राजस्थान में भारतीय सिविल अकाउंट सर्विसेज (ICAS) अधिकारियों की ट्रेनिंग के लिए एक राष्ट्रीय स्तर की अकादमी स्थापित करने की तैयारी तेज हो गई है। भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) और भारतीय पुलिस सेवा (IPS) अधिकारियों की तर्ज पर अब ICAS अधिकारियों के लिए भी एक समर्पित प्रशिक्षण संस्थान बनाने की दिशा में पहल की जा रही है। इस प्रस्ताव के तहत राजस्थान के भरतपुर और जोधपुर जिलों में जमीन चिह्नित कर वित्त मंत्रालय को विस्तृत प्रस्ताव भेजा गया है। यदि यह योजना मंजूर होती है तो राज्य को एक और प्रतिष्ठित राष्ट्रीय संस्थान मिलने जा रहा है, जिससे प्रशासनिक और आर्थिक गतिविधियों को नई गति मिल सकती है।
ICAS सेवा की 50वीं वर्षगांठ पर बड़ी घोषणा की तैयारी
सूत्रों के अनुसार भारतीय सिविल अकाउंट सर्विसेज को भारत में शुरू हुए 50 वर्ष पूरे होने वाले हैं। आगामी 1 मार्च को इस सेवा की 50वीं वर्षगांठ के अवसर पर मंत्रालय की ओर से विशेष कार्यक्रम आयोजित करने की तैयारी है। माना जा रहा है कि इस कार्यक्रम के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से ICAS अधिकारियों के लिए एक अलग और आधुनिक प्रशिक्षण अकादमी की घोषणा करवाई जा सकती है। इसी उद्देश्य से मंत्रालय स्तर पर प्रस्ताव को अंतिम रूप दिया जा रहा है, ताकि वर्षगांठ के अवसर पर इसे औपचारिक रूप से सार्वजनिक किया जा सके।
ICAS अधिकारी देश की वित्तीय प्रशासनिक व्यवस्था में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। वे केंद्र सरकार के विभिन्न मंत्रालयों और विभागों में वित्तीय प्रबंधन, लेखा परीक्षण, बजट नियंत्रण और व्यय निगरानी जैसे कार्यों का संचालन करते हैं। वर्तमान में इन अधिकारियों को अलग-अलग संस्थानों में प्रशिक्षण दिया जाता है, लेकिन अब एक केंद्रीकृत और विशेष अकादमी स्थापित कर प्रशिक्षण प्रणाली को और अधिक सुदृढ़ करने की योजना है।
राजस्थान क्यों बना पहली पसंद
वित्त मंत्रालय ने इस प्रस्तावित अकादमी के निर्माण के लिए राजस्थान को प्राथमिकता दी है। बताया जा रहा है कि मंत्रालय ने हाल ही में राज्य के मुख्य सचिव को पत्र लिखकर जयपुर और जोधपुर में जमीन उपलब्ध कराने का अनुरोध किया था। मंत्रालय का उद्देश्य ऐसे स्थान का चयन करना है, जहां पर्याप्त भूमि, बेहतर कनेक्टिविटी और दीर्घकालिक विस्तार की संभावनाएं मौजूद हों।
राजस्थान का भौगोलिक विस्तार, शांत वातावरण और पहले से स्थापित प्रशासनिक प्रशिक्षण संस्थानों की मौजूदगी इसे इस तरह की अकादमी के लिए उपयुक्त बनाती है। राज्य सरकार भी इस परियोजना को लेकर सकारात्मक रुख अपनाए हुए है और शीघ्र निर्णय के लिए सक्रियता दिखाई जा रही है।
भरतपुर और जोधपुर में जमीन चिह्नित
हालांकि मंत्रालय ने जयपुर और जोधपुर में जमीन का विकल्प मांगा था, लेकिन राज्य स्तर पर विचार-विमर्श के बाद भरतपुर और जोधपुर में जमीन चिह्नित कर प्रस्ताव भेजा गया है। संभावना जताई जा रही है कि भरतपुर में चयनित भूमि पर ही अंतिम मुहर लग सकती है।
भरतपुर प्रशासन ने जिले में दो स्थानों पर जमीन चिह्नित की है। पहला स्थान ग्राम भवनपुरा, तहसील भरतपुर में स्थित है, जबकि दूसरा स्थान ग्राम खटौटी, तहसील नदबई में प्रस्तावित है। दोनों स्थानों का चयन विस्तृत सर्वे और उपलब्ध भूमि की स्थिति को देखते हुए किया गया है। इन क्षेत्रों में पर्याप्त जमीन उपलब्ध होने के साथ भविष्य में विस्तार की भी संभावनाएं बताई जा रही हैं।
जोधपुर प्रशासन ने भी रिंग रोड के नजदीक ग्राम थबुकड़ा में जमीन चिन्हित कर प्रस्ताव तैयार किया है। जोधपुर की भौगोलिक स्थिति और बेहतर सड़क कनेक्टिविटी इसे एक मजबूत विकल्प बनाती है।
राज्य और केंद्र के लिए रणनीतिक महत्व
यदि राजस्थान में ICAS राष्ट्रीय अकादमी स्थापित होती है तो यह न केवल राज्य की प्रतिष्ठा को बढ़ाएगी बल्कि स्थानीय स्तर पर रोजगार और बुनियादी ढांचे के विकास को भी प्रोत्साहन देगी। निर्माण कार्य से लेकर संचालन तक विभिन्न क्षेत्रों में अवसर सृजित होंगे। साथ ही, देशभर से प्रशिक्षण के लिए आने वाले अधिकारियों के कारण क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था को भी लाभ मिल सकता है।
केंद्र सरकार के लिए यह कदम वित्तीय प्रशासन को अधिक पेशेवर और आधुनिक बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण साबित होगा। एक समर्पित अकादमी के माध्यम से ICAS अधिकारियों को नई तकनीकों, डिजिटल वित्तीय प्रबंधन प्रणाली और वैश्विक लेखा मानकों के अनुरूप प्रशिक्षित किया जा सकेगा।


