मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव सोमवार को जयपुर में आयोजित राजस्थान डिजिफेस्ट टाई ग्लोबल समिट–2026 में शामिल हुए। सीतापुरा स्थित जयपुर एग्जीबिशन एंड कन्वेंशन सेंटर में आयोजित इस कार्यक्रम को संबोधित करते हुए उन्होंने राजस्थान और मध्य प्रदेश के बीच भविष्य की साझेदारी, विकास की संभावनाओं और आपसी सहयोग को लेकर कई अहम बातें कहीं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि जयपुर में हो रहा यह आयोजन केवल राजस्थान तक सीमित नहीं है, बल्कि यह राजस्थान और मध्य प्रदेश सरकारों के साझा भविष्य और संयुक्त विकास की सोच का प्रतीक है।
‘मारवाड़ी वही, जो आपदा में से अवसर निकाले’
अपने संबोधन में मोहन यादव ने कहा कि आने वाले समय की संभावनाओं को अगर कोई सही मायने में समझ सकता है तो वह राजस्थान है। उन्होंने कहा कि मारवाड़ी की पहचान यही रही है कि वह आपदा के समय भी अवसर तलाश लेता है और उसी से आगे बढ़ता है। यह सोच न केवल व्यापार बल्कि प्रशासन और नीति निर्माण में भी प्रेरणादायक है।
उन्होंने राजस्थान की उद्यमशीलता, दूरदर्शिता और जोखिम उठाने की क्षमता की सराहना करते हुए कहा कि यही गुण प्रदेश को आगे बढ़ाते हैं।
प्रतिस्पर्धा नहीं, सहयोग की भावना जरूरी
मुख्यमंत्री मोहन यादव ने राज्यों के बीच प्रतिस्पर्धा को लेकर भी अपनी स्पष्ट राय रखी। उन्होंने कहा कि राज्यों में प्रतिस्पर्धा होना स्वाभाविक है, लेकिन यह प्रतिस्पर्धा एक-दूसरे को गिराने वाली नहीं होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि विकास की असली दौड़ वह है जिसमें सभी को साथ लेकर आगे बढ़ा जाए।
उन्होंने यह भी कहा कि राजस्थान और मध्य प्रदेश दोनों ही प्रदेश विकास, निवेश और पर्यटन के क्षेत्र में एक-दूसरे के पूरक बन सकते हैं।
स्वर्णिम युग और वर्तमान भारत की तुलना
इतिहास का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि विक्रमादित्य का काल और महाभारत का समय भारत का स्वर्णिम युग था। उन्होंने दावा किया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश एक बार फिर उसी तरह के स्वर्णिम काल की ओर बढ़ रहा है।
उन्होंने वैश्विक राजनीति पर टिप्पणी करते हुए कहा कि 40 वर्ष पहले वर्ल्ड बैंक जैसी संस्थाओं के माध्यम से कई देशों पर नियंत्रण की कोशिशें की गईं। रूस के टूटने का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि लोकतंत्र की दुहाई देने वालों की सच्चाई समय-समय पर सामने आती रही है।
पर्यटन में आगे बढ़ रहे राजस्थान और मध्य प्रदेश
मुख्यमंत्री मोहन यादव ने कहा कि राजस्थान और मध्य प्रदेश दोनों ही पर्यटन के क्षेत्र में देश में तेजी से आगे बढ़ रहे हैं। ऐतिहासिक धरोहर, सांस्कृतिक विरासत और प्राकृतिक संसाधन दोनों राज्यों की बड़ी ताकत हैं। उन्होंने कहा कि यदि दोनों राज्य मिलकर काम करें तो पर्यटन के क्षेत्र में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान बनाई जा सकती है।
जल विवाद पर बड़ा बयान
मध्य प्रदेश को नदियों का मायका बताते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि बहता हुआ पानी कोई नहीं रोक सकता और अंततः वह बंगाल की खाड़ी तक पहुंचता है। जल विवाद पर बोलते हुए उन्होंने कहा कि राजस्थान को 5 प्रतिशत पानी चाहिए था। कांग्रेस सरकार के समय यह विवाद बना रहा, लेकिन अब मध्य प्रदेश सरकार ने स्पष्ट किया है कि 5 प्रतिशत ही नहीं, बल्कि 7 प्रतिशत पानी देने को भी तैयार हैं।
अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों की भूमिका
मुख्यमंत्री मोहन यादव ने कहा कि विकास की प्रक्रिया में अधिकारियों की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण होती है, क्योंकि उन्हें नीतियों को कागज पर उतारना होता है। उन्होंने कहा कि जनप्रतिनिधि जनता द्वारा चुने जाते हैं और यदि जनहित में कोई मांग आती है, तो उसमें और अधिक सहयोग देने में कोई संकोच नहीं होना चाहिए।


