मनीषा शर्मा। राजस्थान के राजनीतिक हलकों में विवादास्पद नाम बन चुके निर्दलीय प्रत्याशी नरेश मीणा की जमानत याचिका को झालावाड़ कोर्ट ने सख्त टिप्पणियों के साथ खारिज कर दिया है। कोर्ट ने अपने आदेश में स्पष्ट कहा कि नरेश मीणा एक आदतन अपराधी है और बेल दिए जाने से समाज पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा। इसके साथ ही कोर्ट ने यह भी जोड़ा कि मीणा ने सरकारी आदेशों की अवहेलना की और राजकीय कार्यों में बाधा उत्पन्न की, जिसमें हिस्ट्रीशीटर आरोपी भी शामिल रहे।
यह फैसला शनिवार को तब आया जब मीणा ने जेल से रिहाई के लिए अर्जी दी थी। लेकिन कोर्ट ने सभी तथ्यों और उसकी पुरानी आपराधिक गतिविधियों को ध्यान में रखते हुए उसे राहत देने से इंकार कर दिया। फिलहाल वह झालावाड़ जेल में बंद है। नरेश मीणा की गिरफ्तारी 25 जुलाई को उस समय हुई थी जब झालावाड़ स्थित एसआरजी मेडिकल कॉलेज में धरना प्रदर्शन के दौरान पुलिस ने उसे, मुरारीलाल, जकाकाश और प्रदीप उर्फ गोलू मीणा को गिरफ़्तार कर कोर्ट में पेश किया था। कोर्ट ने चारों को न्यायिक अभिरक्षा में भेज दिया था। इससे पहले मीणा 8 महीने तक टोंक जिले की जेल में बंद रहा था। उसकी रिहाई 13 दिन पहले ही राजस्थान हाई कोर्ट के आदेश पर हुई थी, लेकिन एक और हिंसक प्रकरण में वह दोबारा जेल पहुंच गया।
पूर्व घटनाओं का क्रम:
राजस्थान में देवली-उनियारा विधानसभा उपचुनाव के दौरान, टोंक जिले के समरावता गांव में नरेश मीणा ने एक ऐसे कृत्य को अंजाम दिया जिसने उसकी राजनीतिक और सामाजिक छवि को गहराई से प्रभावित किया। चुनाव के दिन नरेश मीणा ने मतदान केंद्र पर तैनात उपखंड अधिकारी (SDM) को सार्वजनिक रूप से थप्पड़ मार दिया था। इस घटना के बाद वहां हंगामा मच गया और चुनाव प्रक्रिया प्रभावित हुई।
इस घटना के तुरंत बाद पुलिस ने समरावता गांव में सघन कार्रवाई करते हुए नरेश मीणा को गिरफ्तार कर लिया था। इस गिरफ्तारी को लेकर गांव में पुलिस और ग्रामीणों के बीच संघर्ष की स्थिति बनी थी। ग्रामीणों ने आरोप लगाया था कि पुलिस ने छापेमारी के दौरान अत्यधिक बल प्रयोग किया और महिलाओं व बच्चों को भी नहीं बख्शा। कोर्ट में पेशी के बाद नरेश मीणा को 8 महीने तक जेल में रखा गया था। इस दौरान उसके समर्थकों ने इसे राजनीतिक द्वेष का मामला बताया और कई बार प्रदर्शन किए। आखिरकार राजस्थान हाई कोर्ट ने अप्रैल 2025 में उसकी जमानत मंजूर की और वह बाहर आया।
हालिया मामला: अस्पताल में हंगामा
नरेश मीणा की रिहाई के केवल 13 दिन बाद ही वह फिर से सुर्खियों में आ गया। इस बार मामला था झालावाड़ जिले के पीपलोदी गांव में एक सरकारी स्कूल की छत गिरने से हुई 7 लोगों की मौत के विरोध में धरना देने का। पीड़ित परिवारों को न्याय दिलाने के उद्देश्य से नरेश मीणा और उसके समर्थकों ने झालावाड़ के एसआरजी मेडिकल कॉलेज में धरना दिया।
लेकिन यह धरना प्रदर्शन जल्द ही हंगामे में तब्दील हो गया। प्रदर्शनकारियों और पुलिसकर्मियों के बीच धक्का-मुक्की, डॉक्टरों के साथ अभद्रता, और सरकारी काम में बाधा जैसी घटनाएं सामने आईं। इन आरोपों के आधार पर अस्पताल प्रशासन ने आधिकारिक रिपोर्ट तैयार कर पुलिस को सौंप दी, जिसके बाद नरेश मीणा और उसके सहयोगियों को गिरफ्तार किया गया। इन घटनाओं को अदालत ने गंभीरता से लिया और माना कि नरेश मीणा कोई नया अपराधी नहीं बल्कि एक आदतन कानून उल्लंघनकर्ता है।
कोर्ट की टिप्पणी:
शनिवार को हुई सुनवाई में अदालत ने स्पष्ट शब्दों में कहा,
“नरेश मीणा कोर्ट के आदेशों की अवहेलना करता रहा है और सरकारी कर्मचारियों की ड्यूटी में व्यवधान उत्पन्न करता है। ऐसे व्यक्ति को बेल देना समाज में गलत संदेश देगा और कानून व्यवस्था पर प्रश्न उठाएगा।”
वर्तमान स्थिति:
फिलहाल नरेश मीणा झालावाड़ जेल में बंद है और उसके साथ तीन अन्य अभियुक्त भी हिरासत में हैं। जमानत याचिका खारिज होने के बाद अब उन्हें न्यायिक प्रक्रिया के पूरे होने तक जेल में रहना होगा।