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विधायक रविंद्र सिंह भाटी का NCERT पाठ्यपुस्तक विवाद पर बड़ा बयान

विधायक रविंद्र सिंह भाटी का NCERT पाठ्यपुस्तक विवाद पर बड़ा बयान

शोभना शर्मा।  एनसीईआरटी (NCERT) द्वारा जारी की गई कक्षा 8वीं की नई सामाजिक विज्ञान पाठ्यपुस्तक “Exploring Society: India and Beyond” (नया संस्करण, जुलाई 2025) में राजस्थान के ऐतिहासिक तथ्यों को लेकर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। पुस्तक में जारी नक्शे में राजस्थान को मराठा साम्राज्य का हिस्सा दर्शाया गया है, जिसे इतिहासकारों और जनप्रतिनिधियों ने पूरी तरह भ्रामक और तथ्यों के विपरीत बताया है। इस विवाद पर शिव विधानसभा क्षेत्र से निर्दलीय विधायक रविंद्र सिंह भाटी ने कहा कि “यह केवल एक पाठ्यपुस्तक की त्रुटि नहीं है, बल्कि राजस्थान के गौरवशाली इतिहास, हमारे पूर्वजों के बलिदानों और सांस्कृतिक अस्मिता के साथ सीधा खिलवाड़ है।”

“राजस्थान की अस्मिता के साथ हो रहा खिलवाड़” – भाटी

विधायक भाटी ने अपने बयान में कहा, “इतिहास की गलत व्याख्या करना न केवल शैक्षणिक सत्यनिष्ठा के खिलाफ है, बल्कि यह समाज की सांस्कृतिक और क्षेत्रीय पहचान को भी गहरी क्षति पहुंचाता है। राजस्थान का इतिहास वीरता, बलिदान और स्वतंत्रता की गौरवशाली गाथाओं से भरा है, जिसे विकृत करके पेश करना किसी भी रूप में स्वीकार्य नहीं है।”

उन्होंने आगे कहा कि इस तरह का प्रयास न केवल राजस्थान बल्कि भारत की एकता और अखंडता के लिए भी खतरनाक है, क्योंकि यह राष्ट्र की साझा विरासत और सांस्कृतिक विविधता की समझ को कमजोर करता है।

कक्षा 8वीं की नई किताब पर विवाद

इस विवाद की शुरुआत तब हुई जब कक्षा 8वीं की सामाजिक विज्ञान की नई पाठ्यपुस्तक में एक नक्शा सामने आया। इस नक्शे में मराठा साम्राज्य की सीमाओं को इस प्रकार दर्शाया गया है, जिसमें राजस्थान का अधिकांश हिस्सा शामिल दिखाया गया है। इतिहासकारों का कहना है कि यह चित्रण न केवल तथ्यात्मक रूप से गलत है, बल्कि राजस्थान की रियासतों की भूमिका और स्वतंत्र स्थिति को भी नज़रअंदाज करता है।

“मराठा इतिहास गौरवशाली, पर गलत सीमाएं स्वीकार्य नहीं”

रविंद्र सिंह भाटी ने स्पष्ट किया कि वह मराठा इतिहास की महत्ता और गौरव को स्वीकार करते हैं, लेकिन ऐतिहासिक सीमाओं का गलत चित्रण करना न तो मराठा इतिहास का सम्मान है और न ही शिक्षा व्यवस्था की विश्वसनीयता का। उन्होंने कहा, “NCERT और शिक्षा मंत्रालय को चाहिए कि इस गलती को तुरंत सुधारे और यह सुनिश्चित करे कि भविष्य में पाठ्यपुस्तकों में केवल तथ्यात्मक और शोध-आधारित जानकारी ही शामिल की जाए।”

केंद्रीय शिक्षा मंत्री से हस्तक्षेप की मांग

भाटी ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री से इस मामले में तत्काल हस्तक्षेप करने की मांग की है। उन्होंने कहा कि यह मामला केवल राजस्थान तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरे देश के लिए महत्वपूर्ण है। भारत की विविधता, विभिन्न क्षेत्रों का इतिहास और उनकी स्वतंत्र पहचान को सही रूप में प्रस्तुत करना राष्ट्रीय एकता के लिए आवश्यक है।

इतिहास विकृतिकरण का खतरा

भाटी ने चेतावनी दी कि इस तरह की गलतियां छात्रों के मन में भ्रम पैदा कर सकती हैं और आने वाली पीढ़ियों के ऐतिहासिक दृष्टिकोण को विकृत कर सकती हैं। उन्होंने कहा कि इतिहास को लेकर किसी भी प्रकार का क्षेत्रीय या राजनीतिक पूर्वाग्रह खतरनाक है और यह शिक्षा की विश्वसनीयता पर सवाल खड़ा करता है।

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