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मेनार में मेवाड़ हेरिटेज फेस्टिवल, पक्षी संरक्षण और परंपरा का अनूठा संगम

मेनार में मेवाड़ हेरिटेज फेस्टिवल, पक्षी संरक्षण और परंपरा का अनूठा संगम

उदयपुर के ‘बर्ड विलेज’ मेनार  में दो दिवसीय मेवाड़ हेरिटेज फेस्टिवल का आयोजन इन दिनों खास चर्चा में है। उदयपुर से करीब 45 किलोमीटर दूर स्थित यह गांव देशभर में ‘बर्ड विलेज’ के नाम से जाना जाता है। यहां कुदरत और परंपरा का ऐसा अनूठा संगम देखने को मिल रहा है, जिसने पर्यावरण प्रेमियों, संस्कृति में रुचि रखने वालों और पर्यटकों का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है। फेस्टिवल का उद्घाटन मेवाड़ के पूर्व राजपरिवार की सदस्य निवृत्ति कुमारी मेवाड़ ने किया। उन्होंने मेनार पहुंचकर तालाबों और पक्षियों के बीच समय बिताया और गांव के लोगों द्वारा वर्षों से किए जा रहे संरक्षण कार्यों की खुले दिल से सराहना की।

पक्षी संरक्षण में मेनार की मिसाल

निवृत्ति कुमारी मेवाड़ ने अपने संबोधन में कहा कि मेनार के ग्रामीणों ने जिस तरह पक्षियों के संरक्षण और संवर्धन को अपनी जीवनशैली का हिस्सा बनाया है, वह पूरे देश के लिए एक मिसाल है। उन्होंने कहा कि यहां के लोग पक्षियों को केवल मेहमान नहीं, बल्कि परिवार का हिस्सा मानते हैं। यही कारण है कि प्रवासी पक्षी हर साल हजारों किलोमीटर की दूरी तय कर मेनार के तालाबों तक पहुंचते हैं।

उन्होंने धंड तालाब पर विभिन्न प्रजातियों के पक्षियों को निहारा और बाद में मृदेश्वर महादेव के दर्शन किए। उनका कहना था कि प्रकृति और आस्था का यह जुड़ाव ही मेनार की सबसे बड़ी ताकत है।

पहले दिन लोक कला और संस्कृति की रंगीन झलक

फेस्टिवल के पहले दिन आयोजन स्थल पर 19 अलग-अलग स्टॉल लगाए गए, जिनमें मेवाड़ की समृद्ध लोक कला और परंपराओं की झलक देखने को मिली। बस्सी की प्रसिद्ध कावड़ कला, जिसमें लकड़ी पर उकेरी गई धार्मिक कथाएं दिखाई देती हैं, लोगों के आकर्षण का केंद्र रही। मोलेला के टेराकोटा यानी मिट्टी शिल्प ने ग्रामीण शिल्पकारों की रचनात्मकता को सामने रखा।

इसके साथ ही ट्राइबल आर्ट, ब्लॉक प्रिंटिंग, हैंड एम्ब्रॉयडरी और वाइल्डलाइफ फोटोग्राफी की प्रदर्शनी ने फेस्टिवल को बहुआयामी बना दिया। हर स्टॉल अपनी अलग कहानी कह रहा था और मेवाड़ की सांस्कृतिक विरासत को जीवंत कर रहा था।

कविता और संवाद से जीवंत हुआ इतिहास

फेस्टिवल में पूजा मेनारिया ने कविता के माध्यम से मेनार गांव का इतिहास और उसकी परंपराएं सुनाईं। उनकी प्रस्तुति ने वहां मौजूद लोगों को भावुक कर दिया और गांव के संघर्ष, समर्पण और गौरवशाली अतीत से जोड़ दिया।

इसके साथ ही पर्यावरण विशेषज्ञों ने ‘आर्द्रभूमि और पक्षी जीवन’ विषय पर चर्चा की। उन्होंने बताया कि तालाब और वेटलैंड केवल पक्षियों के लिए ही नहीं, बल्कि पूरे पारिस्थितिकी तंत्र के लिए कितने महत्वपूर्ण हैं। वक्ताओं ने जोर देकर कहा कि यदि इन जल संरचनाओं का संरक्षण नहीं किया गया, तो भविष्य में गंभीर पर्यावरणीय संकट पैदा हो सकता है।

पक्षी मित्रों का सम्मान

फेस्टिवल के दौरान उन लोगों को विशेष रूप से सम्मानित किया गया, जो वर्षों से बिना किसी दिखावे के पक्षियों की सेवा में लगे हुए हैं। पक्षी मित्र धर्मेंद्र मेनारिया, नितेश लोहार, कीर्ति जोशी और तिरुपति मेरावत को मोमेंटो देकर सम्मानित किया गया।

इसके अलावा दिल्ली में गणतंत्र दिवस परेड में शामिल होने वाले मेनार के युवाओं हर्षमीता मेनारिया, खुशी मेनारिया और किशन गुर्जर का भी सम्मान किया गया। इस सम्मान ने गांव के युवाओं में गर्व और प्रेरणा का भाव पैदा किया।

दूसरे दिन वेटलैंड मैराथन और हेरिटेज वॉक

फेस्टिवल के दूसरे दिन की शुरुआत ‘मैराथन फॉर वेटलैंड’ से होगी। इस मैराथन का उद्देश्य लोगों को जल संरचनाओं और आर्द्रभूमि के महत्व के प्रति जागरूक करना है। इसके बाद गांव के बुजुर्गों और पर्यावरण विशेषज्ञों के बीच संवाद का आयोजन किया जाएगा, जिसमें मेनार की परंपराओं और संरक्षण मॉडल पर चर्चा होगी।

हेरिटेज वॉक के जरिए लोग गांव की पुरानी गलियों, ऐतिहासिक स्थलों और धरोहरों को करीब से देख सकेंगे। बच्चों के लिए कहानी सुनाने का विशेष सत्र भी रखा गया है, ताकि वे अपनी संस्कृति और प्रकृति से भावनात्मक रूप से जुड़ सकें।

इको-टूरिज्म और रोजगार की नई संभावनाएं

इस अवसर पर अजय चित्तौड़ा, राहुल भटनागर, गौरव सिंघवी, डॉ. सतीश शर्मा सहित कई गणमान्य लोग मौजूद रहे। वक्ताओं ने कहा कि इस तरह के आयोजन इको-टूरिज्म को बढ़ावा देने के साथ-साथ स्थानीय लोगों के लिए रोजगार के नए अवसर भी पैदा करते हैं।

मेवाड़ हेरिटेज फेस्टिवल ने यह साबित कर दिया है कि अगर समुदाय, संस्कृति और प्रकृति एक साथ आगे बढ़ें, तो विकास भी टिकाऊ और समावेशी हो सकता है। मेनार आज केवल एक गांव नहीं, बल्कि पर्यावरण संरक्षण और सांस्कृतिक चेतना का जीवंत उदाहरण बनकर उभरा है।

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