राजस्थान में अवैध रूप से रह रहे विदेशी नागरिकों के खिलाफ राज्य सरकार और पुलिस मुख्यालय के निर्देश पर संचालित विशेष अभियान के दौरान अजमेर जिले में एक बड़ी कार्रवाई सामने आई है। सीआईडी की टीम ने एक नाइजीरियन छात्र को वीजा नियमों का गंभीर उल्लंघन करने के आरोप में हिरासत में लिया है।
अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक राजेश मीणा ने बताया कि अभियान के दौरान लगातार विदेशी नागरिकों की पड़ताल की जा रही है। इसी क्रम में यह सूचना मिली कि एक नाइजीरियन नागरिक काफी समय से वीजा समाप्त होने के बावजूद राजस्थान सहित देश के विभिन्न स्थानों पर रह रहा है। जानकारी की पुष्टि होते ही सीआईडी व जिला पुलिस ने संयुक्त कार्रवाई की और उसे हिरासत में ले लिया।
वीजा समाप्त होने के बाद भी देशभर में घूमता रहा नाइजीरियन छात्र, FRRO रजिस्ट्रेशन तक नहीं कराया
जांच में जो तथ्य सामने आए, उन्होंने इस मामले को और गंभीर बना दिया। पकड़े गए नाइजीरियन युवक की पहचान नजीब ईशा लावन के रूप में हुई, जिसने भारत आने के बाद न तो अनिवार्य एफआरआरओ (Foreigners Regional Registration Office) में रजिस्ट्रेशन करवाया और न ही अपना वीजा नवीनीकरण कराया। दोनों कदम किसी भी विदेशी नागरिक के लिए बुनियादी और अनिवार्य होते हैं।
पुलिस अधिकारियों के अनुसार वीजा अवधि समाप्त होने के बाद भी वह लगातार भारत में घूमता रहा। पिछले दो वर्षों में वह विभिन्न राज्यों में रहा, लेकिन कहीं भी उसने अपनी वैध स्थिति से जुड़े किसी नियम का पालन नहीं किया। यह न केवल वीजा प्रावधानों का उल्लंघन है, बल्कि कानूनन गंभीर अपराध की श्रेणी में आता है।
छात्र ने लिया था ऑनलाइन एडमिशन, लेकिन विश्वविद्यालय में कदम तक नहीं रखा
सीआईडी जांच में खुलासा हुआ कि आरोपी युवक ने राजस्थान की प्रसिद्ध Bhagwant University में एमएससी आईटी में ऑनलाइन प्रवेश लिया था। इसी आधार पर उसे स्टूडेंट वीजा जारी किया गया और वह 6 सितंबर 2023 को भारत आया।
लेकिन चौंकाने वाली बात यह थी कि प्रवेश लेने के बाद उसने विश्वविद्यालय में एक बार भी उपस्थिति नहीं दी। न कोई कक्षा अटेंड की और न ही विभाग से संपर्क किया। जांच में यह भी सामने आया कि उसने विश्वविद्यालय द्वारा दी जाने वाली आवश्यक रिपोर्टिंग औपचारिकताओं को भी पूरा नहीं किया।
दो साल से अधिक समय से वह पढ़ाई से पूरी तरह दूर रहा और भारत में अपनी गतिविधियों को छिपाते हुए लगातार अलग-अलग स्थानों पर घूमता रहा। इससे यह आशंका भी जताई जा रही है कि छात्र वीजा का उपयोग केवल भारत में अवैध रूप से रहने के लिए किया गया।
सीआईडी ने पकड़ा, अलवर के डिटेंशन सेंटर भेजा गया; अब डिपोर्ट की कार्रवाई शुरू
12 फरवरी को सीआईडी एवं जिला पुलिस की संयुक्त टीम ने कार्रवाई करते हुए नजीब ईशा लावन को पकड़ा और सभी कागजातों की जांच के बाद उसे अलवर स्थित डिटेंशन सेंटर भेज दिया गया। अधिकारी बताते हैं कि पूरे मामले की विस्तृत जानकारी गृह विभाग को प्रेषित की जा चुकी है और अब छात्र को भारत से डिपोर्ट करने की प्रक्रिया शुरू होगी।
इसके साथ ही उसे ब्लैकलिस्ट भी किया जाएगा, जिससे भविष्य में वह भारत में प्रवेश नहीं कर सकेगा। ऐसे मामलों में सामान्यतः कड़े प्रावधान लागू किए जाते हैं, क्योंकि वीजा का दुरुपयोग देश की आंतरिक सुरक्षा के दृष्टिकोण से भी संवेदनशील माना जाता है।
पुलिस का सख्त रुख, अभियान आगे भी जारी रहेगा
राज्य में चल रहे अभियान के दौरान यह कई मामलों में से एक है, लेकिन इसे सबसे गंभीर घटनाओं में से एक माना जा रहा है। अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक राजेश मीणा ने स्पष्ट कहा कि वीजा नियमों का उल्लंघन करने वाले किसी भी विदेशी नागरिक को बख्शा नहीं जाएगा। जो भी व्यक्ति नियमों का पालन नहीं कर रहा है, उसके खिलाफ कार्रवाई होगी और उसे हिरासत में लेकर डिपोर्टेशन का सामना करना पड़ेगा।
अधिकारी बताते हैं कि विदेशियों की गतिविधियों पर विशेष निगरानी रखी जा रही है। होटलों, हॉस्टलों, किराए के मकानों और विश्वविद्यालयों में रहने वाले विदेशी नागरिकों की नियमित जांच की जा रही है, ताकि कोई भी अवैध रूप से रह रहा विदेशी व्यक्ति कानूनी कार्रवाई से बच न सके। पुलिस का कहना है कि इस अभियान का उद्देश्य कानून व्यवस्था मजबूत करना, सुरक्षा सुनिश्चित करना और ऐसे मामलों को रोकना है, जिनसे देश की आंतरिक सुरक्षा पर खतरा उत्पन्न हो सकता है।
कानून के प्रति लापरवाही या सोची-समझी रणनीति — जांच में तलाशे जाएंगे कई सवाल
मामले में आगे की जांच यह पता लगाने पर केंद्रित होगी कि छात्र का उद्देश्य केवल भारत में अवैध रूप से ठहरना था या इसके पीछे कोई अन्य कारण भी थे। विश्वविद्यालय में प्रवेश लेने के बावजूद उसकी अनुपस्थिति को भी जांच का हिस्सा बनाया गया है, ताकि पता लगाया जा सके कि प्रवेश सिर्फ औपचारिकता थी या किसी बड़े उद्देश्य का हिस्सा। सीआईडी इस बात की भी जांच कर रही है कि क्या छात्र ने किसी लोकल समूह, एजेंट या नेटवर्क के माध्यम से भारत में अपनी उपस्थिति छिपाई थी। यदि ऐसा पाया जाता है, तो आगे कई और गिरफ्तारियां हो सकती हैं।


