होली का त्योहार रंगों, उत्साह और मेलजोल का प्रतीक है, लेकिन अक्सर बाजार में मिलने वाले केमिकलयुक्त रंग त्वचा और बालों पर बुरा प्रभाव डालते हैं। ऐसे में प्राकृतिक, घर पर बने रंगों का चलन तेजी से बढ़ रहा है। फूलों से गुलाल तैयार करने का तरीका न केवल सुरक्षित है बल्कि इसकी खुशबू और मुलायम बनावट आपकी होली को और भी खास बना सकती है। यह गुलाल बच्चों, बुजुर्गों और संवेदनशील त्वचा वालों के लिए भी पूरी तरह उपयुक्त माना जाता है।
गेंदे के फूल से प्राकृतिक पीला गुलाल
प्राकृतिक पीला गुलाल बनाने के लिए सबसे पहले ताजे गेंदे के फूलों का चयन किया जाता है। इन फूलों की पंखुड़ियों को सावधानीपूर्वक डंठल से अलग करना आवश्यक है, ताकि उनमें धूल या कीड़ों का कोई अंश न रह जाए। पंखुड़ियों को साफ पानी में अच्छी तरह उबालने की प्रक्रिया से उनका प्राकृतिक रंग पानी में घुल जाता है। धीरे-धीरे यह पानी गाढ़े पीले रंग में परिवर्तित हो जाता है, जो इस गुलाल की मुख्य आधार सामग्री बनता है।
जब यह पीला रंग पूरी तरह पानी में उतर जाए, तो फूलों की पंखुड़ियों को छानकर अलग किया जाता है। इस रंगीन पानी को ठंडा करना अत्यंत आवश्यक चरण है, क्योंकि ठंडा होने के बाद ही इसमें कॉर्नफ्लोर आसानी से और समान रूप से मिल पाता है।
कॉर्नफ्लोर को धीरे-धीरे इस रंगीन पानी में मिलाते हुए लगातार फेंटना चाहिए। यह ध्यान रखना जरूरी है कि इसमें कोई गांठ न बने और रंग पूरी तरह कॉर्नफ्लोर में घुल जाए। यह मिश्रण गाढ़ा और चिकना होना चाहिए, ताकि सूखने के बाद गुलाल की बनावट हल्की और पाउडर जैसी बने।
धूप में सूखाने की प्रक्रिया
तैयार गीले मिश्रण को एक बड़ी प्लेट या ट्रे में फैलाकर धूप या किसी हवादार स्थान पर सूखने के लिए रखा जाता है। लगभग दो दिनों की अवधि में यह मिश्रण सख्त हो जाता है और इसमें मौजूद नमी समाप्त हो जाती है। सूखने के बाद इसे हाथों से तोड़कर एक बारीक छलनी से छाना जाता है। इस प्रक्रिया के बाद जो महीन पाउडर प्राप्त होता है, वही पूरी तरह प्राकृतिक पीला गुलाल है।
विभिन्न फूलों से अलग-अलग रंग
यह तरीका केवल गेंदे के फूलों तक सीमित नहीं है। अन्य फूलों और प्राकृतिक सामग्रियों से भी खूबसूरत रंग तैयार किए जा सकते हैं। गुलाबी या लाल रंग प्राप्त करने के लिए गुलाब की पंखुड़ियों या गुड़हल के फूलों का उपयोग किया जा सकता है। इन्हें पानी में उबालने पर गहरा और सुंदर प्राकृतिक रंग मिलता है जिसे वही प्रक्रिया अपनाकर गुलाल में परिवर्तित किया जा सकता है। नारंगी रंग के लिए पारंपरिक रूप से पलाश के फूल उपयोग में लाए जाते हैं। इन्हें रातभर पानी में भिगोने या उबालने से चमकदार नारंगी रंग तैयार हो जाता है।
मैजेंटा या गहरा गुलाबी रंग चाहने वालों के लिए चुकंदर का रस एक उत्कृष्ट विकल्प है। इसका गाढ़ा रंग कॉर्नफ्लोर में आसानी से मिल जाता है और सूखने के बाद खूबसूरत शेड प्रदान करता है।
खुशबूदार और मुलायम गुलाल का रहस्य
प्राकृतिक गुलाल की खुशबू और बनावट बढ़ाने के लिए मिश्रण तैयार करते समय इसमें चंदन पाउडर या कुछ बूंदें गुलाब जल की मिलाई जा सकती हैं। यह न केवल गुलाल को सुगंधित बनाता है बल्कि त्वचा पर उपयोग के दौरान एक हल्की ठंडक का एहसास भी देता है। तैयार गुलाल को लंबे समय तक उपयोग में लाने के लिए इसे एयर-टाइट कंटेनर में रखना जरूरी है, ताकि नमी इसके टेक्सचर को प्रभावित न कर सके।
क्यों चुनें प्राकृतिक गुलाल
बाजार के कई रंगों में लेड ऑक्साइड, मरकरी और कांच के महीन कण पाए जाते हैं। ये तत्व त्वचा में जलन, एलर्जी और आँखों को नुकसान पहुँचा सकते हैं। इसके विपरीत, फूलों से बने प्राकृतिक रंग पूरी तरह सुरक्षित और पर्यावरण के अनुकूल होते हैं। बच्चों की नाजुक त्वचा पर ये बिना किसी जलन के आसानी से इस्तेमाल किए जा सकते हैं और इन्हें धोना भी बेहद सरल होता है।
प्राकृतिक गुलाल न केवल स्वस्थ विकल्प है, बल्कि यह त्योहार में प्रकृति की सौंधी छाप भी जोड़ता है। अपनी होली को खुशहाल और सुरक्षित बनाने के लिए यह घर पर बनाया गया गुलाल हर दृष्टि से उत्तम विकल्प है।


