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पाली में मनरेगा घोटाला: एक दिन में 81 और 99 श्रमिकों की ‘कथित मौत’, पोर्टल पर फर्जीवाड़े का खुलासा

पाली में मनरेगा घोटाला: एक दिन में 81 और 99 श्रमिकों की ‘कथित मौत’, पोर्टल पर फर्जीवाड़े का खुलासा

शोभना शर्मा।  राजस्थान के पाली जिले में मनरेगा योजना के तहत फर्जीवाड़े का चौंकाने वाला मामला सामने आया है। जांच में खुलासा हुआ है कि जिले के कई राजस्व गांवों में मनरेगा पोर्टल पर बड़ी संख्या में श्रमिकों के नाम पहले नियोजित किए गए और फिर अचानक उन्हें “मृत” दिखाकर हटा दिया गया। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि कीरवा गांव में 14 मई 2020 को एक ही दिन 81 श्रमिकों की मौत दर्ज की गई, जबकि डिंगाई गांव में 2 मार्च 2023 को 99 श्रमिकों की मौत दिखा दी गई। इन दोनों गांवों में इतनी बड़ी संख्या में लोगों की मौत का कोई वास्तविक रिकॉर्ड नहीं है।

एक ही दिन में दर्जनों श्रमिक “मृत” घोषित

जिला लोकपाल (मनरेगा) की जांच रिपोर्ट के अनुसार, पाली जिले के कीरवा और डिंगाई गांवों में पोर्टल पर मौत के आंकड़े इतने असामान्य हैं कि वे किसी प्राकृतिक आपदा या महामारी के समय ही संभव हो सकते हैं। लेकिन जांच से स्पष्ट हुआ कि उन तिथियों पर गांवों में ऐसी कोई घटना घटी ही नहीं थी।

कीरवा गांव में 14 मई 2020 को मनरेगा पोर्टल पर 81 श्रमिकों की मौत दिखाई गई। इसी तरह, डिंगाई गांव में 2 मार्च 2023 को 99 श्रमिकों को मृत घोषित कर दिया गया। आश्चर्य की बात यह है कि 23 फरवरी 2023 से 2 मार्च 2023 के बीच केवल आठ दिनों में इस गांव में कुल 120 मौतें दर्ज की गईं। ऐसा ही पैटर्न पाली जिले के अन्य गांवों — जैसे जाणुंदा और डिंगाई — में भी देखने को मिला। उदाहरण के तौर पर जाणुंदा गांव में 5 जनवरी 2020 को 36 श्रमिकों की मौत दर्ज की गई।

जिला लोकपाल ने खोली पोल

इस पूरे मामले का खुलासा तब हुआ जब जिला लोकपाल कार्यालय ने गड़बड़ियों की जांच शुरू की। लोकपाल चैन सिंह पंवार ने 9 अक्टूबर 2025 को जिला कलेक्टर को लिखित रिपोर्ट भेजी। रिपोर्ट में कहा गया कि ग्राम पंचायत कीरवा और डिंगाई में रोजगार गारंटी योजना के तहत फर्जी नाम जोड़े गए, जिन्हें बाद में मृत दिखाकर हटा दिया गया। रिपोर्ट में स्पष्ट किया गया कि यह सुनियोजित प्रशासनिक लापरवाही या फर्जीवाड़ा है। लोकपाल ने दोषी ग्राम विकास अधिकारियों और संबंधित कर्मचारियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की अनुशंसा की है।

जांच में सामने आए फर्जी श्रमिक

जिला लोकपाल की रिपोर्ट के अनुसार, ग्राम पंचायत कीरवा में मनरेगा योजना के तहत 1728 श्रमिकों के जॉब कार्डों की जांच की गई। इनमें से करीब 1000 श्रमिकों का पंजीयन सही पाया गया, जबकि 81 श्रमिकों को 14 मई 2020 को मृत घोषित कर दिया गया। जांच में यह भी सामने आया कि कई श्रमिकों को कागजों में किसी दूसरी फैमिली में स्थानांतरित दिखाया गया, जबकि जमीनी स्तर पर ऐसा कुछ नहीं हुआ। सत्यापन के दौरान डुप्लीकेट नाम और फर्जी जॉब कार्ड भी मिले।

प्रशासनिक अनदेखी और भ्रष्टाचार पर सवाल

जिला लोकपाल की रिपोर्ट ने कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। जब इतने बड़े पैमाने पर श्रमिकों की “मौत” एक ही दिन में दिखाई गई, तो जिला प्रशासन या पंचायत विभाग को इसकी जानकारी क्यों नहीं मिली? न तो किसी अस्पताल ने इतने लोगों की मृत्यु की रिपोर्ट दी, न ही किसी मीडिया रिपोर्ट में ऐसे किसी हादसे का उल्लेख हुआ। इसका सीधा मतलब यह है कि ये आंकड़े सिर्फ फर्जीवाड़े को छिपाने के लिए पोर्टल पर जोड़े गए। इस पूरे मामले ने मनरेगा जैसी गरीबों के रोजगार की गारंटी देने वाली योजना की पारदर्शिता पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

जिला परिषद ने जांच का भरोसा दिया

इस मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए जिला परिषद पाली के सीईओ मुकेश चौधरी ने कहा कि यह संभव है कि मनरेगा पोर्टल पर मृतक श्रमिकों के नाम बाद में किसी अभियान के तहत हटाए गए हों। उन्होंने कहा, “इतनी बड़ी संख्या में एक साथ एक ही दिन में श्रमिकों को मृत दिखाकर नाम हटाने के मामले की जानकारी करवाता हूं। अगर किसी स्तर पर लापरवाही या फर्जीवाड़ा पाया गया, तो जिम्मेदारों पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।”

अन्य गांवों में भी मिली गड़बड़ी

लोकपाल रिपोर्ट के अनुसार, केवल कीरवा और डिंगाई ही नहीं, बल्कि जिले के अन्य गांवों में भी इसी तरह की अनियमितताएं सामने आई हैं।

इन गांवों में एक ही दिन में दर्ज मौतों की संख्या इस प्रकार रही:

  • जाणुंदा गांव – 5 जनवरी 2020 को 36 मौतें

  • कीरवा गांव – 14 मई 2020 को 81 मौतें

  • डिंगाई गांव – 23 फरवरी 2023 को 10 मौतें

  • डिंगाई गांव – 26 फरवरी 2023 को 11 मौतें

  • डिंगाई गांव – 2 मार्च 2023 को 99 मौतें

  • डिंगाई गांव – 19 दिसंबर 2022 को 8 मौतें

इन आंकड़ों से स्पष्ट है कि यह एक संगठित तरीके से किया गया फर्जीवाड़ा था, जिसमें रिकॉर्ड्स में हेरफेर कर श्रमिकों की मृत्यु दिखाकर उनकी मजदूरी या लाभ राशि का दुरुपयोग किया गया।

भ्रष्टाचार पर सख्त कार्रवाई की मांग

स्थानीय सामाजिक कार्यकर्ताओं और ग्रामीणों ने मांग की है कि इस घोटाले की उच्च स्तरीय जांच कराई जाए। उनका कहना है कि यह केवल दो या तीन पंचायतों तक सीमित नहीं है, बल्कि जिले के अन्य इलाकों में भी इसी तरह का फर्जीवाड़ा हो सकता है। राज्य सरकार से अपेक्षा की जा रही है कि इस मामले को गंभीरता से लेते हुए दोषी अधिकारियों और कर्मचारियों पर कड़ी कार्रवाई की जाए ताकि भविष्य में मनरेगा जैसी योजनाओं में गरीब श्रमिकों का शोषण न हो सके।

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