मनीषा शर्मा। भारत रत्न और पूर्व प्रधानमंत्री स्वर्गीय अटल बिहारी वाजपेयी की जयंती के अवसर पर जयपुर में बुधवार को सुशासन दिवस के तहत कई कार्यक्रम आयोजित किए गए। शासन सचिवालय में पुष्पांजलि समारोह और सुशासन शपथ कार्यक्रम के साथ दिन की शुरुआत हुई। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने वाजपेयी को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए उन्हें एक कुशल राजनीतिज्ञ, प्रखर वक्ता और दूरदर्शी नेता बताया, जिनके नेतृत्व ने देश में सुशासन की अनुकरणीय मिसाल पेश की। सीएम ने कहा कि वाजपेयी का जीवन लोकसेवा, संवाद और राष्ट्रहित के प्रति समर्पण का प्रतीक रहा। उन्होंने राजनीतिक मतभेदों से ऊपर उठकर लोकतांत्रिक मूल्यों को मजबूत किया और विकास को जनकल्याण से जोड़ा।
अटल सरकार की योजनाओं का उल्लेख
मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में वाजपेयी सरकार के दौर की नीतियों और जनकल्याणकारी पहलों का विशेष रूप से जिक्र किया। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना ने गांव-गांव को जोड़कर ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई गति दी। इसके साथ ही स्वर्णिम चतुर्भुज परियोजना ने देश के बड़े शहरों को सड़कों के आधुनिक नेटवर्क से जोड़ा और व्यापार, पर्यटन तथा रोजगार के अवसर बढ़ाए। सीएम ने कहा कि अटल जी का सुशासन मॉडल शासन की उस सोच को आगे बढ़ाता है, जिसमें विकास समान रूप से हर नागरिक तक पहुंचे और प्रशासन संवेदनशील होकर कार्य करे। यह मॉडल आज भी राज्य और देश के लिए प्रेरणा बना हुआ है।
सुशासन पर मुख्यमंत्री का संदेश
कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने सुशासन के मूल सिद्धांतों पर विस्तार से बात की। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सोच है कि शासन में न तो अनावश्यक हस्तक्षेप हो और न ही नागरिकों पर दबाव। इसी भावना के साथ राजस्थान सरकार पारदर्शी, जवाबदेह और परिणाम-उन्मुख प्रशासन की दिशा में काम कर रही है।
उन्होंने स्पष्ट किया कि सुशासन का अर्थ केवल योजनाएं बनाना नहीं, बल्कि उन्हें समय पर, सरल और प्रभावी तरीके से जनता तक पहुँचाना है। इसके लिए नियम पारदर्शी, अधिकारी संवेदनशील और व्यवस्था जवाबदेह होनी चाहिए। सीएम ने कहा कि सुशासन तीन स्तंभों — विश्वास, संवाद और परिणाम — पर खड़ा होता है। जब जनता को यह भरोसा हो कि सरकार उसकी बात सुन रही है और समस्याओं का समाधान समयबद्ध ढंग से कर रही है, तभी लोकतंत्र मजबूत होता है। इसी उद्देश्य से राज्य सरकार सेवा-वितरण तंत्र में सुधार, डिजिटल प्रक्रियाओं और पारदर्शिता पर विशेष ध्यान दे रही है।
सुशासन दिवस के तहत कार्यक्रमों की श्रृंखला
सुशासन दिवस के अवसर पर मुख्यमंत्री का दिन विभिन्न कार्यक्रमों से भरा रहा। वे एसएमएस इंडोर स्टेडियम में आयोजित सांसद खेल महोत्सव में पहुंचे, जहाँ युवाओं और खिलाड़ियों को प्रेरित करने वाले कार्यक्रम आयोजित किए गए। इसके बाद मुख्यमंत्री एचसीएम रीपा (ओटीएस) में आयोजित राज्य स्तरीय सुशासन दिवस समारोह में शामिल हुए। यहाँ प्रशासनिक सुधार, पारदर्शिता और बेहतर सेवा-वितरण को लेकर विचार-विमर्श हुआ। दोपहर में वे कॉमर्स कॉलेज में आयोजित राज्य स्तरीय रोजगार मेले में पहुंचे। इस कार्यक्रम का उद्देश्य युवाओं को रोजगार अवसरों से जोड़ना और उद्योग-संस्थानों के साथ सीधा संपर्क कायम करना था। इसके अलावा, मानसरोवर स्थित सिटी पार्क में भी वाजपेयी की जयंती से जुड़े कार्यक्रम प्रस्तावित रहे, जिनमें जनता की व्यापक भागीदारी देखने को मिली।
अटल बिहारी वाजपेयी: नेतृत्व और समर्पण की मिसाल
कार्यक्रमों के दौरान वक्ताओं ने वाजपेयी के व्यक्तित्व और योगदान पर भी प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि अटल जी ने गठबंधन राजनीति के दौर में स्थिर और संतुलित सरकार चलाई। विदेश नीति, कृषि सुधारों और आधारभूत संरचना विकास में उनके निर्णय ऐतिहासिक साबित हुए। उनकी राजनीतिक शैली में संवाद, धैर्य और सहमति निर्माण की विशेष भूमिका रही। यही कारण है कि विरोधी दल भी उनके नेतृत्व का सम्मान करते थे। सुशासन दिवस पर आयोजित कार्यक्रमों का उद्देश्य उनके विचारों और मूल्यों को शासन-प्रशासन के व्यवहारिक ढांचे में उतारना है।
जनता-केंद्रित शासन की दिशा में प्रयास
राज्य सरकार का दावा है कि सुशासन दिवस केवल औपचारिकता नहीं, बल्कि प्रशासनिक सुधारों की निरंतर प्रक्रिया का हिस्सा है। विभिन्न विभागों में पारदर्शिता बढ़ाने, भ्रष्टाचार पर अंकुश लगाने और नागरिक सेवाओं को ऑनलाइन करने की दिशा में कई कदम उठाए जा रहे हैं। सीएम ने कहा कि सरकार का लक्ष्य हर वर्ग तक योजनाओं का लाभ पहुँचाना है। उन्होंने अधिकारियों से अपील की कि वे संवेदनशीलता और उत्तरदायित्व के साथ काम करें, ताकि जनता का विश्वास मजबूत हो और विकास का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुँचे।


