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राष्ट्रीय तिरंगा सद्भावना यात्रा अजमेर पहुंची, दरगाह पर शांति और एकता की दुआ

राष्ट्रीय तिरंगा सद्भावना यात्रा अजमेर पहुंची, दरगाह पर शांति और एकता की दुआ

मनीषा शर्मा।  राष्ट्रीय बुनकर एक्शन कमेटी के बैनर तले आयोजित राष्ट्रीय तिरंगा सद्भावना यात्रा बनारस से शुरू होकर रविवार को अजमेर पहुंची, जहां ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती की दरगाह पर चादर पेश कर देश की एकता, अखंडता, समृद्धि और शांति के लिए दुआ मांगी गई। यह यात्रा केवल एक कार्यक्रम नहीं, बल्कि आपसी भाईचारे, धार्मिक सौहार्द और राष्ट्रीय गर्व का सशक्त संदेश लेकर आगे बढ़ रही है।

राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं कार्यक्रम संयोजक सरफराज अहमद ने बताया कि यह यात्रा 22 दिसंबर को बनारस स्टेशन से शिवगंगा ट्रेन द्वारा रवाना हुई। नई दिल्ली पहुंचकर सबसे पहले महात्मा गांधी की समाधि पर सर्वधर्म प्रार्थना सभा आयोजित की गई। यहां सभी धर्मों के प्रतिनिधियों ने एक साथ बैठकर देश में सद्भाव और शांति कायम रहने की प्रार्थना की। इसके बाद इंडिया गेट पर नेताजी सुभाष चंद्र बोस की प्रतिमा, अमर जवान ज्योति और राष्ट्रीय युद्ध स्मारक पर श्रद्धासुमन अर्पित किए गए।

नई दिल्ली प्रवास के दौरान प्रतिनिधिमंडल ने राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री से भी मुलाकात की। सरफराज अहमद ने बताया कि इस मुलाकात में बुनकर समुदाय की समस्याओं के साथ-साथ सद्भावना यात्रा के उद्देश्य पर भी चर्चा की गई। उनका कहना था कि तिरंगा यात्रा का मुख्य लक्ष्य लोगों को याद दिलाना है कि हमारा तिरंगा केवल एक झंडा नहीं, बल्कि हमारी आज़ादी, त्याग, विविधता और भाईचारे का प्रतीक है। दिल्ली के बाद यात्रा पुष्कर पहुंची, जहां ब्रह्मा मंदिर में दर्शन कर देश के विकास और समाज की प्रगति के लिए विशेष पूजा-अर्चना की गई। इसके साथ ही सभी प्रतिभागियों ने यह संकल्प भी लिया कि वे अपने-अपने क्षेत्रों में सामाजिक सौहार्द और शांति का संदेश फैलाते रहेंगे।

अजमेर पहुंचने पर राष्ट्रीय तिरंगा सद्भावना यात्रा का स्वागत उत्साह के साथ किया गया। यहां से यात्रा पुनः संगठित होकर दरगाह शरीफ पहुंची, जहां ख्वाजा साहब के दरबार में चादर चढ़ाई गई। दरगाह के सदर और जिम्मेदार पदाधिकारियों ने यात्रा के सदस्यों का स्वागत कर उन्हें सद्भाव और त्याग की सूफी परंपरा से प्रेरणा लेने का संदेश दिया। चादर पेश करने के बाद आयोजित संक्षिप्त सभा में सरफराज अहमद ने कहा कि जब-जब समाज में तनाव या विभाजन की स्थिति पैदा होती है, तब ऐसे प्रयास हमें एक-दूसरे के करीब लाते हैं। उन्होंने इस यात्रा को “राष्ट्र की आत्मा को जोड़ने वाला अभियान” बताते हुए कहा कि भारत की असली ताकत उसकी सांस्कृतिक विविधता और परस्पर सम्मान की भावना है।

इस दौरान सहायक सचिव मोहम्मद आदिल, जिला उपाध्यक्ष (लोहता) बख्तेयार आलम, कार्यकारिणी सदस्य (चौकाघाट) नसीम वारसी, कार्यकारिणी सदस्य (शैलपुत्री) नाज़िम रज़ा, सदस्य (नई सड़क) मोहम्मद आबिद, कार्यकारिणी सदस्य (बजरडीहां) कलाम भाई, तथा दुलहीपुर चंदौली से जुड़े सदस्य जानिसार अख्तर उर्फ सानू सहित कई प्रतिनिधि मौजूद रहे। सभी ने एक स्वर में कहा कि यह यात्रा केवल आयोजन भर नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए शांति और एकता का जीवंत संदेश है।

कार्यक्रम के अंत में सामूहिक प्रार्थना की गई, जिसमें राष्ट्र के विकास, युवाओं के बेहतर भविष्य और समाज से नफरत-हिंसा को दूर करने की दुआ की गई। प्रतिनिधियों ने कहा कि तिरंगा हम सबको जोड़ता है और हमें यह याद दिलाता है कि व्यक्तिगत मतभेदों से ऊपर उठकर देशहित सबसे पहले है। राष्ट्रीय तिरंगा सद्भावना यात्रा आगे भी कई शहरों में पहुंचकर लोगों को राष्ट्रीय एकता का संदेश देगी। आयोजकों का कहना है कि जब तक समाज के हर वर्ग तक यह संदेश नहीं पहुंच जाता, तब तक अभियान जारी रहेगा। यात्रा के प्रतिभागियों को विश्वास है कि जब तिरंगा हर हाथ में और सद्भावना हर दिल में होगी, तभी सच्चे अर्थों में मजबूत और समृद्ध भारत का निर्माण संभव है।

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