राजस्थान के सरकारी स्कूलों में बुधवार को राज्यव्यापी स्तर पर मेगा पेरेंट-टीचर मीटिंग का आयोजन किया गया। इस पहल का उद्देश्य छात्रों, अभिभावकों और शिक्षकों के बीच बेहतर संवाद स्थापित करना था, ताकि बच्चों की शैक्षणिक स्थिति का सही आकलन किया जा सके और उनकी कमजोरियों को दूर करने के लिए प्रभावी रणनीति बनाई जा सके। इस दौरान स्कूलों में अभिभावकों की अच्छी भागीदारी देखने को मिली, जहां उन्होंने अपने बच्चों की पढ़ाई, व्यवहार और प्रगति से जुड़ी जानकारी शिक्षकों से प्राप्त की। कई स्थानों पर अभिभावकों ने शिक्षकों के साथ खुलकर चर्चा की और बच्चों के भविष्य को लेकर सुझाव भी साझा किए।
शिक्षा मंत्री का जयपुर में औचक निरीक्षण
मेगा पीटीएम के आयोजन के बीच राज्य के शिक्षा मंत्री मदन दिलावर ने जयपुर के विभिन्न सरकारी स्कूलों का औचक निरीक्षण किया। उन्होंने गणगौरी बाजार और ब्रह्मपुरी क्षेत्र के विद्यालयों का दौरा किया और वहां की व्यवस्थाओं का जायजा लिया। निरीक्षण के दौरान उन्होंने अभिभावकों और छात्रों से सीधे संवाद किया और उनकी समस्याओं को सुना। इस दौरान उन्होंने गणगौरी बाजार स्थित पीएम श्री स्कूल और ब्रह्मपुरी के राजकीय विद्यालय में शिक्षकों के साथ भी बातचीत की और शिक्षा व्यवस्था को और बेहतर बनाने के लिए सुझाव दिए।
पीटीएम व्यवस्था पर जताई नाराजगी
निरीक्षण के दौरान शिक्षा मंत्री ने पाया कि कई स्कूलों में पीटीएम का आयोजन व्यवस्थित तरीके से नहीं किया गया था। इस पर उन्होंने नाराजगी जताते हुए कहा कि इस तरह के महत्वपूर्ण कार्यक्रम को अधिक सुनियोजित और प्रभावी ढंग से आयोजित किया जाना चाहिए। उन्होंने विभागीय अधिकारियों को निर्देश दिए कि भविष्य में पीटीएम को बेहतर तरीके से आयोजित किया जाए, ताकि इसका वास्तविक उद्देश्य पूरा हो सके। उनके अनुसार, यह केवल औपचारिकता नहीं बल्कि बच्चों के समग्र विकास के लिए एक महत्वपूर्ण मंच है।
सरकारी स्कूलों की स्थिति में सुधार का दावा
मंत्री मदन दिलावर ने कहा कि राज्य के सरकारी स्कूलों की स्थिति में लगातार सुधार हो रहा है। उन्होंने बताया कि कई विद्यालयों में सकारात्मक परिणाम सामने आए हैं, जहां छात्रों का प्रदर्शन बेहतर हुआ है और शिक्षा का स्तर ऊंचा उठा है।
हालांकि उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि कुछ स्थानों पर अभी भी लापरवाही देखने को मिल रही है। ऐसे मामलों को गंभीरता से लेते हुए जल्द सुधार करने की बात कही गई है। उन्होंने स्पष्ट किया कि जो कर्मचारी अपने दायित्वों का सही तरीके से निर्वहन नहीं कर रहे हैं, उनके खिलाफ नियमों के तहत कार्रवाई की जाएगी।
शिक्षकों की अनुपस्थिति पर सख्ती
निरीक्षण के दौरान कई स्कूलों में कुछ शिक्षक अनुपस्थित पाए गए, जिस पर शिक्षा मंत्री ने कड़ी नाराजगी व्यक्त की। उन्होंने कहा कि कुछ शिक्षक अन्य सरकारी कार्यों का हवाला देकर स्कूल में उपस्थित नहीं रहते, जो कि स्वीकार्य नहीं है। मंत्री ने बताया कि कई शिक्षकों को चुनाव से संबंधित बीएलओ ड्यूटी सौंपी जाती है, लेकिन यह ड्यूटी सामान्यतः आधे दिन की होती है। ऐसे में शिक्षकों को शेष समय स्कूल में उपस्थित रहकर अपनी जिम्मेदारी निभानी चाहिए।
उन्होंने यह भी जानकारी दी कि शिक्षा विभाग ने इस संबंध में चुनाव आयोग को प्रस्ताव भेजा है, जिसमें यह सुझाव दिया गया है कि शिक्षकों से पहले स्कूल में पूरा कार्य लिया जाए, उसके बाद ही उन्हें अन्य जिम्मेदारियों में लगाया जाए।
ब्रह्मपुरी स्कूल में हुआ विवाद
निरीक्षण के दौरान ब्रह्मपुरी स्थित एक सरकारी स्कूल में शिक्षा मंत्री और प्रिंसिपल के बीच बहस की स्थिति भी उत्पन्न हो गई। हालांकि बाद में मंत्री ने स्पष्ट किया कि प्रिंसिपल ने अपनी बात उन्हें विस्तार से समझा दी है और पूरे मामले को समझ लिया गया है। इस घटना ने यह संकेत दिया कि शिक्षा विभाग जमीनी स्तर पर व्यवस्थाओं को लेकर गंभीर है और किसी भी प्रकार की लापरवाही को नजरअंदाज नहीं किया जाएगा।
अभिभावकों की भागीदारी पर मिला मिश्रित प्रतिक्रिया
जहां कई स्कूलों में अभिभावकों की उपस्थिति संतोषजनक रही, वहीं कुछ विद्यालयों में अपेक्षाकृत कम अभिभावक पहुंचे। इस पर भी मंत्री ने चिंता जताई और कहा कि अभिभावकों की सक्रिय भागीदारी बच्चों के विकास के लिए अत्यंत आवश्यक है।
उन्होंने कहा कि स्कूल और अभिभावकों के बीच मजबूत संवाद से ही शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार संभव है। इसके लिए भविष्य में जागरूकता बढ़ाने की आवश्यकता है, ताकि अधिक से अधिक अभिभावक इस तरह के कार्यक्रमों में हिस्सा लें।


