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नारी शक्ति वंदन अधिनियम से बढ़ेगा महिला सशक्तिकरण: इंदु देवी जाटव

नारी शक्ति वंदन अधिनियम से बढ़ेगा महिला सशक्तिकरण: इंदु देवी जाटव

राजस्थान के भीलवाड़ा में भारतीय जनता पार्टी की महिला नेता और धौलपुर-करौली लोकसभा क्षेत्र से प्रत्याशी इंदु देवी जाटव ने नारी शक्ति वंदन अधिनियम, 2023 को भारतीय लोकतंत्र के इतिहास में एक ऐतिहासिक और परिवर्तनकारी कदम बताया है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में पारित यह संवैधानिक संशोधन महिलाओं को केवल योजनाओं की लाभार्थी बनने तक सीमित नहीं रखेगा, बल्कि उन्हें नीति निर्माण की प्रक्रिया का सक्रिय भागीदार बनाएगा। उनके अनुसार, यह कानून विकसित भारत 2047 के लक्ष्य को साकार करने की दिशा में एक मजबूत आधार तैयार करेगा।

भीलवाड़ा भाजपा जिला कार्यालय में मीडिया से बातचीत के दौरान इंदु देवी जाटव ने स्पष्ट किया कि इस अधिनियम के तहत लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत सीटों का आरक्षण सुनिश्चित किया जाएगा। इसमें अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति वर्ग की महिलाओं के लिए भी आरक्षित सीटें शामिल होंगी। उन्होंने कहा कि इससे न केवल महिलाओं की राजनीतिक भागीदारी बढ़ेगी, बल्कि निर्णय लेने की प्रक्रिया में उनकी प्रभावी उपस्थिति भी सुनिश्चित होगी। उनका मानना है कि जब महिलाएं नेतृत्व की भूमिका में आती हैं, तो शासन की प्राथमिकताएं स्वतः बदल जाती हैं और शिक्षा, स्वास्थ्य, पोषण, जल और स्वच्छता जैसे मुद्दों को अधिक महत्व मिलता है।

इंदु देवी जाटव ने कहा कि बीते वर्षों में केंद्र सरकार द्वारा चलाए गए विभिन्न अभियानों ने महिलाओं की स्थिति में उल्लेखनीय सुधार किया है। उन्होंने ‘बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ’ अभियान का उल्लेख करते हुए कहा कि इससे समाज में सकारात्मक बदलाव आया है और लड़कियों की शिक्षा के प्रति जागरूकता बढ़ी है। माध्यमिक स्तर पर लड़कियों की नामांकन दर का 80 प्रतिशत से अधिक होना इस परिवर्तन का प्रमाण है। इसके अलावा ‘सुकन्या समृद्धि योजना’ के तहत करोड़ों खातों का खुलना यह दर्शाता है कि अब परिवार बेटियों के भविष्य को लेकर अधिक सजग हो गए हैं।

उन्होंने यह भी बताया कि प्रधानमंत्री जन धन योजना के माध्यम से बड़ी संख्या में महिलाएं बैंकिंग प्रणाली से जुड़ी हैं, जिससे उनकी आर्थिक भागीदारी मजबूत हुई है। मुद्रा योजना के तहत महिलाओं को दिए गए ऋण और स्वयं सहायता समूहों से जुड़ने वाली महिलाओं की बढ़ती संख्या इस बात का संकेत है कि नारी शक्ति अब आत्मनिर्भरता की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रही है। उन्होंने ‘नमो ड्रोन दीदी’, ‘लखपति दीदी’, प्रधानमंत्री आवास योजना, उज्ज्वला योजना, स्वच्छ भारत मिशन और जल जीवन मिशन जैसी योजनाओं का उल्लेख करते हुए कहा कि इन पहलों ने महिलाओं के जीवन स्तर में सुधार किया है और उनके दैनिक जीवन को सरल बनाया है।

इंदु देवी जाटव ने यह भी रेखांकित किया कि आज महिलाएं लोकतंत्र के केंद्र में हैं। उन्होंने हाल के चुनावों का उदाहरण देते हुए कहा कि महिलाओं का मतदान प्रतिशत पुरुषों से अधिक रहा है, जो उनकी बढ़ती राजनीतिक जागरूकता और भागीदारी को दर्शाता है। उनका कहना था कि अब समय आ गया है कि इस भागीदारी को प्रतिनिधित्व में बदला जाए और नारी शक्ति वंदन अधिनियम इसी दिशा में एक निर्णायक कदम साबित होगा। उन्होंने विश्वास जताया कि यह कानून भारत को अधिक समावेशी, सशक्त और संतुलित लोकतंत्र की ओर ले जाएगा।

इस अवसर पर उन्होंने यह भी जानकारी दी कि इस अधिनियम के व्यापक प्रचार-प्रसार के लिए भीलवाड़ा जिले में 20 अप्रैल तक विभिन्न जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। इन कार्यक्रमों का उद्देश्य आमजन, विशेष रूप से महिलाओं को इस कानून की महत्ता से अवगत कराना है। जिले के विभिन्न क्षेत्रों में महिलाओं द्वारा पदयात्राएं और वाहन रैलियां निकाली जाएंगी, जिससे जनसंपर्क को और मजबूत किया जा सके।

जनजागरूकता अभियान को प्रभावी बनाने के लिए विभिन्न रचनात्मक गतिविधियों की भी योजना बनाई गई है। इनमें सैंड आर्ट, नुक्कड़ नाटक, चित्रकला और लोकगीतों के माध्यम से लोगों तक संदेश पहुंचाया जाएगा। इसके साथ ही प्रमुख स्थानों पर ‘नारी शक्ति दीवार’ बनाई जाएगी, जहां महिलाएं अपने विचार और अनुभव साझा कर सकेंगी। कॉलेजों और मुख्य चौराहों पर मानव श्रृंखलाएं बनाकर भी इस अभियान को जनांदोलन का रूप देने का प्रयास किया जाएगा।

इंदु देवी जाटव ने बताया कि इस अभियान के लिए एक जिला स्तरीय टीम का गठन किया गया है, जिसमें विभिन्न पदाधिकारियों को जिम्मेदारियां सौंपी गई हैं। इसके अलावा सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स के माध्यम से भी इस अभियान को व्यापक रूप से प्रसारित किया जाएगा, ताकि अधिक से अधिक लोग इससे जुड़ सकें। अभियान की निगरानी के लिए ‘सरल एप’ का उपयोग किया जाएगा, जिससे कार्यक्रमों की प्रगति पर नजर रखी जा सके।

अपने संबोधन में उन्होंने कहा कि नारी शक्ति वंदन अधिनियम केवल एक कानून नहीं, बल्कि एक सामाजिक परिवर्तन की शुरुआत है। यह महिलाओं को सशक्त बनाने के साथ-साथ समाज में समानता और न्याय की भावना को भी मजबूत करेगा। उन्होंने विश्वास जताया कि आने वाले समय में यह अधिनियम देश के राजनीतिक और सामाजिक ढांचे में सकारात्मक बदलाव लाएगा और भारत को वैश्विक स्तर पर एक मजबूत और समावेशी राष्ट्र के रूप में स्थापित करेगा।

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