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नागौर के छात्रों ने बनाया AI रोबोट ‘रक्षक-01’, तकनीक की नई मिसाल

नागौर के छात्रों ने बनाया AI रोबोट ‘रक्षक-01’, तकनीक की नई मिसाल

राजस्थान के नागौर जिले के छोटे से कस्बे कुचेरा से एक ऐसी प्रेरणादायक कहानी सामने आई है, जो यह साबित करती है कि प्रतिभा किसी संसाधन या बड़े शहर की मोहताज नहीं होती। अगर जुनून और इच्छाशक्ति मजबूत हो तो सीमित साधनों में भी असंभव दिखने वाले कार्य को संभव बनाया जा सकता है। इसी सोच को साकार करते हुए दो स्कूली छात्रों ने तकनीक की दुनिया में ऐसा नवाचार किया है, जिसने सभी को हैरान कर दिया है।

कक्षा 9 के 14 वर्षीय यश शर्मा और कक्षा 11 के 16 वर्षीय नीरज सैनी ने मिलकर ‘रक्षक-01’ नाम का एक अत्याधुनिक ह्यूमनॉइड आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस रोबोट तैयार किया है। यह रोबोट केवल एक मशीन नहीं, बल्कि आधुनिक तकनीक का ऐसा उदाहरण है जो मानव जैसी क्षमताओं की नकल करते हुए सुरक्षा और निगरानी के क्षेत्र में उपयोगी साबित हो सकता है।

यश शर्मा के पिता जयप्रकाश शर्मा विद्युत विभाग में कार्यरत हैं, जबकि उनकी माता एक निजी स्कूल में शिक्षिका हैं। बचपन से ही विज्ञान और तकनीक के प्रति रुचि रखने वाले यश ने अपनी जिज्ञासा को प्रयोगों में बदल दिया। दूसरी ओर नीरज सैनी, जो कक्षा 11 के छात्र हैं, तकनीकी नवाचार के प्रति गहरी दिलचस्पी रखते हैं। दोनों की समान सोच और लगन ने उन्हें इस प्रोजेक्ट पर साथ काम करने के लिए प्रेरित किया।

‘रक्षक-01’ की सबसे बड़ी खासियत इसकी ह्यूमनॉइड संरचना है। इसका डिजाइन ऐसा है कि यह देखने में किसी विज्ञान कथा फिल्म के रोबोट जैसा प्रतीत होता है। इसमें लगे सेंसर और कैमरे इसे आसपास के वातावरण को समझने की क्षमता प्रदान करते हैं। यह रोबोट अपनी आंखों को अलग-अलग दिशाओं में घुमा सकता है, जिससे यह किसी भी गतिविधि पर नजर रख सकता है। इसमें ऑब्जेक्ट डिटेक्शन की सुविधा है, जो इसे संदिग्ध गतिविधियों की पहचान करने में सक्षम बनाती है।

रोबोट में एक उच्च गुणवत्ता वाला लाइव कैमरा भी लगाया गया है, जिसके माध्यम से यह वास्तविक समय में वीडियो फीड प्रदान करता है। इस फीचर के कारण इसे सुरक्षा गार्ड की तरह उपयोग किया जा सकता है। इसके अलावा, इसमें वॉइस कमांड की सुविधा भी दी गई है, जिससे यह इंसानों की आवाज को पहचान कर उनके निर्देशों का पालन कर सकता है। इसकी संवाद प्रणाली इतनी उन्नत है कि यह सामान्य बातचीत भी कर सकता है, जिससे यह अधिक उपयोगी और इंटरैक्टिव बन जाता है।

तकनीकी दृष्टि से यह प्रोजेक्ट काफी जटिल है। इसे तैयार करने के लिए छात्रों ने पायथन प्रोग्रामिंग भाषा का उपयोग किया, जिसमें विभिन्न एआई मॉडल्स को इंटीग्रेट किया गया। ऑब्जेक्ट डिटेक्शन के लिए ओपन सोर्स लाइब्रेरी का सहारा लिया गया, जबकि वॉइस इंटरैक्शन के लिए स्पीच रिकग्निशन टूल्स का इस्तेमाल किया गया। इसके हार्डवेयर पार्ट्स को बनाने में 3डी प्रिंटिंग तकनीक का उपयोग किया गया, जिससे इसके प्रत्येक हिस्से को सटीक आकार और संरचना दी जा सकी।

हालांकि इस उपलब्धि के पीछे केवल तकनीक ही नहीं, बल्कि संघर्ष और धैर्य की लंबी कहानी भी जुड़ी है। कुचेरा जैसे छोटे कस्बे में अत्याधुनिक उपकरणों की उपलब्धता सीमित है, जिसके कारण छात्रों को कई कठिनाइयों का सामना करना पड़ा। उन्हें जरूरी कंपोनेंट्स जुटाने में दिक्कत हुई और कई बार उनके बनाए प्रोटोटाइप असफल भी हुए। इसके बावजूद उन्होंने हार नहीं मानी और लगातार प्रयास करते रहे। इंटरनेट, ऑनलाइन ट्यूटोरियल्स और यूट्यूब वीडियो की मदद से उन्होंने अपनी समझ को विकसित किया और धीरे-धीरे अपने लक्ष्य तक पहुंचे।

‘रक्षक-01’ को विकसित करने का उद्देश्य केवल एक रोबोट बनाना नहीं था, बल्कि एक ऐसा स्मार्ट सिस्टम तैयार करना था जो सुरक्षा और निगरानी के साथ-साथ इंसानों के साथ संवाद भी कर सके। यह रोबोट घरों, स्कूलों, अस्पतालों और सार्वजनिक स्थानों पर सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने में मदद कर सकता है। इसके अलावा यह बच्चों की देखभाल में सहायक हो सकता है और किसी आपात स्थिति में तुरंत अलर्ट भी जारी कर सकता है।

इस उपलब्धि को स्थानीय स्तर पर काफी सराहना मिल रही है। शिक्षाविदों और तकनीकी विशेषज्ञों का मानना है कि इतनी कम उम्र में इस तरह का प्रोजेक्ट तैयार करना असाधारण प्रतिभा का परिचायक है। उनका कहना है कि यदि इन छात्रों को उचित मार्गदर्शन और आर्थिक सहयोग मिले, तो वे भविष्य में देश के लिए बड़ी तकनीकी उपलब्धियां हासिल कर सकते हैं।

यश और नीरज की महत्वाकांक्षा यहीं खत्म नहीं होती। वे ‘रक्षक-01’ को और अधिक उन्नत बनाने की दिशा में काम करना चाहते हैं। उनका लक्ष्य इसमें मोबाइल कंट्रोल, ऑटोमैटिक चार्जिंग और अधिक उन्नत एआई फीचर्स जोड़ना है। साथ ही वे इस प्रोजेक्ट को व्यावसायिक स्तर पर विकसित करने के लिए सरकारी योजनाओं और स्टार्टअप समर्थन की भी तलाश कर रहे हैं।

कुचेरा के इन दो छात्रों की यह सफलता न केवल उनके व्यक्तिगत प्रयासों का परिणाम है, बल्कि यह पूरे समाज के लिए एक प्रेरणा है। यह कहानी बताती है कि अगर सही दिशा में मेहनत की जाए तो छोटे शहरों से भी बड़े सपने साकार किए जा सकते हैं। ‘रक्षक-01’ केवल एक रोबोट नहीं, बल्कि भविष्य की तकनीक की ओर बढ़ता एक मजबूत कदम है, जो आने वाले समय में नई संभावनाओं के द्वार खोल सकता है।

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