मनीषा शर्मा। राजस्थान में MPLAD फंड को लेकर छिड़े सियासी विवाद के बीच भजनलाल सरकार के मंत्री केके विश्नोई का बयान राजनीति को नया मोड़ देता दिख रहा है। कांग्रेस के तीन सांसदों पर आरोप है कि उन्होंने अपनी सांसद स्थानीय क्षेत्र विकास निधि (MPLADS) का हिस्सा अपने क्षेत्र के बजाय दूसरे राज्यों में खर्च करने की सिफारिश की। बीजेपी इसे जनता के साथ अन्याय बता रही है, लेकिन मंत्री विश्नोई ने इस पर अलग नजरिया पेश किया।
“देश एक यूनिट है” — केके विश्नोई
मीडिया से बातचीत में विश्नोई ने कहा कि अब समय आ गया है कि देश और प्रदेश की सीमाओं से ऊपर उठकर सोचा जाए। उन्होंने कहा कि जब विकसित भारत का लक्ष्य रखा गया है, तो पूरे देश को एक इकाई के रूप में देखना चाहिए। अगर कोई सांसद अपनी निधि किसी दूसरे राज्य में विकास कार्य के लिए देता है, तो इसमें उन्हें कुछ गलत नजर नहीं आता, क्योंकि उद्देश्य लोगों तक सुविधाएं पहुंचाना है।
अलग-अलग विचार, लेकिन आपत्ति क्यों?
बीजेपी के आईटी सेल प्रमुख अमित मालवीय ने इसे राजनीतिक रूप से गलत बताया था। इस पर प्रतिक्रिया देते हुए विश्नोई ने कहा कि हर व्यक्ति की सोच अलग हो सकती है। उनका निजी मानना है कि इस पर आपत्ति नहीं होनी चाहिए और इसे संकीर्ण राजनीतिक नजरिए से नहीं देखना चाहिए।
राजनीति में बढ़ सकती है गर्माहट
विश्नोई का यह बयान ऐसे समय में आया है, जब विपक्ष इस मुद्दे पर कांग्रेस पर लगातार हमलावर है। अब सरकार के एक वरिष्ठ मंत्री का अलग रुख सामने आने से सियासी हलकों में चर्चा तेज हो गई है। राजनीतिक जानकार मानते हैं कि विपक्ष इसे मतभेद के रूप में भुना सकता है, जबकि सत्ता पक्ष के लिए यह स्थिति चुनौती बन सकती है।
MPLADS योजना का मूल उद्देश्य
MPLADS योजना का मकसद सांसदों को अपने क्षेत्र में विकास कार्य करवाने का अधिकार देना है। ऐसे में फंड को दूसरे राज्य में खर्च करना स्वाभाविक रूप से विवाद का कारण बन जाता है। लेकिन विश्नोई के बयान ने यह सवाल खड़ा कर दिया है कि विकास को क्या सीमाओं में बांधा जाना चाहिए या फिर राष्ट्रीय दृष्टिकोण अपनाना चाहिए।


