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झुंझुनूं बोर्ड परीक्षा में मुन्नाभाई स्टाइल नकल का खुलासा, डमी स्टूडेंट मामा-भांजा गिरफ्तार

झुंझुनूं बोर्ड परीक्षा में मुन्नाभाई स्टाइल नकल का खुलासा, डमी स्टूडेंट मामा-भांजा गिरफ्तार

झुंझुनूं में 12वीं बोर्ड परीक्षा के शुरुआती दिन ही नकल और डमी स्टूडेंट से जुड़ा गंभीर मामला सामने आया है। अंग्रेजी के पेपर के दौरान परीक्षा केंद्र पर उस समय हड़कंप मच गया जब अटेंडेंस शीट में हस्ताक्षर और फोटो का मिलान नहीं हुआ। गहन जांच में पता चला कि परीक्षा देने आया युवक वास्तविक परीक्षार्थी नहीं बल्कि उसकी जगह बैठा डमी स्टूडेंट था। पुलिस ने तुरंत कार्रवाई करते हुए उसे और वास्तविक परीक्षार्थी को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया। यह पूरा मामला अब शिक्षा विभाग और स्थानीय प्रशासन के लिए चिंता का विषय बन गया है।

हरियाणा निवासी मामा की जगह भांजा देने आया था परीक्षा

बुहाना थाना क्षेत्र की सीआई बिमला बुडानिया ने बताया कि यह मामला हरियाणा के बहल थाना इलाके से जुड़े दो युवकों से संबंधित है। 19 वर्षीय आशीष, निवासी बिधनोई गांव, अपने मामा संजय की जगह 12वीं बोर्ड परीक्षा देने पहुंचा था। संजय, जो कि 20 वर्ष का है, बहल थाना क्षेत्र के बड़दूमुगल गांव का निवासी बताया गया है।

आशीष ने राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय धूलवा में प्रवेश पत्र दिखाकर परीक्षा कक्ष में प्रवेश पा लिया। शुरुआत में प्रक्रिया सामान्य तरीके से चलती रही, लेकिन उपस्थिति दर्ज करने के समय शिक्षक को फोटो और हस्ताक्षर मेल नहीं खाने पर संदेह हुआ। जब दस्तावेजों की गहन जांच की गई तो स्पष्ट हो गया कि परीक्षार्थी वास्तविक छात्र नहीं है, बल्कि उसकी जगह दूसरा युवक परीक्षा देने बैठा है।

इसी दौरान बाहर मौजूद पुलिसकर्मियों को एक संदिग्ध युवक, यानी असली परीक्षार्थी संजय, विद्यालय परिसर के आसपास घूमता मिला। पूछताछ पर उसने कबूल किया कि उसका भांजा आशीष पढ़ाई में उससे काफी अच्छा है और इसी वजह से उसने उसकी मदद ली। संजय ने 10वीं कक्षा मुश्किल से 33 प्रतिशत अंकों के साथ पास की थी, जबकि आशीष हाल ही में 12वीं में 76 प्रतिशत अंक लाकर प्रथम वर्ष में प्रवेश ले चुका है।

स्कूल और परीक्षा केंद्र की भूमिका पर उठ रहे सवाल

मामले के सामने आने के बाद अब सवाल सिर्फ मामा-भांजे पर ही नहीं, बल्कि शिक्षा व्यवस्था और स्कूल प्रबंधन पर भी उठने लगे हैं। संजय बाबा मामचंद उच्च माध्यमिक विद्यालय का नियमित विद्यार्थी बताया जाता है। इसी स्कूल के लगभग आठ से नौ छात्र धूलवा परीक्षा केंद्र पर परीक्षा दे रहे हैं। शुरुआती जांच में यह भी सामने आया कि इनमें से कई विद्यार्थी परीक्षा देने के लिए केंद्र पर पहुंचे ही नहीं और अधिकतर हरियाणा से संबंध रखते हैं।

यह स्थिति संदेह पैदा करती है कि क्या किसी संगठित स्तर पर भी परीक्षा में हेरफेर की कोशिश हो रही थी, या क्या विद्यालय प्रबंधन इस पूरे प्रकरण में किसी प्रकार से शामिल था। हालांकि शिक्षा विभाग अभी इस संबंध में आधिकारिक रूप से कोई ठोस टिप्पणी करने से बच रहा है, लेकिन जांच को विस्तृत स्तर पर आगे बढ़ाया जा रहा है।

हरियाणा और राजस्थान की परीक्षा प्रणाली का अंतर भी चर्चा में

इस मामले में एक और रोचक तथ्य यह है कि दोनों राज्यों की परीक्षा प्रणाली में कुछ महत्वपूर्ण अंतर हैं। हरियाणा में 12वीं कक्षा की थ्योरी परीक्षा में कुल 80 अंकों में से न्यूनतम 33 प्रतिशत अंक प्राप्त करना अनिवार्य है। इसके विपरीत राजस्थान में 20 अंकों के सत्रांक (internal assessment) के साथ थ्योरी में अपेक्षाकृत कम अंकों से भी पास होना संभव है। उदाहरण के लिए एक विद्यार्थी केवल 13 अंक लेकर भी कुल 33 प्रतिशत का मानदंड पूरा कर सकता है।

यह अंतर कई बार बाहरी राज्यों के विद्यार्थियों को राजस्थान बोर्ड परीक्षा देने की ओर आकर्षित करता है, जिससे ऐसे मामलों की आशंका और बढ़ जाती है। हालांकि यह कहना जल्दबाजी होगी कि इस घटना का संबंध भी इसी अंतर से है, लेकिन शिक्षा विभाग इस दिशा में भी जांच कर रहा है।

जांच जारी, शिक्षा विभाग तैयार कर रहा विस्तृत रिपोर्ट

डमी स्टूडेंट पकड़े जाने के बाद पुलिस ने मामा और भांजे दोनों को गिरफ्तार कर आगे की कार्यवाही शुरू कर दी है। वहीं शिक्षा विभाग ने पूरे मामले की विस्तृत रिपोर्ट तैयार करने के निर्देश जारी किए हैं। परीक्षा केंद्र के प्रभारियों से लिखित विवरण मांगा गया है, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि प्रवेश के दौरान कौन से चरण में सुरक्षा जांच कमजोर पड़ी।

यह मामला इस बात का संकेत है कि बोर्ड परीक्षाओं में बाहरी राज्यों के छात्रों द्वारा डमी उम्मीदवार भेजने का प्रयास एक गंभीर चुनौती बन रहा है। इसलिए अब निगरानी को और कड़ा करने की जरूरत महसूस की जा रही है, ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं पर पूर्ण विराम लगाया जा सके।

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