राजस्थान के वागड़ अंचल की राजनीति में अपनी सादगी और जनसरोकारों के लिए पहचाने जाने वाले सांसद राजकुमार रोत ने एक बार फिर ऐसा काम किया है, जिसने न केवल उनके क्षेत्र में बल्कि व्यापक स्तर पर भी सकारात्मक संदेश दिया है। उन्होंने अपने संसदीय क्षेत्र बांसवाड़ा और पैतृक गांव से आए बुजुर्गों को देश की राजधानी दिल्ली बुलाकर उन्हें सत्ता के केंद्र से सीधे परिचित कराया। यह पहल केवल एक यात्रा भर नहीं थी, बल्कि ग्रामीण समाज को लोकतंत्र के वास्तविक स्वरूप से जोड़ने का एक प्रयास भी थी।
इस विशेष पहल के तहत सांसद ने अपने गांव और आसपास के दूरदराज क्षेत्रों से आए वरिष्ठ नागरिकों को संसद भवन और उसके ऐतिहासिक सेंट्रल हॉल का भ्रमण कराया। इन बुजुर्गों के लिए यह अनुभव किसी सपने के साकार होने जैसा था। जिन लोगों ने अपना अधिकांश जीवन गांव की सीमाओं में बिताया और जिनकी दुनिया खेत-खलिहानों तथा पहाड़ी इलाकों तक ही सीमित रही, उनके सामने अचानक देश की सर्वोच्च लोकतांत्रिक संस्था की भव्यता खुल गई।
इस दौरान ग्रामीणों को राष्ट्रपति भवन भी दिखाया गया, जिसकी विशालता और ऐतिहासिक महत्व को देखकर वे अभिभूत नजर आए। कई बुजुर्गों ने भावुक होकर कहा कि उन्होंने कभी कल्पना भी नहीं की थी कि वे अपने जीवन में दिल्ली आकर इन प्रतिष्ठित स्थलों को इतने करीब से देख पाएंगे। उनके चेहरे पर झलकती खुशी इस पहल की सफलता का सबसे बड़ा प्रमाण थी।
सांसद राजकुमार रोत ने इस यात्रा को केवल दर्शनीय स्थलों के भ्रमण तक सीमित नहीं रखा, बल्कि इसे एक संवाद के अवसर में भी बदल दिया। उन्होंने अपने गांव से आए लोगों की मुलाकात देश के प्रमुख नेताओं से करवाई, जिससे ग्रामीणों को यह महसूस हुआ कि लोकतंत्र में उनकी भागीदारी कितनी महत्वपूर्ण है। इस क्रम में केंद्रीय खेल मंत्री मनसुख मांडविया से ग्रामीणों की मुलाकात करवाई गई, जहां उन्होंने ग्रामीणों से बातचीत कर उनका हालचाल जाना और उनके साथ आत्मीयता से समय बिताया।
इसके अलावा राज्यसभा सांसद और मशहूर शायर इमरान प्रतापगढ़ी तथा तेलंगाना के सांसद नागेश गोडम से भी इन ग्रामीणों का परिचय कराया गया। इन नेताओं ने भी ग्रामीणों का गर्मजोशी से स्वागत किया और उनके साथ बातचीत करते हुए लोकतंत्र की जड़ों को मजबूत करने की आवश्यकता पर जोर दिया। यह मुलाकातें ग्रामीणों के लिए न केवल सम्मानजनक रहीं, बल्कि उनके आत्मविश्वास को भी बढ़ाने वाली साबित हुईं।
इस पूरी यात्रा की तस्वीरें और अनुभव सांसद रोत ने सोशल मीडिया पर साझा किए, जो देखते ही देखते वायरल हो गए। अपने पोस्ट में उन्होंने लिखा कि उन्होंने अपने गांव के वरिष्ठजनों को संसद भवन और सेंट्रल हॉल का भ्रमण कराया और उनकी मुलाकात केंद्रीय मंत्रियों एवं सांसदों से करवाई। उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि इन ग्रामीणों के लिए यह पहली बार था जब उन्हें देश की राजधानी में राष्ट्रपति भवन और संसद भवन देखने का अवसर मिला।
राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, यह पहल केवल एक प्रतीकात्मक कदम नहीं है, बल्कि यह लोकतंत्र के उस मूल भाव को दर्शाती है, जिसमें समाज के अंतिम छोर पर खड़े व्यक्ति को भी समान महत्व दिया जाता है। वागड़ जैसे आदिवासी बहुल क्षेत्र से आने वाले लोगों के लिए यह अनुभव एक नई सोच और दृष्टिकोण विकसित करने वाला है। इससे यह संदेश जाता है कि देश की नीतियों और निर्णयों में उनकी भी भागीदारी है और वे भी इस व्यवस्था का अभिन्न हिस्सा हैं।
इस पहल का एक सामाजिक और मनोवैज्ञानिक प्रभाव भी देखा जा रहा है। ग्रामीण और आदिवासी समुदाय के लोगों में यह भावना मजबूत होती है कि वे भी देश की मुख्यधारा से जुड़े हुए हैं और उनके प्रतिनिधि उनके हितों को समझते हुए उन्हें आगे बढ़ाने का प्रयास कर रहे हैं। इससे युवाओं में भी जागरूकता और प्रेरणा का संचार होता है, जो भविष्य में उन्हें शिक्षा, राजनीति और प्रशासनिक क्षेत्रों में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित कर सकता है।


