शोभना शर्मा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई केंद्रीय कैबिनेट की बैठक में ऐसे तीन बड़े और ऐतिहासिक फैसले लिए गए हैं जो न केवल भारत के औद्योगिक, ऊर्जा और बुनियादी ढांचे के विकास को नई दिशा देंगे, बल्कि ‘आत्मनिर्भर भारत’ की परिकल्पना को भी और मजबूती प्रदान करेंगे। इन फैसलों से देश को अत्याधुनिक तकनीक, स्वच्छ ऊर्जा और बेहतर शहरी परिवहन के क्षेत्र में एक नई पहचान मिलने की उम्मीद है।
भारत में चिप निर्माण की नई क्रांति
कैबिनेट ने ‘इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन’ (ISM) के तहत 4 नई सेमीकंडक्टर यूनिट्स लगाने की मंजूरी दी है, जिन पर ₹4,600 करोड़ का निवेश किया जाएगा। यह यूनिट्स ओडिशा, पंजाब और आंध्र प्रदेश में स्थापित होंगी। विशेष रूप से, दो यूनिट्स ओडिशा में (SiCSem और 3D Glass), एक यूनिट पंजाब में (Continental Device India Ltd – CDIL) और एक यूनिट आंध्र प्रदेश में (ASIP Technologies) लगाई जाएगी। इन यूनिट्स में अत्याधुनिक सेमीकंडक्टर चिप्स का निर्माण होगा, जिनका उपयोग मिसाइल, रक्षा उपकरण, इलेक्ट्रिक वाहन (EVs), फास्ट चार्जिंग डिवाइस, मोबाइल फोन और डेटा सेंटर्स में किया जाएगा। इस पहल से भारत की विदेशी चिप आयात पर निर्भरता खत्म होगी और देश में पहली बार कमर्शियल कंपाउंड सेमीकंडक्टर फैक्ट्री की स्थापना होगी। इससे 2034 से अधिक प्रत्यक्ष रोजगार और हजारों अप्रत्यक्ष रोजगार सृजित होंगे, साथ ही भारत इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग का एक वैश्विक केंद्र बनने की दिशा में आगे बढ़ेगा।
अरुणाचल प्रदेश में 700 मेगावाट का हाइड्रो पावर प्रोजेक्ट
ऊर्जा क्षेत्र में कैबिनेट ने दूसरा बड़ा कदम उठाते हुए अरुणाचल प्रदेश के शि योमी जिले में ‘तातो-II हाइड्रो इलेक्ट्रिक प्रोजेक्ट’ को मंजूरी दी है। ₹8,146.21 करोड़ की लागत से बनने वाला यह प्रोजेक्ट 6 वर्षों में पूरा होगा और 700 मेगावाट की स्थापित क्षमता के साथ प्रतिवर्ष लगभग 2738.06 मिलियन यूनिट बिजली का उत्पादन करेगा।
इस प्रोजेक्ट से राज्य को 12% मुफ्त बिजली मिलेगी, जो स्थानीय बिजली आपूर्ति में सुधार लाएगी। साथ ही, यह नेशनल ग्रिड को स्थिरता प्रदान करेगा और 32 किलोमीटर से अधिक सड़क व पुलों के निर्माण से स्थानीय बुनियादी ढांचे को मजबूती मिलेगी। अस्पताल, स्कूल और अन्य सुविधाओं का विकास भी इस परियोजना के साथ होगा, जिससे स्थानीय लोगों की जीवनशैली में सकारात्मक बदलाव आएगा। यह प्रोजेक्ट न केवल स्वच्छ और हरित ऊर्जा का स्रोत बनेगा, बल्कि सीमावर्ती अरुणाचल प्रदेश की सामरिक और आर्थिक स्थिति को भी मजबूत करेगा।
लखनऊ मेट्रो का फेज-1B
तीसरा महत्वपूर्ण फैसला उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के लिए लिया गया है। लखनऊ मेट्रो रेल प्रोजेक्ट के फेज-1B को मंजूरी दी गई है, जिसके तहत 11.165 किलोमीटर लंबा नया कॉरिडोर बनाया जाएगा। इस प्रोजेक्ट पर ₹5,801 करोड़ खर्च होंगे और इसमें 12 स्टेशन होंगे — जिनमें 7 अंडरग्राउंड और 5 एलिवेटेड होंगे। यह कॉरिडोर पुराने और ऐतिहासिक लखनऊ के भीड़भाड़ वाले क्षेत्रों को जोड़ेगा, जिनमें अमीनाबाद, याहियागंज, पांडेयगंज और चौक जैसे प्रमुख बाजार शामिल हैं। किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी (KGMU) और बड़ा इमामबाड़ा, छोटा इमामबाड़ा, भूल भुलैया, रूमी दरवाजा जैसे पर्यटक स्थलों तक पहुंचना आसान हो जाएगा। मेट्रो के इस विस्तार से ट्रैफिक जाम की समस्या में कमी आएगी, गाड़ियों से निकलने वाले धुएं में कमी होगी और पर्यावरण को भी लाभ होगा। स्थानीय लोगों, छात्रों और पर्यटकों के लिए यह एक महत्वपूर्ण सुविधा साबित होगी, जो शहर के अन्य हिस्सों को एयरपोर्ट और रेलवे स्टेशन से जोड़ देगी।
आत्मनिर्भर भारत की दिशा में बड़ा कदम
ये तीनों फैसले भारत के औद्योगिक, ऊर्जा और शहरी विकास के परिदृश्य को बदलने की क्षमता रखते हैं। सेमीकंडक्टर यूनिट्स से भारत तकनीकी रूप से आत्मनिर्भर बनेगा, हाइड्रो पावर प्रोजेक्ट से स्वच्छ ऊर्जा का उत्पादन होगा और लखनऊ मेट्रो विस्तार से शहरी परिवहन में क्रांति आएगी।