टोंक जिले में देवली–उनियारा विधानसभा क्षेत्र एक बार फिर राजनीतिक और प्रशासनिक हलचल का केंद्र बना हुआ है। निर्दलीय प्रत्याशी रहे नरेश मीणा ने अपनी 11 सूत्री मांगों को लेकर गुरुवार को कोटड़ी मोड़ पर बड़ी जनसभा की, जिसके बाद उन्होंने समर्थकों के साथ जयपुर कूच का ऐलान कर दिया। उनकी इस घोषणा से प्रशासन में खलबली मच गई और कानून व्यवस्था को बनाए रखने के उद्देश्य से पुलिस ने नेशनल हाईवे 116 पर आमली मोड़ के पास काफिले को रोकने के लिए बेरिकेडिंग लगा दी।
आमली मोड़ पर सुबह से ही समर्थकों का जमावड़ा बढ़ने लगा और सैकड़ों लोग नारेबाजी और समर्थन जताते हुए मौके पर जुट गए। स्थिति तनावपूर्ण जरूर बनी हुई है लेकिन पुलिस और जिला प्रशासन के अनुसार हालात पूरी तरह नियंत्रण में हैं। किसी भी संभावित अप्रिय घटना से निपटने के लिए भारी पुलिस बल तैनात है और अधिकारियों ने मौके पर डेरा डाल रखा है।
प्रशासन ने आंदोलन को शांत कराने और गतिरोध समाप्त करने के लिए लगातार प्रयास किए। एडीएम रामरतन सोंकरिया और एएसपी रतनलाल भार्गव ने दो दौर की वार्ता कर नरेश मीणा को समझाने की कोशिश की। उच्च अधिकारियों से फोन पर बातचीत भी करवायी गई लेकिन उसका कोई सकारात्मक परिणाम सामने नहीं आया। प्रशासन की मंशा थी कि आंदोलन को संवाद के माध्यम से समाप्त करवाया जाए, लेकिन नरेश मीणा अपनी मांगों पर अडिग रहे और उन्होंने साफ कहा कि बिना ठोस आश्वासन के कूच वापस नहीं लिया जाएगा।
नरेश मीणा का कहना है कि उनकी 11 सूत्री मांगें देवली–उनियारा क्षेत्र की जनता के अधिकारों से जुड़ी हैं और जब तक मुख्यमंत्री कार्यालय के वरिष्ठ अधिकारियों से उनकी सीधी वार्ता नहीं होती, वे पीछे नहीं हटेंगे। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि आंदोलन शांतिपूर्ण रहेगा और उनके समर्थक किसी भी प्रकार की हिंसा में शामिल नहीं होंगे। महात्मा गांधी की पुण्यतिथि और शहीद दिवस पर उन्होंने अहिंसक आंदोलन को अपनाने की घोषणा की और समर्थकों को शांति बनाए रखने का संदेश दिया।
इन 11 सूत्री मांगों में 14 गांवों को उनियारा में जोड़ने, क्षेत्र के 60 युवाओं पर दर्ज मुकदमों को वापस लेने, मुआवजा वितरण, किसानों को समर्थन मूल्य और फसल बीमा का लाभ, सड़क और पेयजल समस्याओं का समाधान, टोल वसूली से जुड़ी दिक्कतें, नगरफोर्ट थाने में दर्ज तीन मामलों को खत्म करने, सोप थाने में महिलाओं के साथ कथित बर्बरता की जांच और क्षेत्र के थाना क्षेत्रों में पुलिसकर्मियों पर लगे गंभीर आरोपों पर कार्रवाई शामिल है। इसके अलावा ईसरदा बांध प्रभावित गांवों में बसने वाले मालियों की झोपड़ियों के विस्थापन और सड़क निर्माण से जुड़ी समस्याओं के समाधान की मांग भी मुख्यमंत्री के नाम भेजे गए ज्ञापन में शामिल है।
कहा जा रहा है कि ये मांगें पिछले कई महीनों से लगातार उठाई जा रही थीं, लेकिन समाधान न निकलने के कारण लोगों में असंतोष बढ़ता गया। नरेश मीणा का यह आंदोलन क्षेत्रीय मुद्दों और पुलिस प्रशासन से जुड़े मामलों को लेकर जनता में मौजूद नाराजगी को सामने ला रहा है। समर्थकों का कहना है कि यह लड़ाई अधिकारों और न्याय की है, और यदि प्रशासन संवेदनशीलता दिखाए तो स्थिति जल्द ही शांत हो सकती है।
आमली मोड़ पर प्रशासन की ओर से एडीएम, एएसपी, एसडीएम हुक्मीचंद रोहलनिया सहित बड़े अधिकारी मौजूद हैं। देवली, उनियारा और अलीगढ़ क्षेत्र से अतिरिक्त पुलिस बल बुलाकर पूरे इलाके को सुरक्षा घेरा प्रदान किया गया है। हाईवे पर यातायात को नियंत्रित करने के लिए वैकल्पिक मार्ग बनाए गए हैं, ताकि आम लोगों को परेशानी न हो। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि जब तक वार्ता सफल नहीं होती, काफिले को आगे बढ़ने की अनुमति नहीं दी जाएगी।
उधर, क्षेत्र के जनप्रतिनिधियों और सामाजिक संगठनों की नजरें भी इस आंदोलन पर टिकी हुई हैं। कई लोग इसे क्षेत्र में जनता की आवाज उठाने वाला बड़ा जनआंदोलन मान रहे हैं, जबकि कुछ इसे राजनीतिक रूप से प्रेरित बताते हैं। हालांकि नरेश मीणा का कहना है कि इस आंदोलन का राजनीति से कोई संबंध नहीं है और यह पूरी तरह जनता के अधिकारों और समस्याओं को लेकर चलाया जा रहा है।
कई घंटों से जारी गतिरोध के बीच प्रशासन और आंदोलनकारियों के बीच फिर से वार्ता की संभावना जताई जा रही है। राजनीतिक और सामाजिक हलकों में उम्मीद है कि बातचीत के जरिए किसी मध्य मार्ग पर समाधान मिल सकता है। फिलहाल स्थिति तनावपूर्ण लेकिन शांत है और प्रशासन किसी भी स्थिति से निपटने के लिए मुस्तैद है।


