मनीषा शर्मा। राजस्थान में सरकारी स्कूलों में मिड-डे मील योजना के तहत भोजन तैयार करने वाली कुक-कम-हेल्पर्स के लिए आने वाला समय राहत भरा हो सकता है। लंबे समय से कम मानदेय में काम कर रहीं इन महिलाओं की मांगों को लेकर अब सरकार के स्तर पर सकारात्मक संकेत मिलने लगे हैं। जयपुर जिले के प्रभारी और संसदीय कार्य मंत्री जोगाराम पटेल ने दूदू विधानसभा क्षेत्र के विधानी गांव में आयोजित रात्रि चौपाल के दौरान मानदेय बढ़ाने की मांग पर सहानुभूतिपूर्वक विचार करने का भरोसा दिलाया है।
रात्रि चौपाल में ग्रामीणों के बीच पहुंचे मंत्री
दूदू के विधानी गांव में देर रात आयोजित रात्रि चौपाल में मंत्री जोगाराम पटेल सीधे ग्रामीणों के बीच पहुंचे। उन्होंने जमीन पर बैठकर लोगों की समस्याएं सुनीं और अधिकारियों को कई मामलों में मौके पर ही समाधान के निर्देश दिए। चिकित्सा सुविधाओं की कमी, ग्रामीण सड़कों की हालत और शिक्षा से जुड़े मुद्दों पर खुलकर चर्चा हुई। मंत्री ने कहा कि सरकार का उद्देश्य अंतिम व्यक्ति तक योजनाओं का लाभ पहुंचाना है और इसी सोच के साथ रात्रि चौपाल जैसे कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं।
बजट से पहले मांगे गए ग्रामीणों के सुझाव
रात्रि चौपाल के दौरान मंत्री पटेल ने आगामी राज्य बजट को लेकर भी ग्रामीणों से सुझाव आमंत्रित किए। उन्होंने कहा कि बजट केवल कागजों पर नहीं, बल्कि जनता की जरूरतों के आधार पर तैयार होना चाहिए। ग्रामीणों ने स्वास्थ्य, रोजगार, शिक्षा और महिलाओं से जुड़े मुद्दों को प्राथमिकता देने की मांग की। इसी दौरान मिड-डे मील कुक-कम-हेल्पर्स के मानदेय का मुद्दा भी प्रमुखता से सामने आया।
मात्र 2297 रुपये में काम कर रहीं महिलाएं
जनसुनवाई के दौरान कुक-कम-हेल्पर संघ की प्रतिनिधि महिलाएं मंत्री के सामने अपनी पीड़ा लेकर पहुंचीं। उन्होंने बताया कि वर्तमान में उन्हें मात्र 2297 रुपये प्रति माह का मानदेय दिया जा रहा है, जो आज के महंगाई भरे दौर में बेहद अपर्याप्त है। इन महिलाओं की जिम्मेदारी केवल खाना पकाने तक सीमित नहीं है, बल्कि स्कूलों में बच्चों को दूध वितरण, साफ-सफाई और भोजन व्यवस्था से जुड़े अन्य कार्य भी वे ही संभालती हैं।
सुबह से दोपहर तक लगातार ड्यूटी
महिलाओं ने बताया कि वे सुबह करीब 10 बजे स्कूल पहुंच जाती हैं और दोपहर 2 बजे तक लगातार काम करती हैं। इसके बावजूद उन्हें न्यूनतम मजदूरी से भी कम पारिश्रमिक मिलता है। कई कुक-कम-हेल्पर्स ने कहा कि परिवार का पालन-पोषण करना इस मानदेय में बेहद कठिन हो गया है, जबकि मिड-डे मील योजना बच्चों के पोषण और शिक्षा के लिए बेहद अहम है।
न्यूनतम मजदूरी के बराबर मानदेय की मांग
कुक-कम-हेल्पर्स की प्रमुख मांग है कि उनके मानदेय को कम से कम न्यूनतम मजदूरी के बराबर किया जाए। उनका तर्क है कि वे भी नियमित रूप से काम करती हैं और सरकारी योजना का अहम हिस्सा हैं, ऐसे में उन्हें सम्मानजनक वेतन मिलना चाहिए। महिलाओं ने यह भी कहा कि कई वर्षों से मानदेय में कोई ठोस बढ़ोतरी नहीं हुई है।
मंत्री जोगाराम पटेल का आश्वासन
महिलाओं की बातों को गंभीरता से सुनते हुए मंत्री जोगाराम पटेल ने कहा कि वे इस विषय को मुख्यमंत्री के समक्ष रखेंगे। उन्होंने संकेत दिए कि बजट से पहले इस मांग पर विचार संभव है। मंत्री के इस आश्वासन को कुक-कम-हेल्पर्स के लिए बड़ी उम्मीद के रूप में देखा जा रहा है।
वीबी जी राम जी योजना पर भी हुआ संवाद
रात्रि चौपाल के दौरान मंत्री पटेल ने वीबी जी राम जी (VB-G RAM G) योजना को लेकर भी ग्रामीणों से संवाद किया। उन्होंने योजना के लाभ, क्रियान्वयन और संभावित सुधारों पर लोगों की राय जानी। मंत्री ने भरोसा दिलाया कि सरकार जनकल्याणकारी योजनाओं को और प्रभावी बनाने के लिए लगातार प्रयास कर रही है।
बजट से जुड़ी निगाहें
अब कुक-कम-हेल्पर्स की निगाहें राज्य बजट पर टिकी हैं। यदि सरकार उनके मानदेय में बढ़ोतरी का फैसला करती है, तो इससे हजारों महिलाओं को सीधा लाभ मिलेगा। रात्रि चौपाल में मिले आश्वासन ने इन महिलाओं के बीच नई उम्मीद जगा दी है कि उनकी वर्षों पुरानी मांग अब पूरी हो सकती है।


