शोभना शर्मा राजस्थान के राजसमंद जिले के प्रसिद्ध वैष्णव पीठ नाथद्वारा श्रीनाथजी मंदिर में जन्माष्टमी का पर्व अत्यंत धूमधाम और उत्साह के साथ मनाया जा रहा है। भगवान श्रीकृष्ण के जन्मोत्सव पर यहां भक्तों का सैलाब उमड़ पड़ा है। सुबह से ही श्रद्धालुओं की भीड़ मंदिर के बाहर उमड़नी शुरू हो गई थी और दिन बढ़ने के साथ ही यह संख्या लाखों तक पहुंच गई। नाथद्वारा की संकरी गलियां और मंदिर प्रांगण हर ओर भक्तिमय माहौल से गूंज रहे हैं।
ठाकुरजी को मिलेगी 21 तोपों की सलामी
इस वर्ष भी परंपरा के अनुसार आधी रात को जब भगवान श्रीकृष्ण का जन्मोत्सव मनाया जाएगा, उस समय नाथद्वारा के रसाल चौक में 21 तोपों की गूंज के साथ ठाकुरजी का स्वागत किया जाएगा। यह विशेष परंपरा वर्षों से निभाई जा रही है और इसे देखने के लिए भक्त विशेष रूप से मध्यरात्रि तक मंदिर प्रांगण में बने रहते हैं। जैसे ही आधी रात का समय होगा, ठाकुरजी को पंचामृत स्नान कराया जाएगा और 21 तोपों की सलामी दी जाएगी। इसके बाद ठाकुरजी की महाआरती की जाएगी, जिससे वातावरण में आस्था और उल्लास की अद्भुत छटा बिखर जाएगी।
सोने के झूले में ठाकुरजी की झांकी
जन्माष्टमी के अगले दिन नाथद्वारा में नंद महोत्सव का आयोजन होता है। इस महोत्सव में ठाकुरजी को सोने के पालने में झुलाया जाता है। सोने का झूला विशेष रूप से सजाया जाता है और ठाकुरजी को लाड़-प्यार के साथ झुलाकर भक्त आनंद मनाते हैं। नंद महोत्सव के दौरान दूध, दही, केसर और पंचामृत से निर्मित प्रसाद श्रद्धालुओं में बांटा जाता है और परंपरा के अनुसार इसे भक्तों पर उछालकर भी आनंद व्यक्त किया जाता है। यह अद्वितीय दृश्य भक्तों को भक्ति और उल्लास के महासागर में डुबो देता है।
भक्ति से सराबोर जयकारे और झूमते श्रद्धालु
नाथद्वारा की गलियों में जन्माष्टमी और नंद महोत्सव के दौरान भक्त ‘हाथी घोड़ा पालकी, जय कन्हैया लाल की’ और ‘नंद घर आनंद भयो’ जैसे जयकारे लगाते हुए नाचते-गाते नजर आते हैं। महिलाएं पारंपरिक वेशभूषा में झूमती हुई और पुरुष ढोल-नगाड़ों की धुन पर थिरकते हुए श्रद्धा का परिचय देते हैं। मंदिर परिसर और आस-पास की गलियों में धार्मिक गीतों और भजनों की गूंज वातावरण को पूरी तरह भक्तिमय बना देती है।
सुरक्षा व्यवस्था चाक-चौबंद
भारी भीड़ को देखते हुए प्रशासन और मंदिर मंडल ने सुरक्षा और व्यवस्था के विशेष इंतजाम किए हैं। नाथद्वारा कस्बे में पुलिस बल की तैनाती हर कोने में की गई है ताकि भक्तों को किसी प्रकार की परेशानी न हो। दो दिन पहले जिला कलेक्टर और पुलिस अधीक्षक ने नाथद्वारा का दौरा कर तैयारियों की समीक्षा की थी। भीड़ प्रबंधन, ट्रैफिक व्यवस्था और मंदिर में दर्शन की लाइनों को व्यवस्थित करने के लिए अतिरिक्त कर्मचारियों और वालंटियरों की ड्यूटी लगाई गई है।
स्थानीय व्यापार को मिला बूम
जन्माष्टमी और नंद महोत्सव के दौरान नाथद्वारा का स्थानीय व्यापार भी खूब फलता-फूलता है। लाखों श्रद्धालुओं के आगमन से होटल, धर्मशालाएं और लॉज पूरी तरह बुक हो गए हैं। बाजारों में मिठाई, फूल, पूजा सामग्री और स्मृति चिन्ह की दुकानों पर भीड़ उमड़ रही है। यहां तक कि टैक्सी, बस और अन्य यातायात साधनों की भी मांग बढ़ गई है। व्यापारियों का कहना है कि इन दो दिनों में उन्हें पूरे साल की सबसे बड़ी कमाई होती है।
श्रद्धालुओं के उत्साह ने बनाया अद्वितीय माहौल
नाथद्वारा में जन्माष्टमी का पर्व केवल एक धार्मिक अनुष्ठान भर नहीं है बल्कि यह आस्था, परंपरा और संस्कृति का अद्वितीय संगम है। ठाकुरजी के जन्म की आधी रात को 21 तोपों की सलामी का दृश्य श्रद्धालुओं की आंखों में भक्ति और भावनाओं का सैलाब भर देता है। नंद महोत्सव में ठाकुरजी को सोने के झूले में झुलाने का दृश्य, प्रसाद वितरण और भक्तों के जयकारे नाथद्वारा को इन दिनों स्वर्गिक आभा प्रदान करते हैं।


