शोभना शर्मा। राजस्थान की राजनीति में सक्रिय किसान नेता नरेश मीणा ने रविवार को बूंदी जिले के हिंडोली विधानसभा क्षेत्र में बड़ा शक्ति प्रदर्शन किया। भगवान देवनारायण के कोलाहेड़ा मेले में मुख्य अतिथि के रूप में पहुंचे नरेश मीणा ने मंच से तीखे राजनीतिक संदेश दिए। इस दौरान उन्होंने बिना नाम लिए हिंडोली विधायक अशोक चांदना पर जमकर निशाना साधा और आरोप लगाया कि उनके खिलाफ सुनियोजित राजनीतिक षड्यंत्र रचे जा रहे हैं।
हेलीकॉप्टर से कोलाहेड़ा पहुंचे, जनसमुदाय पर सबकी नजर
नरेश मीणा दोपहर करीब दो बजे हेलीकॉप्टर से कोलाहेड़ा पहुंचे। हिंडोली विधानसभा क्षेत्र में यह पहला मौका बताया जा रहा है, जब उनका हेलीकॉप्टर उतरा। हेलीपैड से कार्यक्रम स्थल तक वे काफिले के साथ पहुंचे। बड़ी संख्या में उमड़े जनसमुदाय को देखकर उन्होंने कहा कि अंता विधानसभा उपचुनाव को देखने वाले और राजनीति को समझने वाले सभी लोग आज इस मेले पर नजर रखे हुए हैं। अपने संबोधन में नरेश मीणा ने इसे केवल धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि सामाजिक और राजनीतिक चेतना का प्रतीक बताया। उन्होंने कहा कि यह भीड़ बताती है कि किसान और समाज अब राजनीति को समझने लगा है और अपने अधिकारों को लेकर सजग हो रहा है।
बिना नाम लिए विधायक अशोक चांदना पर हमला
नरेश मीणा ने मंच से बिना नाम लिए हिंडोली विधायक अशोक चांदना पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि उनके समाज के लोगों ने एक व्यक्ति को तीन बार विधायक बनाया, लेकिन उसने किसान हितों और समाज की एकता के बजाय बड़े नेताओं को कमजोर करने का काम किया। उनका आरोप था कि पहले सचिन पायलट और प्रहलाद गुंजल को कमजोर किया गया और बाद में निजी स्वार्थ के लिए विरोधी खेमे से हाथ मिला लिया गया। नरेश मीणा ने कहा कि राजनीति में कुछ लोग नहीं चाहते कि किसान समाज एकजुट हो। किसान कौम की एकता से उन नेताओं की राजनीति खतरे में पड़ जाती है, जो सीमित वोट बैंक पर निर्भर रहते हैं।
किसान परिवार से राजनीति तक का सफर
अपने भाषण में नरेश मीणा ने खुद को किसान परिवार से जुड़ा नेता बताया। उन्होंने कहा कि वे खेत-खलिहानों में पले-बढ़े हैं और राजनीति में आने के बाद से केवल किसान और समाज की एकता का झंडा उठाया है। उनका कहना था कि यदि राजनीति में उन्हें कुछ बनने का अवसर मिला, तो वे किसान कौम के लिए अपना सब कुछ न्योछावर कर देंगे। उन्होंने आरोप लगाया कि जब भी किसान समाज को संगठित करने का प्रयास हुआ, तब-तब राजनीतिक षड्यंत्र रचे गए। यह षड्यंत्र केवल चुनावी हार तक सीमित नहीं रहे, बल्कि चुनाव के बाद भी उन्हें घेरने की कोशिशें जारी रहीं।
अंता उपचुनाव और सर्व समाज के समर्थन का जिक्र
नरेश मीणा ने अंता विधानसभा उपचुनाव का जिक्र करते हुए कहा कि उस चुनाव में सर्व समाज, विशेष रूप से गुर्जर समाज ने उन्हें समर्थन दिया था। लोगों की मंशा थी कि वे विधानसभा में पहुंचें और किसानों की आवाज को मजबूती से उठाएं। उनका कहना था कि यदि वे विधानसभा में पहुंचते, तो शांति धारीवाल की राजनीति को खुली चुनौती देते। उन्होंने कहा कि अंता उपचुनाव में उन्हें हराने के पीछे भी राजनीतिक गठजोड़ और साजिशें काम कर रही थीं, ताकि किसान नेतृत्व को आगे बढ़ने से रोका जा सके।
कई नेताओं पर साजिश के आरोप
अपने भाषण में नरेश मीणा ने केशोरायपाटन विधायक सीएल प्रेमी, सांगोद विधायक हीरालाल नागर, टीकाराम जूली और गोविंद सिंह डोटासरा पर मिलकर उनके खिलाफ साजिश रचने के आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि वर्ष 2028 के विधानसभा चुनाव में अभी तीन साल का समय बाकी है, लेकिन उन्हें हराने के लिए अभी से कई लोग एकजुट हो गए हैं। नरेश मीणा ने अपनी स्थिति की तुलना महाभारत के पात्र अभिमन्यु से करते हुए कहा कि जिस तरह अभिमन्यु को चक्रव्यूह में फंसाया गया, उसी तरह उनके खिलाफ भी राजनीतिक चक्रव्यूह रचा गया। उन्होंने आरोप लगाया कि चुनाव हारने के बाद भी उनके खिलाफ साजिशें जारी रहीं और उनकी जाति के लोगों को भड़काकर उन्हें फंसाने की कोशिश की गई।
2028 की राजनीति की झलक
हिंडोली में नरेश मीणा का यह शक्ति प्रदर्शन केवल धार्मिक मेले तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसे 2028 के विधानसभा चुनाव की तैयारी के संकेत के रूप में भी देखा जा रहा है। उनके तीखे भाषण और आरोपों ने यह साफ कर दिया है कि आने वाले वर्षों में राजस्थान की किसान राजनीति और अधिक आक्रामक रूप ले सकती है।


