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राजस्थान में मेडिकल शॉप मालिक हड़ताल की तैयारी

राजस्थान में मेडिकल शॉप मालिक हड़ताल की तैयारी

मनीषा शर्मा। राजस्थान में दवा विक्रेताओं ने एक बड़ा कदम उठाने की तैयारी कर ली है। राजस्थान केमिस्ट एसोसिएशन ने राज्य सरकार को चेतावनी दी है कि यदि उनके लंबित बकाया का भुगतान नहीं किया गया तो वे राज्यव्यापी हड़ताल पर जाएंगे। एसोसिएशन का दावा है कि राजस्थान सरकार स्वास्थ्य योजना (आरजीएचएस) में गंभीर अनियमितताएं हैं और इस योजना के अंतर्गत मेडिकल शॉप मालिकों का करीब 880 करोड़ रुपये का भुगतान अटका हुआ है

केमिस्ट एसोसिएशन का आरोप

राजस्थान केमिस्ट एसोसिएशन के अध्यक्ष विवेक विजयवर्गीय ने कहा कि बार-बार निवेदन करने के बावजूद सरकार ने इस मुद्दे को हल करने के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाया है। उन्होंने आरोप लगाया कि केमिस्टों को लंबे समय से आर्थिक नुकसान झेलना पड़ रहा है और अब हालात इतने बिगड़ गए हैं कि मजबूरी में उन्हें हड़ताल का रास्ता अपनाना पड़ रहा है।

छह से सात महीने की देरी

एसोसिएशन के उपाध्यक्ष सचिन गोयल और सचिव रवि गुप्ता ने जानकारी दी कि विभागीय अधिकारियों ने 21 दिनों के भीतर भुगतान करने का आश्वासन दिया था, लेकिन इसके बावजूद 6 से 7 महीने की देरी लगातार हो रही है। उनका कहना है कि यह देरी न केवल दवा विक्रेताओं के लिए मुश्किलें खड़ी कर रही है, बल्कि मरीजों तक दवाओं की उपलब्धता पर भी असर डाल सकती है।

पोर्टल से गायब हुए लाखों बिल

दवा विक्रेताओं का सबसे बड़ा आरोप यह है कि आरजीएचएस पोर्टल से तीन लाख से ज्यादा बिल गायब हो गए हैं। इन बिलों को लेकर अभी तक सरकार या विभाग की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है। इस वजह से बकाया भुगतान और अधिक उलझता जा रहा है।

आर्थिक संकट में केमिस्ट परिवार

विजयवर्गीय ने बताया कि बढ़ते कर्ज और बकाया भुगतान के कारण हजारों मेडिकल शॉप मालिक गंभीर आर्थिक संकट में फंस गए हैं। कई दवा विक्रेताओं की स्थिति इतनी खराब हो चुकी है कि वे अपने बच्चों की स्कूल फीस तक नहीं भर पा रहे हैं। यहां तक कि कुछ दुकानों पर ताले लगने की नौबत आ गई है।

उन्होंने कहा कि राजस्थान भर में करीब 5,000 से अधिक केमिस्ट परिवार इस समस्या से जूझ रहे हैं और अब वे अपने हक के लिए आंदोलन करने को मजबूर हो गए हैं।

सरकार पर दबाव बनाने की रणनीति

एसोसिएशन का कहना है कि वे सरकार को समयसीमा देकर हड़ताल का ऐलान करेंगे। उनका उद्देश्य मरीजों को परेशानी में डालना नहीं है, लेकिन सरकार की लापरवाही और टीपीए (थर्ड पार्टी एडमिनिस्ट्रेटर) की मनमानी के कारण हालात बिगड़ रहे हैं।

यदि यह हड़ताल होती है तो राज्यभर में दवा सप्लाई प्रभावित हो सकती है और इसका सीधा असर आम मरीजों पर पड़ेगा। ऐसे में सरकार पर दबाव बढ़ना तय है।

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