा।  भारत की प्राचीन चिकित्सा पद्धति आयुर्वेद अब केवल परंपरा या वैकल्पिक चिकित्सा तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि इसे स्कूल और कॉलेजों की हेल्थ एजुकेशन में शामिल करने की तैयारी चल रही है। केंद्रीय आयुष मंत्री प्रतापराव जाधव ने जानकारी दी कि NCERT (नेशनल काउंसिल ऑफ एजुकेशनल रिसर्च एंड ट्रेनिंग) और UGC (यूनिवर्सिटी ग्रांट्स कमीशन) मिलकर ऐसा कोर्स मॉड्यूल तैयार कर रहे हैं, जो स्कूली और उच्च शिक्षा दोनों स्तरों पर लागू होगा। मंत्री ने बताया कि इस कदम का उद्देश्य नई पीढ़ी को भारत की पारंपरिक चिकित्सा प्रणाली और स्वास्थ्य के प्राचीन ज्ञान से जोड़ना है। गोवा, मध्य प्रदेश, उत्तराखंड और उत्तर प्रदेश जैसे कुछ राज्य पहले ही भारतीय ज्ञान प्रणाली को स्कूल शिक्षा का हिस्सा बना चुके हैं।

CCRAS कर रहा है क्लिनिकल ट्रायल

केंद्रीय आयुष मंत्री ने यह भी कहा कि सरकार आयुर्वेद को और अधिक वैज्ञानिक और प्रमाणिक रूप देने के लिए काम कर रही है। इसके लिए केंद्रीय आयुर्वेदिक विज्ञान अनुसंधान परिषद (CCRAS) और अन्य संस्थानों के माध्यम से उच्च गुणवत्ता वाले क्लिनिकल ट्रायल किए जा रहे हैं। इन ट्रायल्स का उद्देश्य यह साबित करना है कि आयुर्वेदिक दवाएं और उपचार वैज्ञानिक रूप से भी कारगर हैं।

इसके अलावा, WHO (विश्व स्वास्थ्य संगठन) के साथ मिलकर आयुर्वेदिक उपचारों के मानक तय किए जा रहे हैं। इससे वैश्विक स्तर पर आयुर्वेद की स्वीकार्यता बढ़ेगी और इसे आधुनिक चिकित्सा के साथ समन्वय कर स्वास्थ्य सेवाओं में और सुधार किया जा सकेगा।

आयुर्वेद और एलोपैथी: प्रतियोगिता नहीं, पूरक

आयुष मंत्री प्रतापराव जाधव ने स्पष्ट किया कि आयुर्वेद का उद्देश्य एलोपैथी से प्रतिस्पर्धा करना नहीं है। उन्होंने कहा कि आधुनिक चिकित्सा (Allopathy) और आयुष चिकित्सा प्रणाली एक-दूसरे की पूरक हैं, न कि प्रतियोगी। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि नेशनल आयुष मिशन (NAM) और आयुष ग्रिड जैसी पहलों के माध्यम से दोनों प्रणालियों को एकीकृत किया जा रहा है, ताकि लोगों को बेहतर और अधिक प्रभावी स्वास्थ्य सेवाएं मिल सकें।

कब से बदलेगा सिलेबस?

हालांकि अभी तक यह तय नहीं हुआ है कि नया आयुर्वेद कोर्स कब से लागू होगा, लेकिन यह संभावना जताई जा रही है कि अगले शैक्षणिक सत्र से इसे स्कूली किताबों का हिस्सा बना दिया जाएगा। NCERT की ओर से हर साल सिलेबस की समीक्षा की जाती है और जरूरत पड़ने पर बदलाव किए जाते हैं। इसी वजह से संभावना है कि जल्द ही छात्रों को स्वास्थ्य शिक्षा के हिस्से के रूप में आयुर्वेद का पाठ्यक्रम पढ़ने को मिल सकता है।

NCERT की किताबों में लगातार हो रहे बदलाव

गौरतलब है कि पिछले साल शिक्षा मंत्रालय ने यह घोषणा की थी कि NCERT की किताबों का सिलेबस हर साल रिव्यू किया जाएगा, ताकि छात्रों को समयानुकूल शिक्षा दी जा सके। इस साल ही NCERT ने कक्षा 7वीं की हिस्ट्री और जियोग्राफी की किताबों में बड़े बदलाव किए हैं। इसमें मुगल सल्तनत और दिल्ली सल्तनत से जुड़े टॉपिक हटा दिए गए हैं। वहीं, महाकुंभ, मेक इन इंडिया और बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ जैसे विषयों को किताबों में जोड़ा गया है। कोविड-19 महामारी के दौरान भी NCERT ने कई हिस्सों को हटाया था, जिनमें तुगलक, खिलजी, लोधी और मुगलों की उपलब्धियों से जुड़े अध्याय शामिल थे। अब इन टॉपिक्स को किताबों से पूरी तरह हटा दिया गया है।

आयुर्वेद को शामिल करने से क्या होगा फायदा?

  1. प्राचीन भारतीय ज्ञान प्रणाली का संरक्षण – छात्रों को आयुर्वेद और योग जैसे विषयों से परिचय मिलेगा।

  2. स्वास्थ्य जागरूकता में वृद्धि – विद्यार्थी छोटी बीमारियों के घरेलू और प्राकृतिक उपचार जान सकेंगे।

  3. वैज्ञानिक दृष्टिकोण – क्लिनिकल ट्रायल और WHO मानकों के कारण आयुर्वेद को वैज्ञानिक आधार मिलेगा।

  4. करियर के नए अवसर – हेल्थकेयर और आयुर्वेद रिसर्च के क्षेत्र में युवाओं के लिए नए अवसर खुलेंगे।

  5. आधुनिक और पारंपरिक चिकित्सा का समन्वय – एलोपैथी और आयुर्वेद दोनों को साथ मिलाकर बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं दी जा सकेंगी।

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